टीकाकरण में तेजी : समय की मांग

भारत के कई इलाकों विशेषत: गांवों में अधिकांश लोग टीका लगवाने के लिए सहयोग नहीं कर रहे हैं। आज ऐसे लोगों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने की ज़रूरत है। इसके अंतर्गत ऐसे लोगों को यह बताने की ज़रूरत है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इससे मृत्यु नहीं बल्कि रोग के कारण हो सकने वाली संभावित मौत से बचा जा सकता है और केवल कुछ ही लोगों में एक-दो दिन हल्के-फुल्के बुखार के अलावा कोई अन्य समस्या नहीं होगी।

भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अगस्त, 2020 में नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 नेगवैक का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य आबादी वर्गों में वैक्सीन टीकाकरण कराने की प्राथमिकता का निर्धारण करने, वैक्सीन को प्राप्त करने, उनका हिसाब रखने और देश में वितरण करने का मार्गदर्शन करना है। नेगवैक की सिफारिश है कि भारत में जिस व्यक्ति को भी टीकाकरण की आवश्यकता है उसका टीकाकरण किया जाएगा। इसी संस्था ने यह प्राथमिकता निर्धारित किया था की सबसे पहले लगभग एक करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कर्मियों का टीकाकरण किया गया है। उसके पश्चात् लगभग 2 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण किया गया जिसमें राज्य और केंद्र सरकार के पुलिस व सुरक्षाबल के जवान, होमगार्ड्स, सामाजिक कार्यकर्ता, आपदा प्रबंधन से जुड़े वॉलिंटियर्स एवं नगर निगम के कार्यकर्ता सम्मिलित होंगे। अगले चरण में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और 50 वर्ष से अधिक आयु के उन लोगों का टीकाकरण किया गया जो किसी अन्य बीमारी से पीड़ित रहे हों। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में 2.3 लाख वैक्सीनेटर्स (ए.एन.एम.) हैं लेकिन, देश की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर न पड़े इसे ध्यान में रखते हुए केवल 1.54 लाख वैक्सीनेटर्स की ही सेवाएं ली जा रही हैं।

अन्य वैक्सीनों के प्रयोग को मंजूरी

भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दिनांक 9 मई, 2021 तक भारत में वैक्सीन की कुल 23.4 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं जिनमें 4.53 करोड़ लोगों का पूरा टीकाकरण किया जा चुका है अर्थात् उन्हें वैक्सीन की दोनों खुराकें लगाई जा चुकी हैं। हालांकि, भारत सरकार के लिए 136 करोड़ आबादी का टीकाकरण करना किसी विशाल चुनौती से कम नहीं है। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा रूस में विकसित ‘स्पुतनिक वी’ नामक वैक्सीन के प्रयोग की भी मंजूरी प्रदान की गई है। इसके अलावा नेगवैक के प्रतिनिधियों के व्यापक विचार विमर्श के पश्चात् दिनांक 13 अप्रैल, 2021 को यह सिफ़ारिश की गई कि भारत में बड़ी आबादी को कोविड-19 से सुरक्षित रखने के लिए उन सभी विदेशी वैक्सीनों के प्रयोग की मंजूरी दी जाए, जिनको विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। इसी कड़ी में भारत सरकार के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानि डीसीजीआई द्वारा रूस की स्पुतनिक वी नामक वैक्सीन के प्रयोग की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। स्पुतनिक वी वैक्सीन के लिए हैदराबाद के डॉक्टर रेड्डीज लैब, हेटरो बायोफार्मा, ग्लैंड फार्मा, स्टेलिस बायोफार्मा और विक्रो बायोटेक जैसी कंपनियों से रूस की सरकारी रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड ने समझौता किया है। स्पुतनिक वी वैक्सीन निर्माता कंपनी का दावा है कि उनकी वैक्सीन 91.6% तक प्रभावी है। दि लैंसेट नामक जर्नल में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार यह वैक्सीन कोविड-19 के गंभीर संक्रमण से पूरी सुरक्षा देने में सक्षम है। रूस में हुए ट्रायल के अलावा भारत में डॉ. रेड्डीज़ कंपनी ने भी इस वैक्सीन के फेस 2 और 3 के क्लिनिकल ट्रायल किए हैं। इस वैक्सीन के लिए यह भी दावा है की इससे कोई एलर्जी नहीं होती, और इस वैक्सीन की दो डोज़ में दो अलग-अलग तरह के वेक्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसी प्रकार की तकनीक से बनाए जाने वाले अन्य टीकों की तुलना में लंबे समय तक इम्यूनिटी प्रदान करती है। स्पुतनिक वी भारत में कोविड-19 के विरुद्ध प्रयोग की जाने वाली तीसरी वैक्सीन है।

