संघ प्रमुख की दो टूक नसीहत में छिपे मर्म को पहचाने

Continue Readingसंघ प्रमुख की दो टूक नसीहत में छिपे मर्म को पहचाने

इस समय देश में ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा गरमाया हुआ है परंतु इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गत दिवस नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में संघ कार्यकर्ताओं  के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में जो भाषण  दिया है उसकी चर्चा कहीं अधिक हो…

हिंदू भारतीय मुसलमानों के विरुद्ध नहीं है

Continue Readingहिंदू भारतीय मुसलमानों के विरुद्ध नहीं है

''एक इतिहास तो है, उसको हम बदल नहीं सकते। वह इतिहास हमने नहीं बनाया। ना आज के खुद को हिन्दू कहलाने वालों ने बनाया। ना आज के मुसलमानों ने बनाया, उस समय घटा। इस्लाम बाहर से आया, आक्रामकों के हाथ से आया। उस आक्रमण में भारत की स्वतंत्रता चाहने वाले…

परिवार के मुखिया बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह

Continue Readingपरिवार के मुखिया बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघचालक की भूमिका परिवार के मुखिया की होती है। बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश में इस भूमिका को जीवन भर निभाया। उनका जन्म 18 मई, 1911 को कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर श्री विक्रमाजीत सिंह के घर में हुआ था। शिक्षाप्रेमी होने के कारण इस…

शिक्षा का केन्द्र बिन्दु शिक्षक

Continue Readingशिक्षा का केन्द्र बिन्दु शिक्षक

भारत में शिक्षा की मौलिक अवधारणा है कि शिक्षा मानव की अन्तर्निहित शक्तियों का प्रकटीकरण है, न कि केवल छात्र के मस्तिष्क में कुछ जानकारियों को ठूँसा जाना। हमारी मान्यता है कि हमारे अन्दर जो परम चैतन्य विद्यमान है, उसी परमसत्य की अनुभूति और अभिव्यक्ति शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य…

दिल्ली के राजा वसंतराव ओक

Continue Readingदिल्ली के राजा वसंतराव ओक

संघ की प्रारम्भिक प्रचारकों में एक श्री वसंतराव कृष्णराव ओक का जन्म 13 मई, 1914 को नाचणगांव (वर्धा, महाराष्ट्र) में हुआ था। जब वे पढ़ने के लिए अपने बड़े भाई मनोहरराव के साथ नागपुर आये, तो बाबासाहब आप्टे द्वारा संचालित टाइपिंग केन्द्र के माध्यम से दोनों का सम्पर्क संघ से…

संघ विस्तार में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं का योगदान

Continue Readingसंघ विस्तार में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं का योगदान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य विस्तार में प्रचारकों का बड़ा योगदान है। साथ ही उस कार्य को टिकाने तथा समाज के विविध क्षेत्रों में पहुंचाने में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं की बहुत बड़ी भूमिका है। 11 मई, 1929 को नरवाना (हरियाणा) में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबू दिलीप चंद्र गुप्त के घर…

कैसा होगा संघ का शताब्दी वर्ष ? 

Continue Readingकैसा होगा संघ का शताब्दी वर्ष ? 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को वर्ष 2025 में 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। 1925 में नागपुर में संघ स्थापना हुई थी। इस घटना को इस वर्ष 2022 की विजयादशमी को 97 वर्ष पूर्ण होंगे। संघ का कार्य किसी की कृपा से नहीं, केवल संघ के कार्यकर्ताओं के परिश्रम,…

सेवा को समर्पित डॉ. रामगोपाल गुप्ता

Continue Readingसेवा को समर्पित डॉ. रामगोपाल गुप्ता

पूर्वोत्तर भारत के सेवा कार्यों में अपना जीवन लगाने वाले डा. रामगोपाल गुप्ता का जन्म कस्बा शाहबाद (जिला रामपुर, उ.प्र.) में 10 मई, 1954 को हुआ था। उनके पिता श्री महेश चंद्र जी की वहां कपड़े की दुकान थी। रामगोपाल जी आठ भाई-बहिन थे। उनका नंबर भाइयों में दूसरा था।…

कर्मनिष्ठ प्रचारक ऋषि मुनि सिंह

Continue Readingकर्मनिष्ठ प्रचारक ऋषि मुनि सिंह

जीवन की अंतिम सांस तक बिहार में संघ का कार्य करने वाले श्री ऋषि मुनि सिंह का जन्म 1927 में बिहार के कैमूर जिले के चांद विकास खंड के एक ग्राम में हुआ था। उनके अभिभावकों ने उनका यह नाम क्यों रखा, यह कहना तो कठिन है; पर उन्होंने अपने…

प्रवासप्रिय यादवराव कालकर

Continue Readingप्रवासप्रिय यादवराव कालकर

श्री यादवराव कालकर का जन्म 10 मई, 1916 को देऊलघाट (महाराष्ट्र) में श्री जानकीराम एवं श्रीमती सरस्वती बाई के घर में हुआ था। बुलढाणा में उनकी खेती थी। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा बुलढाणा तथा हाई स्कूल अमरावती से किया। अमरावती में ही उनकी भेंट डॉ. हेडगेवार से हुई।  1937 में कामठी…

संघ हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध – डॉ. मोहन भागवत

Continue Readingसंघ हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध – डॉ. मोहन भागवत

‘‘भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है। हिंदुत्व हमारी संस्कृति है। यह सर्व पुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है और मजबूती प्रदान कर रही है। सभी मत-पंथ, वर्ण, जाति व विचार को सम्मान देना तथा एकता के सूत्र में बांधे रखना ही हिंदुत्व है।’’…

सेवाप्रिय राधेश्याम जी त्रिपाठी

Continue Readingसेवाप्रिय राधेश्याम जी त्रिपाठी

संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह का प्रयाग से बड़ा गहरा नाता था। उन्होंने वहां से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा फिर वहीं प्राध्यापक भी रहे। उनका वहां एक निजी मकान भी था। उनके निधन के बाद वहां ‘प्रो. राजेन्द्र सिंह स्मृति सेवा न्यास’ का गठन किया गया है।…

End of content

No more pages to load