दिग्विजय सिंह क्यों करते है संघ पर विवादित टिप्पणी?

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच विवाद को लेकर एक गहरा नाता है जो कम होने का नाम ही नही लेता है और दिग्विजय सिंह इसे कभी कम भी नहीं होने देते हैं। दरअसल पता नहीं ऐसा क्या है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कुछ दिन बाद संघ को लेकर विवादित बयान जरूर देते है जबकि संघ कभी भी उनके किसी सवाल का जवाब नहीं देता फिर भी उनकी तरफ से बयान का आना जारी रहता है। संघ को लेकर अलग अलग समय पर उनके बयान लोगों को दुखी भी करते हैं क्योंकि संघ कोई पार्टी नहीं है यह एक संगठन है जो समय समय पर देश की सेवा करता रहता है और यह सेवा सभी के लिए होती है इसमें किसी एक जाति या धर्म के लोगों के लिए नहीं है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस के अकेले नेता नहीं हैं जो संघ पर आरोप लगाते है बल्कि पार्टी के युवराज राहुल गांधी भी संघ पर हमेशा हमले करते रहते हैं। 

हाल ही में दिग्विजय सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान संघ की तुलना दीमक (एक प्रकार का कीड़ा) से करते हुए कहा कि जैसे दीमक बहुत धीरे धीरे काम करता है और सब कुछ खत्म कर देता है वैसे ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी बहुत ही धीमी गति से काम कर रहा है जो किसी को पता नहीं चलता है। हालांकि अपने भाषण के बाद दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि इस बयान के बाद उन्हें गालियां बहुत मिलने वाली है शायद उन्हें यह पता होगा कि जो उन्होंने बयान दिया है वह पूरी तरह से सही नहीं है इसलिए उन्हें गालियां मिलेंगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के बाद से ही कांग्रेस इसके खिलाफ रही है क्योंकि संघ ने कांग्रेस के अनुरूप कभी काम नहीं किया और हमेशा से हिन्दुस्तान और हिन्दू को महत्व दिया है जबकि कांग्रेस को यह बात सहन नहीं होती है शायद इसलिए ही दशकों बाद भी कांग्रेस संघ को अपने दुश्मन के रूप में देखती है। 

अब जब दिग्विजय सिंह ने दीमक का नाम लिया तो पीएम मोदी का एक भाषण याद आया जिसमें पीएम ने कहा था कि, ”देश को कांग्रेस वाला दीमक लग चुका है और इस कांग्रेसी दीमक ने पूरे देश को कुतर दिया है इसे एक तरफ से निकालो तो दूसरी तरफ से कुतरना शुरु कर देता है लेकिन भाजपा के कार्यकर्ता इसे पूरे देश से निकाल फेकेंगे” पीएम का यह बयान काफी हद तक सही साबित हुआ और कई राज्यों से कांग्रेस का सफाया हो गया। पीएम का दीमक वाला बयान काफी हद तक सही भी कहा जा सकता है क्योंकि मोदी सरकार से पहले देश की हालात गंभीर थी।

पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देश भी हमें आंख दिखाते थे, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार अपने चरम पर था, खुद जनता को यह महसूस नहीं होता था कि देश एक्टिव है और सरकार कुछ कर रही है जबकि सन 2014 के बाद से इसमें बदलाव नजर आया। अब भारत के पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो खुलकर फैसले लेता है और किसी की भी धमकी से नहीं डरता है। एक ऐसा प्रधानमंत्री जो लोगों के लिए कुछ करता है और कुछ अलग करने की सोच रखता है। अब शायद यह कहना गलत नहीं होगा कि सच में पहले देश को दीमक लगा था। 

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