मुंबई के लिए समर्पित उत्तर भारतीय‡ आर. एन. सिंह

अपने परिवार और गांव को छोड़कर मुंबई आने वाले लोगों में अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश के ही हैं। मुंबई की चमक‡दमक, यहां मिलने वाली सुविधाएं और आजीविका के साधनों से आकर्षित होकर कई लोग अपनी किस्मत आजमाने यहां आते हैं। कुछ लोगों के सपने साकार होते हैं, कुछ लोगों के नहीं, परन्तु कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके सपने स्वयं के साथ‡साथ समाज कल्याण से भी जुड़े होते हैं। ऐसी ही एक सख्शियत हैं आर.एन. सिंह । सुरक्षा से सम्बन्धित व्यवसाय करने वाले आर.एन. सिंह सामाजिक और लोक-कल्याण के कार्यों के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं। प्रस्तुत है इसी सन्दर्भ में उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न- उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के इलाके से पहले पहल जबआप मुंबई आये, तब आप क्या सपना संजोकर आये थे?

उत्तर – मैं जब मुंबई आया तो मेरे पास सिर्फ 100 रुपये थे। मैं यहां नौकरी करने के साथ-साथ बच्चों को ट्युशन पढ़ाता था। नेपियन सी रोड पर मैंने हिंदी की क्लासेस ली है । मुंबई आने के 10 सालों में मैंने बहुत संघर्ष किया। मेरी पत्नी ने मेरे साथ बहुत कष्ट उठाये। हम सदा सोचते थे कि ऐसा कुछ विशेष करें ताकि हमारी और हमारे साथ हमारे सामाजिक बन्धुओं की उन्नति हो।

प्रश्न‡ आपके सपनों का यह सफर किस तरह रहा?

उत्तर‡ मैं गोरखपुर जिले के भरौली गांव का रहने वाला हूं । वहां पर मैंने इण्टर मीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की। सन 1967 में मैं मुंबई आया। यहां लगभग 10 वर्ष मैंने नौकरी की। उसके बाद मैंने सिक्यूरिटी का व्यवसाय शुरू किया। आज इस व्यवसाय को शुरू हुए लगभग 35 साल हो चुके हैं। भारत के कई शहरों में हमारी शाखाएं हैं और मुख्य कार्यालय मुंबई के पवई क्षेत्र में है ।

प्रश्न‡ इस व्यवसाय की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर‡ मेरा इस व्यवसाय से कोई सम्बन्ध नहीं था। मेरे एक मित्र को इसकी जानकारी थी। उन्हीं के साथ मैंने पार्टनरशिप में यह व्यवसाय शुरू किया। तीन साल एक साथ काम करने के बाद हमने अपना व्यवसाय अलग कर लिया। मैंने बाम्बे इंटेलिजेन्स सिक्यूरिटी नामक कम्पनी को चलाने का फैसला किया।

प्रश्न- आप इस व्यवसाय की ओर कैसे मुड़े?

उत्तर – मेरे मित्र ने जब मेरे सामने यह प्रस्ताव रखा था तो इस व्यवसाय के लिए खुला मैदान था और आगे बढ़ने के काफी अवसर दिख रहे थे। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती है सिक्यूरिटी की आवश्यकता भी बढ़ती है। आज सभी जगह सिक्यूरिटी गार्ड की आवश्यकता है, चाहे वह आवासीय इमारतें हों या औद्योगिक परिसर। सरकार के पास इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षा देने के साधन उपलब्ध नहीं हैं। अत: प्राइवेट सिक्यूरिटी गार्ड की जरूरत है और इस व्यवसाय में मांग सदा बनी रहेगी।

प्रश्न- इस व्यवसाय में सुरक्षा रक्षकों को प्रशिक्षित करने की बड़ी आवश्यकता होती है। इसका प्रबन्ध आपने कैसे किया है?

