येडियूरप्पा के बाद कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन ?

                                                                                                 बी.एस.येडियूरप्पा

भाजपा के जुझारू एवं कर्मठ नेता ने कर्नाटक की राजनीति में भाजपा को 2008 में पहली बार सत्ता हासिल कराने वाले मुख्यमंत्री बी.एस.येडियूरप्पा ने 26 जुलाई 2021 को दोपहर में लगभग एक बजे अपना त्याग पत्र राज्यपाल थावर चंद गहलोत को सौंप दिया। येडियूरप्पा ने राज्य के चार बार मुख्यमंत्री बने परन्तु वे राजनीतिक दांव पेंच के चलते एक बार भी 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। भाजपा को राज्य में स्थापित करने में येडियूरप्पा के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। पांच दशक से निरंतर राजनीति करने वाले येडियूरप्पा ने भाजपा को विधानसभा में विपक्छी दल के रूप में स्थापित कराया था। जनतादल और कांग्रेस की मिलीभगत की राजनीति के विरुद्ध भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने का काम येडियूरप्पा ने ही किया। कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस और जनतादल सेकुलर की राजनीति के बीच भाजपा को स्थापित करने में येडियूरप्पा का परिश्रम भी एक महत्त्वपूर्ण शक्ति माना जा सकता है। त्याग पत्र देने के बाद येडियूरप्पा ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी ने किसी भी जवाबदारी के पद पर बने रहने की समय सीमा 75 वर्ष तय कर दी थी तो उस समय राज्य की जनता की सेवा के लिए हमें दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह दो माह पहले ही त्यागपत्र देने का मन बना चुके थे परन्तु  पार्टी के मुखिया ने उन्हें अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दो वर्ष पूरा करने पर त्याग पत्र देने के लिए कहा था।अभी पिछले हफ्ते ही येडियूरप्पा दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह तथा पार्टी अध्यक्छ नड्डा से मुलाकात की थी, उस दौरान भी उनके त्याग पत्र की बात को मी़डिया में तेजी से चर्चित हुआ था, परन्तु उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। येडियूरप्पा ने राज्य में बीजेपी को खड़ा करने के अपने संघर्ष की भी लोगों को याद दिलाई। राज्य का मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस सवाल पर येडियूरप्पा ने कहा कि उन्होंने किसी के नाम की सलाह नहीं दी है।राज्य में भाजपा के एक जननेता की सक्रिय राजनीति से किनारा कर लेना यह साबित करता है कि अब भाजपा की दूसरी पंक्ति के नेताओं को अपनी राजनीतिक शक्ति के प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। कहा तो यह भी जाता है कि अपने पुत्र विजयेन्द्र को पार्टी में पार्टी और सरकार में प्रमुख स्थान दिलाने के लिए येडियूरप्पा का राजनीतिक विश्राम एक राजनीतिक रणनीति ही है।

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