महाकाल की महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध कुछ ऐसी स्थिति में होता है कि मानव में आध्यात्मिक ऊर्जा सहज ही ऊपर की ओर उठती है इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने पूरी रात जागरण कर उत्सव मनाने की प्रथा-परंपरा स्थापित की।

देवों के देव महादेव की सबसे प्रिय महाशिवरात्रि उनके भक्तों के लिए परम कल्याणकारी है। साथ ही साधना, ध्यान, सुमरन के द्वारा शिव में समाहित होने की परम पवित्र रात्रि है। सभी भूतों के भूतनाथ, सभी प्राणियों के लिए समान रूप से उपकारी है इसलिए देव, मानव और दानव आदि सभी भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं। एकमात्र शिव ही ऐसे देव हैं जिन्हें सुर-असुर सभी अपना मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि शिव किसी के भी साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करते इसलिए अखिल ब्रह्मांड में वह सर्वमान्य लोकप्रिय देव हैं। वह पशुपतिनाथ भी है और नागनाथ भी, आदिदेव, आदियोगी और आदिगुरु भी हैं। युगो-युगो से महाशिवरात्रि का दिनविशेष शिव शंकर को समर्पित है। इस खास दिन पूरे भारत में केवल महादेव की ही पूजा अर्चना की जाती है। पूरे देश में हर्षोल्लास व धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2021 में 11 मार्च को महाशिवरात्रि का पर्व भक्ति भाव से मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

असीम संभावनाओं और सहज सिद्धि का सुअवसर

तंत्र-मंत्र, रिद्धि-सिद्धि और साधना की सिद्धि के लिए महाशिवरात्रि का मुहूर्त सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस महाशिवरात्रि की रात्रि 12:29 मिनट से 03.32 मिनट तक और सुबह 03.32 मिनट से 6:34 मिनट तक के बीच का समय शिव आराधना के लिए बेहद अनुकूल बताया जा रहा है। शिव भक्त और साधक इस शुभ अवसर का लाभ लेना न भूलें क्योंकि इस बार बहुत ही दुर्लभ शिव संयोग बनने जा रहा है। पंडितों का मानना है कि जो भी भक्त महाशिवरात्रि को भक्ति भाव से जागरण कर शिव का स्मरण ध्यान और सुमिरन करेगा उसे निश्चित रूप से शिव शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होगा और उसके जीवन में मंगल ही मंगल होगा। महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व सबसे ज्यादा है। आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए असीम संभावनाओं का अवसर होता है महाशिवरात्रि। साक्षात शिव की कृपा पाने का सहज एवं सरल मार्ग है महाशिवरात्रि।

प्रकृति स्वयं करती है आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार

ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु के अनुसार महाशिवरात्रि को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध कुछ ऐसी स्थिति में होता है कि मानव में आध्यात्मिक ऊर्जा सहज ही ऊपर की ओर उठती है। इस समय प्राकृतिक वातावरण मानव को उसके आध्यात्मिक उत्कर्ष की ओर ले जाने में सहायता करता है। इस सुअवसर का मानव जाति को फायदा मिले इसके लिए ही हमारे ऋषि-मुनियों ने पूरी रात जागरण कर उत्सव मनाने की प्रथा-परंपरा स्थापित की। इस उत्सव का प्रमुख पहलू यह है कि प्राकृतिक रुप से ऊर्जा के प्रवाह को सही दिशा देने के लिए अपनी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधी रखते हुए शिव का स्मरण-चिंतन करते हुए रात्रि जागरण करना चाहिए। आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधक के लिए यह पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण है और पारिवारिक एवं महत्वाकांक्षी लोगों के लिए यह उत्सव शांति, समृद्धि, ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए सहायक है।