इसके साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन सहित अन्य देशों में कोविड-19 के विरुद्ध प्रयुक्त अन्य वैक्सीनों के भी भारत में प्रयोग की मंजूरी मिलने का रास्ता बना है और संभवतः आने वाले दिनों में इन्हें भी शामिल किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं: जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन, यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इनफेक्शियस डिसीजे़ज़ और मॉडर्ना द्वारा विकसित मॉडर्ना कोविड-19 वैक्सीन, जायडस कैडिला की सिंगल डोज़ वैक्सीन, सीरम इंस्टीट्यूट की नोवावैक्स और नाक के माध्यम से दी जाने वाली भारत बायोटेक की वैक्सीन।

निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमतें निर्धारित

इस समय देश में कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ लोगों को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने टीकाकरण अभियान में और तेज़ी लाने के लिए निजी अस्पतालों को देश में प्रयुक्त तीनों वैक्सीनों की कीमत निर्धारित की है। देश के निजी अस्पताल 150रुपए प्रति डोज़ सर्विस चार्ज लेकर कोरोनावायरस की वैक्सीनें लोगों को लगा सकेंगे। इस प्रकार अब निजी अस्पताल प्रति डोज़ कोवैक्सिन के लिए 1410/-, स्पुतनिक वी वैक्सीन के लिए 1145/- और कोवीशील्ड वैक्सीन के लिए 780/- लेकर लोगों को टीका लगा सकेंगे।

तीनों वैक्सीनों की प्रति डोज़ पूरी कीमत

कोवीशील्ड वैक्सीन की कंपनी कीमत 600 + जीएसटी 30 + सर्विस चार्ज 150 होगी और कुल मिलाकर 780 में इस वैक्सीन की एक डोज़ दी जा सकेगी। स्पुतनिक वी वैक्सीन की कंपनी कीमत 948 + जीएसटी 47 + 150 सर्विस चार्ज, कुल मिलाकर इसकी एक डोज़ की कीमत 1145 होगी। इसी प्रकार कोवैक्सिन की कंपनी कीमत 1200 + जीएसटी 60 + सर्विस चार्ज 150 के साथ इसकी एक डोज़ की कीमत 1410 होगी। भारत में बड़ी संख्या में लोग कुछ धनराशि व्यय करके कोरोना वायरस का टीका लगवाने के लिए सक्षम हैं, भारत सरकार ने उनकी सहूलियत के लिए निजी अस्पतालों में कीमत चुका कर टीकाकरण कराने की व्यवस्था निर्धारित की है। भारत सरकार के इस कदम से नि:संदेह देश के टीकाकरण अभियान में तेज़ी आएगी। केंद्र सरकार के निर्देश के मुताबिक देश के निजी अस्पतालों द्वारा सर्विस चार्ज के रूप में 150 रुपए लिए जाएंगे। सरकार रेट की प्रतिदिन निगरानी करेगी और जिन निजी अस्पतालों में अधिक सर्विस चार्ज लिया जाएगा उन पर विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।

टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण

भारत सरकार के ‘को-विन’ पोर्टल पर 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए टीकाकरण के लिए स्वयं को पंजीकृत कर सकता है। इससे उस व्यक्ति के निवास के समीप स्थित टीकाकरण केंद्र पर तिथि और समय की सूचना के साथ पंजीकृत किया जाता है। भारत की एक बड़ी आबादी के पास ऑनलाइन पंजीकरण करने की सुविधा नहीं है, इसे देखते हुए कोई भी व्यक्ति अपने समीप किसी भी टीकाकरण केंद्र पर जाकर तत्काल पंजीकरण करा कर वैक्सीन लगवा सकता है। चूंकि, टीकाकरण केंद्र को वैक्सीन की खुराकों और वैक्सीन प्राप्त व्यक्तियों का हिसाब रखना होता है, इसलिए टीकाकरण के लिए जाने वाले व्यक्ति के पास आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र होना जरूरी होता है। एक मोबाईल फोन से चार व्यक्तियों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है।

