कांग्रेस का ‘टूलकिट’ षडयंत्र

कांग्रेस की टूलकिट में कुंभ, पीएम केयर्स फंड, गुजरात को विशेष सहयोग, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, कांग्रेस संगठनों के कार्यों को बढ़ावा देना, पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाना और अन्य नेताओं की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाने को कहा गया है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस टूलकिट में पीएम मोदी की छवि को खराब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया का सहयोग लेकर भारत में मौजूद कोरोना वायरस के स्ट्रेन को ‘मोदी स्ट्रेन’ और ‘भारतीय स्ट्रेन’ कहने पर ज़ोर दिया गया।

किसान आंदोलन के समय सुर्खियां बटोरने वाली ‘टूलकिट’ कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान फिर से चर्चाओं में आ गई। इस टूलकिट वजह से एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने इसे देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को बदनाम करने के लिए ‘कांग्रेस की टूलकिट’ का नाम दे दिया है, वैसे, कोरोना महामारी अपने आप में ही एक बनी-बनाई टूलकिट है। देश भर से सामने आ रही तस्वीरें तो फिलहाल यही इशारा कर रही हैं। कांग्रेस की टूलकिट में कुंभ, पीएम केयर्स फंड, गुजरात को विशेष सहयोग, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, कांग्रेस संगठनों के कार्यों को बढ़ावा देना, पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाना और अन्य नेताओं की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाने को कहा गया है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस टूलकिट में पीएम मोदी की छवि को खराब करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया का सहयोग लेकर भारत में मौजूद कोरोना वायरस के स्ट्रेन को ‘मोदी स्ट्रेन’ और ‘भारतीय स्ट्रेन’ कहने पर ज़ोर दिया गया। इस पूरी टूलकिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले करने की बात कही गई। असल में पहले किसान आंदोलन और अब कोरोना की दूसरी लहर के साथ ही कांग्रेस पर टूलकिट का आरोप देश विरोधी षडयंत्र की ओर इशारा कर रहा है।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक टूलकिट जारी किया। बताया कि इसे कांग्रेस पार्टी ने तैयार किया ताकि कोरोना की दूसरी लहर में योजनाबद्ध तरीके से नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार और प्रदेशों में बीजेपी सरकारों के विरुद्ध झूठा प्रचार चलाकर उन्हें बदनाम किया जा सके। कांग्रेस की ओर से वक्तव्य आया कि इस टूलकिट से उसका कोई सम्बंध नहीं है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप ही है। एक लोकतांत्रिक देश में हर राजनीतिक दल से एक न्यूनतम सार्वजनिक व्यवहार की अपेक्षा होती है, इसलिए विपक्ष में बैठा कोई दल यह स्वीकार नहीं करेगा कि उसने सरकार और उसके नेता के विरुद्ध ऐसी साजिश रची। जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी इसे फेक बताते हुए इसे ़फैलाने वालों के खिलाफ़ केस करने की बात कह रही है, वहीं इसके कंटेंट कुछ और ही कहानी कहते हैं। टूलकिट कांग्रेस की है या नहीं यह जांच से ही साबित होगा। ‘टूलकिट’ विवाद पर संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी पर कोरोना काल के दौरान राजनीतिक करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, ‘देश कोरोना से जूझ रहा है और कांग्रेस राजनीति कर रही है। सेंट्रल विस्टा पर झूठ फैलाया जा रहा है। टूलकिट पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए’। पात्रा ने आरोप लगाया कि जो टूलकिट चर्चा का विषय बना हुआ है उसे सौम्या वर्मा ने बनाया है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस की रिसर्च टीम की सदस्य है सौम्या वर्मा जिन्होंने टूलकिट बनाई है। उन्होंने कहा कि, ‘सौम्या वर्मा कौन है? कांग्रेस को इसका जवाब देना होगा। इस पूरे मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जवाब देना होगा’।

टूलकिट में जो आरोप लगे हैं और चीजें सामने आई हैं उनका विश्लेषण आवश्यक है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिन्दुओं के एक ऐसे पवित्र त्यौहार को बदनाम करने की कोशिश की गई, जिसका समय पूर्व समापन कर दिया गया और प्रतीकात्मक ही रखा गया। इस ‘टूलकिट’ में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले ही कुम्भ को ‘सुपर स्प्रेडर’ घोषित कर चुकी है। साथ ही ‘समान सोच वाले’ देशी/विदेशी पत्रकारों के साथ मिल कर इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने की बात की गई। कोरोना आपदा काल में मदद के नाम पर भी पहले पीड़ितों की गुहार को ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से वायरल करवाना था, फिर उनसे कांग्रेस को टैग करवाना था। पत्रकारों और ‘प्रभावशाली लोगों’ की मदद को तरज़ीह देने की बात भी की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए किस तरह से विदेशी मीडिया के साथ हाथ मिलाया गया था, वो भी खासा गंभीर मामला दिखता है। भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के संवाददाताओं के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। विदेशी मीडिया में लेख लिखने वाले भारतीय प्रोपेगंडा पत्रकारों को पॉइंट्स दिए गए, ताकि वो मोदी सरकार को बदनाम कर सकें। स्थानीय पत्रकारों को जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें देकर रिपोर्ट बनवा उसे वायरल करवाने की भी साजिश थी। ये ख़तरनाक इसलिए है क्योंकि इससे साफ़ हो गया है कि वैश्विक मीडिया में भारत को लेकर एकपक्षीय रिपोर्टिंग हो रही थी और कांग्रेस पार्टी के इशारे पर देश और प्रधानमंत्री को बदनाम किया जा रहा था।

