सितारे मोदी के पक्ष में

हम स्वभाव से ही अन्वेषक प्राणी हैं। हम संसार की प्रत्येक वस्तु के साथ जीवन का तादात्म्य स्थापित करना चाहते हैं। इसलिए अपनी इस प्रकृति के कारण हम शास्त्रीय एवं व्यावहारिक ज्ञान के द्वारा प्राप्त अनुभवों के साथ साथ राजनीति को भी ज्योतिष की कसौटी पर कसकर देखना चाहते हैं कि आने वाले लोकसभा के चुनाव क्या गुल खिलाते हैं? और इसमें आश्चर्य भी क्या है। मनुष्य की अपना भविष्य जानने की इच्छा उतनी ही पुरातन है, जितना कि स्वयं मनुष्य- “To know the future has been the greatest ambition of man’.

वनं समाश्रिता येऽपि निर्ममा निष्परिग्रहा:
अपि ते परिप्रच्छन्ति ज्योतिषां गतिकोविदम्॥

अर्थात् जो सर्व-संग परित्याग कर वन का आश्रय ले चुके हैं, ऐसे राग-द्वेष शून्य, निष्परिग्रह मुनिजन, संत एवं महात्मा भी ज्योतिषवेत्ताओं से भविष्य ज्ञात करने के लिए उत्सुक रहते हैं, तब हमारे जैसे साधारण संसारी प्राणियों की तो चर्चा ही क्या? किसी युग में राजनीति का जनमानस के मस्तिष्क पर सीधा असर नहीं पड़ता था, पर अब तो राजनीति के प्रभाव से कोई अछूता नहीं है। खैर!

15 नवम्बर, सन् 2011 ई. से शनि देव तुला राशि में संचार कर रहे हैं। संवत् 2070 में भी शनि वर्षभर तुला राशि में संचार करेंगे, और सारी राजनैतिक पार्टियां इसी अवधि में ही अपनी-अपनी रणनीतियां तय करेंगी। यह अवधि राष्ट्रीय रणनीति बनाने के लिए कतई उपयुक्त नहीं है। ध्यान रहे शनि देव का तुला राशि में संचार करना देश के लिए अत्यंत हानिकारक रहेगा। परिणाम स्वरूप किसी भी पार्टी की रणनीति सफल नहीं होगी। भारतीय जनता पार्टी को आंशिक रूप से छोड़कर सभी राजनैतिक पार्टियों के हाथ निराशा हाथ लगेगी। पर भारतीय जनता पार्टी के कर्णधारों एवं प्रवक्ताओं को बहुत सावधानी बरतनी होगी क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता, प्रतिष्ठा के धरातल पर कुछ भी विसंगति या गलती देखना नहीं चाहती।

भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की वाकपटुता और कार्यकुशलता कुछ ऐसा दुर्लभ संयोग बनाएगी जिससे न सिर्फ भारतीय राजनीति बल्कि विश्व की राजनीति भी कुछ हद तक प्रभावित होगी। माना कि श्री नरेन्द्र मोदी की राह में अनगिनत रूकावटें हैं पर ग्रह नक्षत्रों का योग संयोग कुछ ऐसी परिस्थितियां बनाएगा, जिससे देश के राजनीतिक पटल को उनकी आवश्यकता महसूस होगी।

उनके सितारे तो यहां तक बताते हैं कि ‘बिना नरेन्द्र मोदी के शानदार भारतीय राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती।’ क्योंकि श्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में गुरू की राशि में राहु एवं शनि की स्वामित्व वाली राशि में गुरू स्थित है। जो कि उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने में बहुत सहायक सिद्ध होगी। 7 मार्च 2010 से उन्हें सूर्य की महादशा लगी है जो मान-सम्मान दिलाने में कभी पीछे नहीं हटेगी। और तो और उनकी आलोचना से भी उनकी शक्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ेगी। यहां यह बता देना आवश्यक है कि नरेन्द्र मोदी को फंसाने वाले और बुराई करने वालों को मुंह की खानी पड़ेगी। श्री नरेन्द्र मोदी जी की कुण्डली में बुधादित्य योग उनकी निर्णय क्षमता को इतना बलशाली बना रहा है जिससे पूरा देश न सिर्फ उनका लोहा मानेगा बल्कि विरोधियों की नकारात्मक सोच को गहरा झटका लगेगा। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए की श्री नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में शुक्र एवं शनि सूर्य की राशि में स्थित है जो उनके विरोधियों को जनता द्वारा नीचा दिखाया जाएगा और वहीं दूसरी ओर श्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में सहानुभूति की लहर भी बह सकती है। अर्थात इस योग के कारण कई राजनैतिक शक्तियों का श्री नरेन्द्र मोदी जी के पक्ष में हृदय परिवर्तन हो सकता है।