वैक्सीन की बर्बादी रोकना जरूरी

हाल के दिनों में भारत के कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वैक्सीन की बर्बादी की खबरें प्रकाश में आई है। जहां एक ओर भारत सरकार देश के कोने-कोने में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की खुराक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है, वहीं वैक्सीन की एक-एक खुराक महत्वपूर्ण है और इसकी बर्बादी देश के टीकाकरण अभियान को बाधित करती है। अतः प्रत्येक टीकाकरण केंद्रों के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रबंधकों का कर्तव्य है कि वैक्सीन की प्रत्येक खुराक का सदुपयोग हो और बची हुई खुराकों को उचित रूप से वांछित तापमान पर सुरक्षित रखके उसे दूसरे दिन उपयोग में लाया जाए।

भ्रांतियां: टीकाकरण अभियान में बाधक

जहां एक ओर कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के लिए टीकाकरण केंद्रों में लोगों की लंबी कतारें लग गईं, वहीं देश के कई हिस्सों में और कई वर्ग के लोगों ने इस टीकाकरण अभियान के विरुद्ध तरह-तरह की भ्रांतियां पाल ली हैं। कुछ लोगों का कहना है की वैक्सीन लगाने से उत्पन्न स्थितियों से उनकी असामयिक मृत्यु हो जाएगी, लोगों में नपुंसकता हो जाएगी, शरीर कमज़ोर पड़ जाएगा, आदि-आदि। भारत के कई इलाकों विशेषत: गांवों में अधिकांश लोग टीका लगवाने के लिए सहयोग नहीं कर रहे हैं। आज ऐसे लोगों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने की ज़रूरत है। इसके अंतर्गत ऐसे लोगों को यह बताने की ज़रूरत है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है इससे मृत्यु नहीं बल्कि रोग के कारण हो सकने वाली संभावित मौत से बचा जा सकता है और केवल कुछ ही लोगों में एक-दो दिन हल्के-फुल्के बुखार के अलावा कोई अन्य समस्या नहीं होगी। उन्हें यह भी प्रेरित किया जाए कि वे स्वयं टीका लगवाने के बाद अन्य लोगों को भी इससे होने वाले फ़ायदों के बारे में जागरूकता फैलाएं और भारत सरकार के इस व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दें। लोगों के मन से डर निकालने के लिए यह भी बताने की आवश्यकता है कि भारत के प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री जैसे अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी स्वयं कोरोनावायरस से बचने का टीका लगवाया है। लोगों को प्रेरित करने के लिए इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? कुछ लोगों का कहना है कि वे पूर्णतय: स्वस्थ हैं, अतः, उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं हो सकता, यह धारणा बिल्कुल ग़लत है। कोरोना वायरस किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है चाहे वह अस्वस्थ हो या पूरी तरह स्वस्थ। हां, ऐसे लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है जिनमें प्रतिरक्षा शक्ति की कमी हो, और वह पहले से ही मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, कैंसर, आदि जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हों।

इस प्रकार भारत में कोरोनावायरस के विरुद्ध टीकाकरण अभियान में तेज़ी लाने की दिशा में सरकारी प्रयासों के साथ-साथ जनसाधारण का भी योगदान जरूरी है। एक तरफ़ भारत सरकार बड़ी संख्या में कोरोना वायरस वैक्सीन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यरत है वहीं टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीन की बर्बादी न हो, जनसाधारण में कोरोना वैक्सीन के प्रति भ्रांतियां न हों, इन सभी पहलुओं पर जागरूकता उत्पन्न करने के परिणामस्वरूप देश में कोरोना वायरस के विरुद्ध टीकाकरण कार्यक्रम में तेज़ी लाई जा सकती है।

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