उत्तर प्रदेश की राजनीति में मथुरा का महत्व

भारतीय जनता पार्टी 90 के दशक के बाद से राम मंदिर के मुद्दे पर चुनाव लड़ती आ रही थी, राम मंदिर के नाम पर बीजेपी को जीत भी मिली। गुजरात के विकास मॉडल और नरेंद्र मोदी के हिंदुत्व वाली छवि को देखते हुए जनता ने एक बार फिर से मोदी के नाम पर बीजेपी पर विश्वास किया। वादे के मुताबिक बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही सन 2019 में राम मंदिर पर फैसला हो गया और दशकों पुराना राम मंदिर का मुद्दा खत्म हो गया। काशी विश्वनाथ मंदिर कभी चुनावी मुद्दा नहीं बना लेकिन बीजेपी के ही कार्यकाल में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण हुआ और उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी से सांसद भी हैं इसलिए वह काशी के विकास के लिए हमेशा अग्रसर रहते है। 

काशी विश्वानाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की शुरुआत भी हो गयी इसलिए सरकार के हर फैसले को चुनावी चश्में से देखा जा रहा है। सिर्फ बीजेपी ही नहीं बल्कि सभी दलों के नेता अब चुनावी तैयारी में लगे हुए है और एक दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं खैर, यह कोई नई बात नहीं है चुनावी मौसम में बयानबाजी और नेताओं की अदलाबदली होनी आम बात है लेकिन इसी बीच बीजेपी के एक नेता की तरफ से मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि का जिक्र किया गया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने एक ट्वीट किया, अयोध्या, काशी हो गया अब मथुरा की बारी है। डिप्टी सीएम के इस ट्वीट के बाद से राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया और विपक्षी दल इसका विरोध करने लगे। केशव प्रसाद मौर्य के इस ट्वीट के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में मथुरा का नाम सबसे उपर हो गया और यूपी की राजनीति में मथुरा केंद्र बिंदु हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बयान दिया और कहा कि भगवान कृष्ण उनके सपने में आए थे और कहा कि मथुरा का विकास उनके हाथों होगा।  

दरअसल आयोध्या का राम मंदिर, काशी का विश्वनाथ मंदिर और मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि ऐसे स्थल हैं जहां मंदिर और मस्जिद एक साथ बने हुए है। मंदिरों का निर्माण तो सदियों पुराना है जबकि भारत पर जब मुगल शासक हुए तो उन्होंने तमाम मंदिरों को ध्वस्त कर उसे मस्जिद का रुप दे दिया या फिर मंदिरों के पास में मस्जिद का निर्माण करा दिया। इन तीनों स्थलों में से सिर्फ अयोध्या की बाबरी मस्जिद टूट गयी है जबकि काशी व मथुरा की मस्जिद अभी भी सुरक्षित है। काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर तैयार किया गया और अब मथुरा के कृष्णजन्मभूमि मंदिर का जिर्णोद्धार होने की बात शुरु हुई है। अगर राजनीति का चश्मा उतार दें तो मथुरा मंदिर का विस्तार करने में कोई नुकसान नहीं है और किसी भी मंदिर या धार्मिक स्थल का निर्माण या जिर्णोद्धार कराया जा सकता है।   

उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आ रहा है इसलिए एक बार फिर से सभी दल अपना अपना दम लगा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सपा के बीच ही टक्कर है जबकि बाकी दल सिर्फ किसी को समर्थन दे सकते है ना कि खुद के दम पर सरकार बना सकते है। अभी तक किसी बड़ी पार्टी का गठबंधन का ऐलान नहीं हुआ है जबकि छोटे दल अपने फायदे के अनुरूप सपा और भाजपा के साथ जोड़ी बनाने में लगे हुए है। योगी आदित्यनाथ ने अभी तक उत्तर प्रदेश में विकास का एक अलग ही मॉडल पेश किया वह सभी को दिखाई दे रहा है। यूपी में पिछले 5 सालों में जो विकास हुआ वह शायद पिछली किसी भी सरकार में नहीं हुआ था लेकिन यूपी की जनता अभी भी चुनाव को जातिवादी चश्में से देखती है इसलिए विकास के नाम पर वोट कोई भी दल नहीं मांगना चाहता है। 

आपकी प्रतिक्रिया...