कैसे करें दीपावली में लक्ष्मी गणेश की पूजा

कल दीपावली का त्योहार है तो दीपावली के दिन हमलोग माँ लक्ष्मी एवं गणेश अर्थात गौरी-गणेश की पूजा करते हैं. और, पूजा करने के लिए हमलोग माँ लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा खरीदते हैं.जहाँ माता लक्ष्मी धन की देवी हैं… वहीं, ज्ञान और बुद्धि के देवता गणेशजी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य है और वे गणाधिपति हैं जिन्हें किसी दूसरे का आदेश मानने की मजबूरी नहीं. ये ऐसे देवता हैं जो हर प्रसंग में जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देते हैं.
भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं जो मार्ग की सारी अड़चनों को दूर करने वाले हैं.लेकिन, शायद आपने भी गौर किया होगा कि हर प्रतिमा में भगवान गणेश की सूंड दाहिने या बाएं मुड़ी हुई होती है.भगवान गणेश के इस मुड़े हुए सूंड़ के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड भी कहा जाता है. लेकिन…. भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप भी दो प्रकार के हैं. कुछ प्रतिमाओं में गणेशजी की सूंड बाईं ओर घूमी हुई होती है तो कुछ में दाईं ओर. जहाँ गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का वहीं दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है. साथ ही… वास्तु के हिसाब से भी इनकी प्रतिमा को रखने के लिए दिशा निर्धारित की जाती है.इसीलिए, ये सामान्य उत्सुकता होना स्वाभाविक है कि हमें आखिर किस प्रकार की प्रतिमा का पूजा करना चाहिए.
दाईं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी माने जाते हैं और आमतौर पर ऐसी प्रतिमा घर और ऑफिस में नहीं रखी जाती. क्योंकि, इनको स्थापित करने पर कई धार्मिक रीतियों का पालन करना ज़रूरी होता है. इसीलिए, ऐसी प्रतिमा को देवालयों में स्थापित करके वहीं उनकी पूजा की जाती है. ऐसे गणेशजी का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है. जबकि, दायीं ओर घूमी  हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं और, ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है.अतः… किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्राप्त होता है.
वहीं…. सिंहासन पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा जिनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी  होती है… पूजा घर में रखी जानी चाहिए. इनकी पूजा से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है. ऐसी मूर्ति  की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है… जैसे  शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली आदि. घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है. यहां बायीं ओर घूमी  हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए.बायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं. इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है.इसीलिए, घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्नविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती है. इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है.
इसके अलावा… एक सीधी सूंड़ वाले गणेश जी होते हैं जो काफी दुर्लभ है. क्योंकि, सीधी सूंड वाली मूर्ति की आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है. अक्सर संत समाज ऐसी ही मूर्ति की आराधना करता है. और, हाँ… माता लक्ष्मी और गणेश अर्थात गौरी-गणेश… माता एवं पुत्र हैं. इसीलिए, माता गौरी की प्रतिमा… भगवान गणेश के हमेशा दायीं ओर ही रहेगी… बायीं ओर नहीं. इसीलिए, सही तरीके से पूजा करें एवं खूब हर्षोउल्लास से अपना त्योहार मनाएँ..! भगवान गणेश आपके सारे विघ्न को समाप्त करें एवं माँ लक्ष्मी आपको धन-धान्य से पूर्ण करें..!
जय श्री गणेश…!!
जय महाकाल…!!!

आपकी प्रतिक्रिया...