इस बीच कांग्रेस टूलकिट मामले के खिलाफ़ देश की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई। मामले को सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने और विश्व में भारत की छवि बिगाड़ने की साजिश करार दिया गया है। याचिकाकर्ता वकील शशांक शेखर झा ने वैश्विक साजिश का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जांच और दोष साबित होने पर कांग्रेस की मान्यता निरस्त करने की मांग की है। झा ने अपनी जनहित याचिका में निर्दिष्ट किया कि धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), आईपीसी की कई धाराओं और ग़ैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत किसी भी जुर्म का खुलासा करने के लिए मामले की छानबीन की जानी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश जारी होना चाहिए कि वह दिशानिर्देश बनाए कि कोई भी पार्टी, ग्रुप कोई भी ऐसा पोस्टर और बैनर नहीं लगाएगा, जिसमें एंटी नेशनल सामग्री मौजूद हो। इसके साथ ही कोरोना से मरे लोगों के अंतिम संस्कार और शव न दिखाए जाएं। साथ ही केंद्र सरकार को कोरोना महामारी के दौरान जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी के बारे में निर्देश जारी किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार मामले की जांच कराए और जांच में यदि कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार पाया जाता है और लोगों के जीवन को ख़तरे में डालता पाया गया और देश विरोधी हरकत करता पाया जाता है तो उसका पंजीकरण रद्द हो। हांलाकि कांग्रेस ने ‘टूलकिट दस्तावेज़’ के निर्माण से स्पष्ट रूप से मना किया है, पर रिपोर्टों से पता चलता है कि लेखक वास्तव में कांग्रेस की सदस्य है। बता दें कि सौम्या वर्मा का नाम डॉक्यूमेंट के निर्माता के रूप में उभरा है। इसके बाद सौम्या ने लिंक्डइन समेत अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट कर दिया।

भाजपा नेताओं का आरोप है कि टूलकिट में लिखी बातें राहुल गांधी और कांग्रेसी नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट से मेल खाती हैं, इसलिए वह फेक नहीं बल्कि सही और अधिकृत दस्तावेज है। इस लिहाज़ से मामले में दो आपराधिक बिंदु बनते हैं। पहला देश और सरकार को बदनाम करने के लिए कांग्रेस की टीम द्वारा टूल किट बनाने की आपराधिक साज़िश। दूसरा उस टूलकिट की स्क्रिप्ट के अनुसार कांग्रेसी नेताओं द्वारा सोशल मीडिया में दुष्प्रचार।

किसान आंदोलन के दौरान भी टूलकिट शब्द सुर्खियों में तब आया जब स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग के एक ट्वीट ने कृषि कानून विरोधी आंदोलन के बहाने देश को अस्थिर करने के अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र को उजागर कर दिया। उसने दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन को लेकर प्रदर्शन की एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया था और उसके कुछ घंटे बाद पहले ट्वीट से संबंधित टूल किट भी उसने अपने ट्विटर एकाउंट से साझा कर दिया था, जिसमें आंदोलन के सहारे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश के तहत ट्विटर हैशटैग, टैगिंग एकाउंट की लिस्ट, लिखने के लिए शब्द, आंदोलन से संबंधित वीडियो व फोटो समेत अन्य सामग्री मौजूद थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि इसमें पॉप सिंगर रिहाना का भी नाम था, जिसने ग्रेटा के ट्वीट के एक दिन पहले (2 फरवरी) को उसी तस्वीर और हैशटैग के साथ आंदोलन को लेकर ट्वीट कर वैश्विक बिरादरी का ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई केंद्रीय मंत्रियों व भाजपा नेताओं ने देश की संप्रभुता पर हमले को गंभीरता से लिया और ट्वीट के सहारे करारा जवाब दिया। सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, अजय देवगन व गौतम गंभीर समेत देश की अन्य चर्चित हस्तियां भी एकजुटता दिखाते हुए प्रत्युत्तर में हैशटैग ‘इंडिया टुगेदर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट प्रोपोगेंडा’ के साथ मैदान में उतर आए। इस बीच, थनबर्ग का ट्वीट किया टूलकिट भी खूब शेयर किया जाने लगा, जिससे स्पष्ट हो गया था कि उसके समेत अन्य विदेशी हस्तियां किसी और के इशारे पर भारत विरोधी ट्वीट कर रहे हैं। जल्द ही थनबर्ग को खुद से अपना ही राजफाश कर देने की गलती का एहसास हुआ और कुछ घंटे बाद उस टूलकिट वाली ट्वीट को उसने हटा दिया। प्रसिद्ध आईटी कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं कि अगर यह षड्यंत्र नहीं होता तो थनबर्ग को ट्वीट हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे स्पष्ट है कि विदेशी ताकतें सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि वैसे, टूलकिट का इस्तेमाल हैकर खूब करते हैं, लेकिन किसी लोकप्रिय शख्सियत द्वारा इसके इस तरह से इस्तेमाल का यह मामला गंभीर था।

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