उत्तर- गांव में ही मैंने सिक्यूरिटी गार्ड को प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोले हैं। मेरे गांव के साथ‡साथ ये केन्द्र चैन्नई, कर्जत, खण्डवा, बड़ौदा में भी चलाये जाते हैं। जयपुर में भी एक नया प्रशिक्षण केन्द्र शुरू करने की योजना है। बहुत बड़ी संख्या में सिक्यूरिटी गार्ड इन केन्द्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और देशभर में कार्य करते हैं। हमारी भी देश के कई शहरों में शाखाएं हैं जो सुरक्षा का कार्य करती हैं। सभी शहरों को मिलाकर लगभग एक लाख लोग हमारे यहां काम कर रहें हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि इन एक लाख लोगों की रोजी-रोटी का प्रबन्ध मेरे द्वारा किया जा रहा है।

प्रश्न‡ व्यावसायिक सफलता के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र मेंभी आप सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इसकी प्रेरणा कहां से मिलीऔर इसका संचालन कैसे करते हैं?

उत्तर‡ मेरी पत्नीअब हमारे बीच नहीं है। उनकी इच्छा थी कि हमारे गांव में लड़कियों के लिए कॉलेज खोला जाय। उनकी इच्छा के अनुरूप मैंने गांव में लड़कियों के लिए जूनियर कॉलेज और डिग्री कॉलेज की स्थापना की। आज लगभग 5000 लड़कियां वहां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उनके आने‡जाने की सुविधा के लिए वहां लगभग 30 बसें चलायी जा रहीं हैं। मुंबई में भी उत्तर भारतीय संघ के अन्तर्गत कॉलेज शुरू किये गए हैंजिनमें डिग्री कॉलेज, जूनियर कॉलेज शामिल हैं। यहां भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

प्रश्न‡ धार्मिक क्षेत्र में भीआपने किसी तरह का योगदान किया है?

उत्तर‡ हां, किया है। गांव में मैंने दुर्गा जी का बहुत बड़ा मन्दिर और तालाब बनवाया है। मैं जब भी गांव जाता हूं, वहां दर्शन करने जरूर जाता हूं ।

प्रश्न- उत्तर भारतीय संघ के रूप में आपका कार्य बहुत बड़ा माना जाता है। इसके गठन एवं कार्य क्षेत्र के बारे मेंकुछ बताएं?

उत्तर- उत्तर भारतीय संघ एक सामाजिक संस्था है। संस्था के माध्यम से उत्तर भारतीय लोगों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए विभिन्न कार्य किये जाते हैं। कार्यकारिणी में इक्यावन सदस्य होते हैं और ये सदस्य हर पांच साल में अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। अध्यक्ष के चुनाव के बाद वह उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष का चयन करता है। मैं अपने इस पद को अपना दायित्व समझता हूं ,जिसे निभाने के लिए ही मैं रोज शाम को 1-2 घण्टे उत्तर भारतीय संघ के कार्यालय में आता हूं ताकि लोगों की परेशानियां सुन सकूं और उनका समाधान कर सकूं।

प्रश्न- संस्था के माध्यम से क्या- क्या कार्य किये जा रहे हैं?

उत्तर- उत्तर भारतीय संघ के माध्यम से जूनियर कॉलेज और डिग्री कॉलेज चलाये जा रहे हैं, जहां लगभग 1500 बच्चे पढ़ रहे हैं। असल्फा में हमारा एक विद्यालय भी चलाया जा रहा है, जहां लगभग दो‡तीन हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। इस संस्था में कार्य करने के कारण मुझे समाज के लोगोंसे जुड़ने का मौका मिला। उत्तर भारतीय संघ के माध्यम से गेस्ट हाउस भी बनाये जा रहे हैं। उत्तर भारत से मुंबई में आने वाले लोगों की एक मुख्य समस्या होती है आवास की। लोग चार धाम की यात्रा के लिए निकलते हैं। आजाद मैदान में उनकी बसें खड़ी होती हैं। हमारा यह प्रयास है कि इन यात्रियों के लिए गेस्ट हाउस बनाये जाएं जिससे उन यात्रियों को आवास की सुविधा प्राप्त हो सके। कैंसर के मरीजों के लिए इस गेस्ट हाउस में कुछ कमरे अलग रखे जाएं जिससे वे लोग यहां के अस्पतालों में रहकर इलाज करवा सकें। आजकल शादी-ब्याह के लिए भी बड़े हॉल और कमरों की आवश्यकता होती है। उत्तर भारत से आने वाले लोगों के लिए मुंबई के होटलों में शादी का खर्च उठाना बहुत महंगा काम होता है। ऐसे लोगों के लिए भी इन अतिथि गृहों का उपयोग हो सकता है।

प्रश्न- समाज के पीड़ित वर्गों या सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी संस्था के कुछ कार्य हैं?

