महाराष्ट्र लॉकडाउन: “अब लॉकडाउन लगा तो हम मर ही जाएंगे”

पिछले साल जब कोरोना की शुरुआत हुई तो पूरा देश इससे प्रभावित था। सभी राज्यों की हालत बिल्कुल खराब थी लेकिन समय के साथ साथ सभी राज्य कोविड की समस्या से बाहर निकलते गये लेकिन अगर कोई राज्य नहीं निकला तो वह है महाराष्ट्र, पिछले साल से अभी तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र की हालत तब से अभी तक खराब ही चल रही है। कोरोना का कहर जब अपने चरम पर था तब भी महाराष्ट्र की हालत बहुत ही चिंताजनक थी और कोरोना के दूसरे लहर में एक बार फिर से इसकी हालत बिगड़ती दिख रही है क्योंकि यहां हर दिन 30 हजार से अधिक केस मिलने लगे है।

महाराष्ट्र में बढ़ते कोविड के प्रकोप को लेकर सरकार और जनता दोनों ही चिंतित है लेकिन कोविड को रोकने के लिए ना तो सरकार कोई सही फैसला ले पा रही है और ना जनता, हम ऐसा इसलिए कह रहे है कि राज्य में लगातार बढ़ते केस इस बात का सबूत है कि कहीं ना कहीं सरकार और प्रशासन अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही है नतीजा केसों लगातार बढ़ोतरी हो रही है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मॉल, ऑफिस और सिनेमा हॉल को खोल दिया गया जिसके बाद से पॉजिटिव केस की संख्या में वृद्धि देखने को मिल रही है। लोकल ट्रेन का भी आवागमन बढ़ा दिया गया है और आम जनता को भी इसमें नियमित समय के साथ यात्रा करने की छूट मिल गयी है। सरकार के यह सभी फैसले हो सकता है कि जनता के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया हो लेकिन यही फैसलों की वजह से राज्य में हालात फिर से बिगड़ रहे है।

राज्य की उद्धव सरकार ने बढ़ते केसों को लेकर चिंता व्यक्त की और सभी से अपील करते हुए कहा कि आप कोविड नियमों का पालन करें अन्यथा राज्य में फिर से लॉकडाउन लगाने पर विचार करना होगा। उद्धव सरकार का यह बयान क्या मात्र चेतावनी है या फिर लॉकडाउन लगाने से पहले का संकेत है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या महाराष्ट्र में फिर से लॉकडाउन लगाना सही होगा? देश की जनता ने पहले ही लॉकडाउन के दौरान बहुत कुछ गंवा दिया है उसके पास अब जीने और खाने के लाले पड़ रहे है ऐसे में एक और लॉकडाउन जनता के लिए सहना मुश्किल हो जाएगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक ऐसा शहर है जहां पूरे देश के लोग रोजगार के लिए आते है ऐसे में अगर फिर से लॉकडाउन होता है तो इसका असर पूरे देश पर पड़ने वाला है। महाराष्ट्र में लॉकडाउन लगने से शेयर बाजार पर भी असर पड़ता है क्योंकि ज्यादातर बड़ी कंपनियां मुंबई से ही कारोबार करती है।

कोरोना से बचने के लिए क्या लॉकडाउन लगाना ही एक आखिरी रास्ता सरकार के पास है? सरकार नियमित तरीके से भी राज्य की व्यवस्था को चला सकती है। कड़े प्रशासन के साथ लोगों के बाहर निकलने और बाजारों को भी संचालित किया जा सकता है फिर ऐसे में शायद लॉकडाउन की जरुरत नहीं होगी और बिना अर्थव्यवस्था को बिगाड़े राज्य को संचालित किया जा सकता है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक यह निश्चित नहीं किया गया है कि लॉकडाउन लगेगा या नहीं लेकिन लॉकडाउन के डर से बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। दूसरे राज्यों से आये हुए मजदूर और लघु उद्योगों में काम करने वाले लोगों में भी निराशा देखने को मिल रही है।

हमने कुछ कंपनी वर्कर्स से बात किया तो उनका कहना है कि “अगर फिर से लॉकडाउन लगता है तो हमारा काम बंद हो जायेगा और हम बेरोजगार हो जायेंगे, सरकार को फिर से लॉकडाउन नहीं लगाना चाहिए”
“पहली बार जब लॉकडाउन लगा था उसके बाद से हमारा काम बंद हो गया और हम गांव चले गये थे करीब 6 महीने बाद हम फिर से कर्ज लेकर मुंबई आये है अगर अब लॉकडाउन लगता है तो हमारे परिवार का क्या होगा”

ऐसे हालात सिर्फ कुछ लोगों के नहीं है बल्कि ज्यादातर लोग इस तरह की परेशानी से गुजर रहे है इसमें वह लोग भी शामिल है जो फ्लैट में रहते है और बड़ी कंपनी में काम करते है। अब सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और राज्य में लॉकडाउन लगाने से बचना चाहिए।

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