पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले शुरु हुई फेर-बदल की राजनीति

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की नज़दीकियों को देखते हुए राजनीतिक फेरबदल शुरु हो चुका है। चुनाव से पहले फेरबदल का काम पश्चिम बंगाल में ही नहीं बल्कि उन सभी राज्यों में देखने को मिलता है जहां विधानसभा चुनाव होने होते है। पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस दोनो के लिए महत्त्वपूर्ण है। बीजेपी जहां चुनाव में सत्ता पाने के लिए मेहनत कर रही है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने के लिए जोर शोर से जुटी है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच की लड़ाई जग जाहिर है। पश्चिम बंगाल में आये दिन बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की खबरें आती रहती है और बीजेपी इन हत्याओं के पीछे तृणमूल का हाथ बताती है। 
 
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल से विधायकों का बाहर निकलने का सिलसिला जारी है। अभी तक एक के बाद एक 9 विधायकों ने ममता बनर्जी को झटका दिया और पार्टी से दूरी बना ली। तृणमूल से बाहर निकलने वाले नेताओं को लेकर यह कहा जा रहा है कि यह सभी बीजेपी में शामिल होंगे। अमित शाह पश्चिम बंगाल का दौरा करने वाले है जिसको लेकर यह कयास लगाया जा रहा है कि तृणमूल से बाहर हुए सभी नेता अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल होंग। 
 
ममता बनर्जी को मोदी सरकार का कट्टर विरोधी माना जाता है। केंद्र सरकार की तरफ से लायी जाने वाली करीब सभी योजनाओं का बंगाल में विरोध किया जाता है और ममता बनर्जी हमेशा मोदी सरकार पर हमला करती नजर आती है। प्रधानमंत्री मोदी को घेरने के लिए ममता ने कई बार विपक्ष का साथ दिया है और केंद्र सरकार का विरोध किया है। केंद्र सरकार के विरोध के लिए विपक्ष एक साथ होता है लेकिन बावजूद इसके विपक्ष के नेताओं में आपसी सहमति नहीं होती है। विधायकों के पार्टी छोड़ने को लेकर ममता सरकार चिंतित है लेकिन बावजूद इसके ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी एक बरगद के पेड़ की तरह है जिसकी जड़ें बहुत अंदर तक है। कुछ शाखाओं के कटने से इस पेड़ को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 
 
पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद को लेकर कितने भी दावे करें लेकिन यह सच है कि कहीं ना कहीं इस बार उनके भी मन में इस बात का डर है कि सत्ता उनके हाथ से जा सकती है। मोदी लहर में बंगाल की जनता अपना मुखिया बदलने के लिए सोच रही है। पश्चिम बंगाल में पिछले दस सालों में विकास के साथ साथ क्राइम रेट और बंग्लादेशी घुसपैठियों की तादात तेजी से बढ़ी है। ममता सरकार एक विशेष समुदाय के लिए काम कर रही है जिससे अब राज्य की जनता में आक्रोश है।     
 
ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की चेयरपरसन है और पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री है। सन 2011 से ममता बनर्जी वेस्ट बंगाल की बागडोर संभाल रही है। इससे पहले सन 2009 से 2011 तक कांग्रेस के शासनकाल में वह रेलमंत्री भी रह चुकी है। 

आपकी प्रतिक्रिया...