उत्तर- उत्तर भारतीय संघ के माध्यम से आर्थिक सहायता भी दी जाती है। उदाहरण के लिए कुछ दिन पूर्व ही उत्तराखण्ड के बाढ़ पीड़ितों के लिए उत्तर भारतीय संघ की ओर से 11 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिये गए। इसके पहले सरहद पर शहीद हुए दो जवानों के परिजनों को दो‡दो लाख रुपए की सहानुभ्ाूति राशि दी गयी थी। हमारे यहां कुछ ऐसे बच्चे पढ़ते हैं जो होनहार तो हैं परन्तु उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे बच्चों की भी हम सहायता करते हैं। कुछ बच्चों की हमने फीस माफ कर दी है। हमारा हमेशा यही प्रयत्न रहता है कि उत्तर भारतीय संघ की ओर से समाज में अधिक से अधिक कार्य हो।

प्रश्न- क्या संस्था का महाराष्ट्र के बाहर भी कार्य है?

उत्तर- अभी उत्तर भारतीय संघ का कार्य महाराष्ट्र में चल रहा है। हम इसे गोवा और अन्य राज्यों में भी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि इसे पूरे भारत में फैलाया जाये।

प्रश्न- क्या मुंबई में आये हुए उत्तर भारतीय लोगों की आप तक सीधी पहुंच है? आप उनकी मदद कैसे करते हैं?

उत्तर – जी हां, वे लोग सीधे हम तक पहुंच सकते हैं। यहां आने के बाद वे अपनी समस्या हमें बतातें हैं । जैसे अगर कोई कैंसर का मरीज है तो हम टाटा अस्पताल में उसके इलाज की व्यवस्था करवाते हैं। डॉक्टर के नाम चिट्टी लिखकर कुछ विशेष सुविधाएं देने का आग्रह करते हैं। यहां आने वालों को मुंबई की जानकारी नहीं होती तो हम लोग उनका मार्गदर्शन करते हैं जिससे उनका काम आसान हो जाये।

प्रश्न- आप प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में भी कार्यरत हैं। इस ओर आपकी रुचि कैसे जागृत हुई?

उत्तर – मैं हमारा महानगर’ नामक अखबार का संरक्षक हूं। इस अखबार को चलाने का प्रस्ताव भी मुझे मेरे एक मित्र द्विजेन्द्र तिवारी ने दिया था। अखबार के पूर्व संरक्षक निखिल वागले उसे बेच रहे थे। मैंने इसे खरीद लिया और चलाना शुरू किया। पिछले आठ साल से मैं यह अखबार निकाल रहा हूं। हालांकि इस उद्योग में मुनाफा नहीं होता, फिर भी मैं इसे चला रहा हूं । अब यह अखबार मुंबई के साथ-साथ पुणे और नासिक से भी प्रकाशित होता है। नवी मुंबई के रबाले में हम एक नयी आधुनिक प्रेस खोलने जा रहे हैं।

प्रश्न- महाराष्ट्र सिक्यूरिटी एक्ट की अभी क्या स्थिति है?

उत्तर – सन 1981 में एक आर्डिनेंस पास हुआ था। जिसमें लिखा था कि सारी एजेंसियों को बन्द कर दिया जाये। उस समय जस्टिस सावंत ने एक रास्ता निकाला कि जो एजेंसियां अपने कर्मचारियों को सारी सुविधाएं देती हैं, उन्हें बन्द न किया जाये। उस समय जिन एजेंसियों को बन्द न करने का निर्णय लिया गया, उसमें बी.आई.एस. भी शामिल है । इसके बाद केन्द्र सरकार का भी एक एक्ट आया। इसके बाद इस कानून के अन्तर्गत लाइसेंस देना शुरू किया गया।

प्रश्न- आपकी राय में उत्तर भारतीयों की मुबंई में आज क्या स्थिति है?