शिवशक्ति की होगी चमत्कारिक अनुभूति

अधिकतर शिव भक्तों का मानना है कि उन्हें शिव की अनुभूति होती है। शिवगणों का एक ग्रुप अक्सर महाशिवरात्रि के मौके पर दूर-दराज के जंगल और पहाड़ों पर स्थित शंकर भगवान के मंदिर में विशेष तौर पर दर्शन के लिए जाता है। वह सभी महादेव की भक्ति में चूर, दीवाने-मस्ताने एवं मतवाले हैं। बम भोले, हर हर महादेव, ओम नमः शिवाय आदि नारा, जयकारा लगाते और भजन को गाते-गुनगुनाते हुए वे सभी अपनी मस्ती में यात्रा करते हैं। इस दौरान कईयों का यह कहना है कि उन्हें कहीं ना कहीं मार्ग से गुजरते समय शिव जी के साथ चलने की अनुभूति हुई है। उनमें से एक शिव भक्त ने बताया कि भीमाशंकर देवस्थान जंगल के रास्ते रात्रि के समय जाते समय उन्हें यह एहसास हो रहा था कि भोले भंडारी हमारे आसपास ही हैं। बेहद डरावना भयानक जंगली मार्ग होने के बावजूद उन्हें तनिक भी भय नहीं लगा और वह शिव की भक्ति में झूमते-झूमते कब भीमाशंकर पहुंच गए, इसका उन्हें पता ही नहीं चला। उनका विश्वास है कि जो भी भक्तगण सच्ची निष्ठा व श्रद्धा से भोले शंकर के मंदिर जाएगा या उनका स्मरण करेगा, उसे निश्चित रूप से शिव कृपा प्राप्त होगी और शिव जी की अनुभूति जरूर होगी।

शेते सर्व जगत् यस्मिन् इति शिव

महाशिवरात्रि एक ऐसा शुभ अवसर है, जब एक श्रद्धालु अपनी सीमितता को विलीन कर सकता है और सृष्टि के उस असीम स्रोत का अनुभव पा सकता है जो हर व्यक्ति के बीज रूप में समाया है। यह आपको प्रत्येक मानव की भीतर छुपे उस अथाह शून्य के अनुभव के पास ले जाती है जो सारे सृष्टि का स्रोत है। कहते है कि अनंत का रास्ता शून्य की ओर से जाता है। शिव शब्द की व्याख्या करते हुए कहा गया है कि ‘शेते सर्व जगत् यस्मिन् इति शिव’ अर्थात जिसमें समस्त जगत शयन कर रहा है, सो रहा है उसको शिव कहते हैं। शिव में ही सारी सृष्टि समाई है, कंकड़-कंकड़ में शंकर है। कुल मिलाकर कहा जाए तो महाशिवरात्रि आध्यात्मिक शक्ति ग्रहण करने की विशेष रात्रि है। अब हमारी योग्यता पर निर्भर करता है कि कुछ पल के लिए ही सही उस परमात्मा के  शून्यशिव का साक्षाक्तार-अनुभव कर पाते हैं या नहीं। महाशिवरात्रि को केवल जागते रहने की रात न बनाए बल्कि आध्यात्मिक साधना की उन्नति के लिए जागरूकता की रात बनाए। जिससे आप सभी को परमानंद की प्राप्ति हो सके।

ध्यान उपासना ईश्वर की श्रेष्ठ पूजा विधि

देखा गया कि अधिकतर लोग कर्मकांड को अधिक महत्व देते हैं जबकि इसकी इतनी आवश्यकता ही नहीं होती। केवल ध्यान उपासना करना ही परमात्मा की श्रेष्ठ पूजा विधि है। ईश्वर का मन से चिंतन-मनन करना चाहिए। कहते हैं कि जो भक्त अपने हृदयप्रदेश में स्थित परमात्मा का निरंतर अनुभव करता है, उसे ही ब्रह्मज्ञानी माना जाता है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए हमें कहीं दूर जाने की भी आवश्यकता नहीं है, केवल अपने दिल की गहराइयों में उन्हें खोजो, वह वहीं मिल जाएंगे। ध्यान से वह सहज रूप से प्राप्त हो जाएंगे। ध्यान ही ईश्वर का अर्घ्य, पाद्य और पुष्प है। ध्यान ही परम पवित्र करने वाला तथा अज्ञानों का नाशक है। वैसे भी भोले बाबा औघड़दानी है, भोले भंडारी है, उन्हें बाहरी आडंबरों से रिझाने की कोई जरूरत नहीं है। बस प्रेम से उनका स्मरण और ध्यान करो, उनकी कृपा स्वयं ही बरसने लगेंगी। उनकी थोड़ी सी पूजा आराधना करने से जल्द ही भक्तों पर प्रसन्न होने वाले भोले बाबा को इसलिए आशुतोष भी कहा जाता है। अपने भक्तों के लिए शिव सदैव कल्याणकारी है।

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