श्री नरेन्द्र मोदी जी की जन्मकुंडली का जब और गहराई से अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि नवम्बर 2011 से शनि की साढ़े साती चल रही है जो इनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। अर्थात उनका आत्मिक बल बढ़ेगा और विरोधीजनों की आत्मिक शक्ति कमजोरी महसूस करेगी। सारे विरोधीपक्ष एक होने की कोशिश करेंगे, पर उनके वैचारिक मतभेद मोदी जी का सामना नहीं कर पायेंगे। सूर्य की महादशा के बाद चंद्र की महादशा शुरू होगी जो कि उन्हें जनता से सीधे जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। माना कि चंद्रमा नीच का है लेकिन वह मंगल के साथ स्थित है, जिस कारण श्री नरेन्द्र मोदी जी की राह में कोई रुकावट टिक नहीं पाएगी। यहां एक बात पर और ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है कि जब सन् 2014 में लोकसभा के चुनाव हो रहे होंगे तब मोदी जी की कुण्डली में केतु एवं शुक्र का अंतर रहेगा। शुक्र सूर्य की राशि में स्थित होगा एवं केतु बुध के स्वामित्व वाली है… यह दोनों योग किसी बड़ी सफलता की संभावना की तरफ इशारा कर रहे हैं। यह संभावना भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ी शक्ति के रूप में उफान दे सकती है। तब श्री नरेन्द्र मोदी अपने विवेक कौशल्य से भाग्य का साथ डंके की चोट पर पा सकते हैं। कोटि-कोटि जनता राजनैतिक क्षितिज पर उन्हें एक नए सूरज के रूप में उभारते हुए देख सकती है। यानि आगे बढ़ने से उन्हें रोकने की क्षमता किसी राजनैतिक दल के वश में नहीं रह पायेगी।

ठीक दूसरी तरफ श्री राहुल गांधी जी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। राहुल गांधी की कुंडली में चन्द्रमा नीच का है एवं उनकी राशि पर साढ़े साती भी चल रही है। जिससे उनके पक्ष के लोग सिर्फ जी हजूरी तक ही सीमित रहेंगे। सच्चा साथ नहीं मिलेगा और तो और राहुल गांधी जी की जन्मकुंडली में शनि नीच का एवं गुरु शुक्र की स्वामित्व वाली राशि में है जो इन्हें चमकाने के लिए खर्चा तो खूब कराएगा, पर लाभ की दृष्टि से शून्य परिणाम ही मिलेंगे, क्योंकि शुक्र भी शत्रु राशि में है। ध्यान रहे चुनाव के समय श्री राहुल गांधी जी की कुंडली में चंद्र में शुक्र का अंतर रहेगा जो उन्हें अपने भरोसे वालों से अपमानित व शत्रुओं से भयंकर परेशानियां महसूस कराकर व्यथित करेगा। उन्हें तो राहु का शुक्रगुजार होना चाहिए जिसने उन्हें राजनीति में भरपूर वर्चस्व दिला रखा है। राजनीति की बात चलती है तो कहीं न कहीं उनका नाम जरूर आ जाता है।

अब रही तीसरे फ्रंट की बात, तो इस चुनाव में कोई भी ठौर ठिकाना नहीं रहेगा। देश उनकी नीयत को समझ चुका है, उन्हें देश की नहीं अपनी पड़ी है और उस नीयत की दुर्गंध ने पूरे देश को अंदर तक परेशान कर रखा है।

जहां तक आम आदमी पार्टी की बात है वह चाहे भ्रष्टाचार, महंगाई व सांप्रदायिकता की कितनी भी बात कर लें, कितने भी दावे या वादे कर लें, अहंकार की कीचड़ में सिर्फ कमल ही खिल पाएगा। यह अलग बात है कि कमल को खिलाने में बहुत प्रयास व समझौता करने पड़ेंगे।
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