उत्तर – मुंबई में जो मेहनत के काम होते थे, वे सब उत्तर भारतीय ही किया करते थे। चाहे वह दूध का हो, सब्जी का हो, फूल बेचने का हो या कोयले का। शंकरराव चव्हाण के द्वारा फेडरेशन बनाये जाने के पूर्व दूध व्यवसाय इधर-उधर फैला हुआ था। अब फेडरेशन के कारण यह उद्योग सुचारु रूप से चल रहा है।

पक्षपात की राजनीति के कारण उत्तर भारतीयों का विरोध होता है। हम जब एक ही देश में रहते हैं तो कोई भी कहीं भी आ जा सकता है। किसी भी प्रदेश में व्यापार कर सकता है। संविधान ने हमें यह अधिकार दिया है। कुछ लोग वोट बैंक की राजनीति के कारण भेदभाव बढ़ाना चाहते हैं।

प्रश्न- मुंबई में इस बात से नाराजगी होती है कि उत्तर भारतीय स्थानीय लोगों का हक छीन रहे हैं और मुंबई का पैसा उत्तर भारत में जा रहा है। इस सम्बन्ध में आपकी राय?

उत्तर‡ हर किसी का यह कर्तव्य है कि वे अपने माता‡पिता और परिवार की देखभाल करें। अगर हम मुंबई में पैसा कमाने आये हैं और उन्हें पैसे नहीं भेजेंगे तो उनकी देखभाल कैसे हो पाएगी? वहां के लोगों की यह हालत है कि अगर बाहर की कमाई नहीं होगी तो जीवन यापन करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि घर की कृषि से होने वाली आमदनी बहुत कम होती है।

कुछ नेताओं ने यहां के लोगों की यह धारण बना दी है कि हम मुंबई की उन्नति नहीं चाहते। इतने सालों से हम लोग यहां हैं तो निश्चत रूप से हम मुंबई की उन्नति ही चाहेंगे। यहां तक कि हमारी अगली पीढ़ियां तो अब अपने गांव भी वापस नहीं जाना चाहती। हमने यहां किसी का हक नहीं मारा और न ही किसी को काम करने से रोका है। महाराष्ट्रियन लोग भी हमारे साथ काम कर सकते हैं। नेताओं को उन्हें उकसाने की राजनीति से दूर रहना चाहिए और वोट बैंक की राजनीति से दूर रहना चाहिए।

प्रश्न- आप जब उत्तर प्रदेश से मुंबई आये तब की और आज की परिस्थिति में क्या अन्तर है?

उत्तर – मेरे बड़े भाई मुंबई में रहते थे। मैं उनके पास नौकरी करने के उद्देश्य से आया था। मैंने 10 साल नौकरी की भी, परन्तु मैंने देखा कि नौकरी में और आगे नहीं बढ़ा जा सकता। अत: मैंने सिक्यूरिटि एजेंसी का व्यवसाय शुरू किया। उस समय बेरोजगारी अधिक थी। अत: इस कार्य के लिए आदमी आसानी से मिल जाते थे। अब तो गांवों में भी केन्द्र सरकार की इतनी योजनाएं चल रही हैं कि हमें व्यवसाय के लिए लोग मुश्किल से मिलते हैं। लोगों को गांवों में ही रोजगार मिल रहा है तो वे शहर आना कम पसन्द करते हैं । एक और बड़ा अन्तर जो मुझे नजर आता है वह यह कि पहले मुंबई में आज के जितनी भीड़ नहीं थी। आज लोगों की आय अवश्य बढ़ी है; परन्तु साथ में महंगाई भी बहुत तेजी से बढ़ रही है।

प्रश्न‡ क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में अभी भी लोग मुंबई आ रहे हैं?

उत्तर‡ सबसे बड़ा कारण है कि उत्तर प्रदेश में सुविधाओं का अभाव है। बिजली- पानी की आपूर्ति ठीक तरह से नहीं होती है। हमारे उत्पाद को बेचने के लिए वहां बाजार उपलब्ध नहीं है। आजीविका के साधन बहुत कम होने के कारण लोगों को धनार्जन करने के लिए यहां आना पड़ता है।

प्रश्न‡ हिंदी विवेक के माध्यम से उत्तर भारतीयों को आप क्या सन्देश देना चाहेंगे?

उत्तर‡ मैं उत्तर भारतीयों को यही सन्देश देना चाहूंगा कि उनको यहां किसी भी प्रकार की कोई समस्या है तो वे जरूर हमसे सम्पर्क करें। उत्तर भारतीय संघ उनकी हर प्रकार से सहायता करने का प्रयत्न करेगा।
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