कांग्रेस रुपी समुद्र में फंसे हरीश रावत का दर्द

हरीश रावत के ट्वीट के साथ ही कांग्रेस के अंतर्कलह की एक और कहानी बाहर आने लगी है हालांकि इस कहानी की असली सच्चाई क्या है इससे तो पर्दा नहीं उठा है लेकिन यह बात तो साफ है कि कभी कांग्रेस के दम पर मुख्यमंत्री बने हरीश रावत के साथ सब कुछ अच्छा नहीं हो रहा है। वह पार्टी के नाम पर काम तो कर रहे हैं लेकिन वह खुद उस काम से खुश नहीं हैं। किसी पार्टी का नेता अगर खुद की पार्टी के खिलाफ ट्वीट करता है तो उसे पता होता है कि उसे पार्टी किसी भी हद तक सजा दे सकती है। हरीश रावत ने यह ट्वीट कर दो बातें साबित करने की कोशिश की, पहली कि उनके साथ सब कुछ पार्टी में अच्छा नहीं हो रहा है जबकि दूसरी बात वह खुद आलाकमान का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहते थे क्योंकि उनकी परेशानी अब उनसे और नहीं सही जा सकती थी। 

हरीश रावत के ट्वीट ने जहां खुद कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा दी है तो वहीं बाकी दलों को उन पर हंसने का मौका भी दे दिया है। कभी कांग्रेस पंजाब के चर्चित चेहरे रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस मौके पर हरीश रावत पर चुटकी ली और कहा कि, ‘जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे’। आपको बतां दे कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस साल नवंबर में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और खुद की नई पार्टी बना ली है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष तिवारी भी कटाक्ष करने से नहीं चूके और उन्होंने भी एक ट्वीट कर पार्टी पर हमला किया और लिखा कि, पहले असम, फिर पंजाब और अब उत्तराखंड। कैप्टन के अलावा तीरथ सिंह ने भी हरीश रावत के ट्वीट पर चुटकी ली और कहा कि कांग्रेस हमेशा बिखरी रहती है फिर वह चुनाव कैसे लड़ेगी, जिस पार्टी के लोग ही आपस में एक मत नहीं हो पाते हैं वह देश की जनता का विकास कैसे करेंगे? 

किसी ना किसी राज्य से कांग्रेस पार्टी के बिखराव की खबरें अक्सर आती रहती है। पार्टी के पुराने से लेकर नये नेता तक अधिकतर लोग पार्टी की विचारधारा और तानाशाही से तंग नजर आते हैं हालांकि विरोध के स्वर बहुत कम लोगों के होते है अधिकतर लोग इस बात से विरोध का स्वर ऊंचा नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि उनका राजनीतिक करियर खराब हो जायेगा। देश में दो ही राष्ट्रीय पार्टियां है जिसमें बीजेपी के पास अधिकतर नेता अच्छी छवि वाले है ऐसे में कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी में जगह नहीं मिल पायेगी। कांग्रेस पार्टी की एक सच्चाई और भी है कि वह परिवारवाद को लेकर चलती है जिसका विरोध अब शुरु होने लगा है। पार्टी के लिए बहुत लोग मेहनत करते हैं लेकिन उसका श्रेय कुछ परिवार के लोगों को ही जाता है इसलिए अब पार्टी के लोग ही पार्टी के खिलाफ आवाज उठाने लगे है। 

दरअसल उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत के जिस ट्वीट को लेकर बवाल मचा हुआ है उसमें लिखा क्या गया था जरा उस पर भी नजर डाल लेते हैं, ”चुनाव_रुपी_समुद्र, हैं ना अजीब सी बात, चुनाव रुपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर कर के खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है जिस समुद्र में तैरना है सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं जिनके आदेश पर तैरना है उनके नुमांइदे मेरे हाथ पांव बांध रहे है मन में बहुत बार विचार आ रहा है हरीश रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है”, फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है ”न दैन्यं न पलायनम्” बड़ी उपापोह की स्थिति में हूं, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि भगवान केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्ग दर्शन करेंगे। 

 

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