वर्तमान को भविष्य की दिशा देनेवाला ऐतिहासिक भाषण

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2 जून 2022 को संघ के संघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष) का प्रशिक्षण शिविर नागपुर में संपन्न हुआ। प्रथा के अनुसार समापन कार्यक्रम में सरसंघचालक जी का भाषण हुआ। रेशीमबाग के संघ स्थान पर पहले तृतीय वर्ष के संघ शिक्षा वर्ग में आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार का समारोप भाषण हुआ…

ठोकर लगी और मिल गए भगवान

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ठोकर लगते ही उज्बेकिस्तान की शाख नोज उल्टे मुँह जमीन पर गिरते-गिरते बची, क्योंकि उसे उसकी सहपाठी याना, जो मास्को की रहने वाली थी, ने पकड़ कर संभाल लिया था। ‘‘जब भी हम इस पवित्र जगह पर आते हैं तो सीढ़ियों के इस टेढे़ मेढ़े पत्थर से हर किसी को…

मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा संस्कृति का विनाश

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“अरबस्तान और पश्चिम एशिया के असभ्य वहशी आठवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही भारतवर्ष में घुसने लगे थे। इन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने असंख्य हिन्दू मंदिर तोड़े, अनगिनत स्थापत्यों और मूर्तियों का विध्वस किया, हिन्दूओं के राजप्रासादों व दूर्गों को लूंटा, हिन्दू पुरुषों का कत्लेआम किया और हिन्दू महिलाओं को अपहृत…

लखनऊ नवाबों का नहीं बल्कि हिन्दुओं का शहर है 

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लखनऊ का इतिहास : लखनऊ जो नवाबों का शहर के नाम से विख्यात है जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने इस पूरे शहर के नक्शे से लेकर नाम तक परिवर्तित करते हुए केवल अपनी झूठी अमानत सिद्ध की है। मुस्लिमों ने हिन्दुओं से सभी विरासतों को अपना नाम देकर उसे इतिहास के…

सभी कर्मों का फल हो जाता है अक्षय

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सभी कर्मों का फल हो जाता है अक्षय, इसलिए यह तिथि कहलाती है, अक्षय तृतीया वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया, आखातीज, या आखा तृतीया कहते हैं। इस दिन दिए हुए दान और किए हुए स्नान, होम, जप आदि का फल अनन्त होता है, अर्थात् सभी शुभ कर्म अक्षय…

धर्म परंपरा : जैसा बोएंगे, वैसा ही पाएंगे

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मेरा एक मित्र हैदराबाद के एक पाठशाला में प्रधानाध्यापक हैं। उनके घर में दूध देने वाला कृष्णा एक दिन अचानक भागा भागा आया और उनके पैरों में पड़ गया। बोला की उनकी लड़की ने घर से भागकर एक मुसलमान लड़के से शादी कर ली है, और उसके परिवार के साथ…

प्रभु बिराजते है भक्ति के भाव में

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एक साधु महाराज श्री रामायण कथा सुना रहे थे। लोग आते और आनंद विभोर होकर जाते। साधु महाराज का नियम था रोज कथा शुरू करने से पहले "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहकर हनुमान जी का आह्वान करते थे, फिर एक घण्टा प्रवचन करते थे। एक वकील साहब हर रोज कथा…

निर्लिप्त कर्मयोग : त्याग की महानता

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  एक बार महर्षि नारद ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन बन में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ा घनी छाया वाला सेमर का वृक्ष देखा और उसकी छाया में विश्राम करने के लिए ठहर गये। नारदजी को उसकी शीतल छाया में आराम करके बड़ा आनन्द हुआ, वे…

स्त्री शक्ति और आस्था का पर्व गणगौर

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गणगौर का पर्व भक्ति श्रृंगार और लोकगीत से जुड़ा है, जिसके गीत जीवन में उमंग भरते है। साथ ही प्रकृति और संस्कृति को एक सूत्र में बांधते है। गणगौर हमें सभी को प्रेम के बंधन में जोड़ने की सीख भी देता है। गणगौर माता के गीतों में जीवन का हर…

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा : हिंदू नववर्ष का महत्व

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प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के लिये चुना। लंका विजय के पश्चात विभीषण और सुग्रीव के साथ। पुष्पक विमान द्वारा विदेहकुमारी सीता को वन की शोभा दिखाते हुए योद्धाओं में श्रेष्ठ श्रीरामचन्द्र जी ने…

मानव धर्म ही आज हिन्दू धर्म है – डॉ. मोहन भागवत

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परिवार संरचना प्रकृति प्रदत्त है, इसलिये इसको सुरक्षित रखना व उसका सरंक्षण करना हमारा दायित्व है।परिवार असेंबल की गयी इकाई नहीं है, यह संरचना प्रकृति प्रदत्त है इसलिये हमारी जिम्मेदारी उनकी देखभाल करने की भी है।।आज हम इसी के चिंतन के लिए यहां बैठे है।।हमारे समाज की इकाई कुटुम्ब है,व्यक्ति…

भारत में बसंतोत्सव – समरसता और लोकमंगल पर्व

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होली एक लोक उत्सव है जिसमे प्रकृति भी शामिल होती है। बसंत ऋतु की मादकता सर्वत्र दिखाई देती है। यह ऋतु मनुष्य के व्यवहार में आये अहंकार को भी तोड़ती है। कोई शिष्ट नही होता कोई विशिष्ट नही होता। यह बसंतोत्सव और विशेषत: होली की विशेषता होती है। गांवों में…

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