भारत से चुराए धरोहर को कब लौटाएंगे ये विदेशी?

भारत से बाहर जा चुकी धरोहर या कलाकृतियां धीरे धीरे ही सही, अब वापस आ रही हैं। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को ऐसे पुरावशेष लौटाएं हैं जो अलग-अलग समय अवधि के हैं, और ये सदियों पुराने हैं। इन पुरावशेषों में भगवान शिव, भगवान विष्णु और जैन परंपरा आदि से जुड़े 29 तस्वीरें एवं साज-सजा की वस्तुएं हैं। इन पुरावशेषों में से कुछ तो 9-10 ईस्वी पूर्व के हैं। इन पुरावशेषों के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनका निरीक्षण किया। यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए ऑस्ट्रेलिया को धन्यवाद दिया।

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘प्राचीन भारतीय कलाकृतियों को लौटाने की पहल के लिए मैं आप को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ। इनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश के साथ कई अन्य भारतीय राज्यों से अवैध तरीकों से निकाली गयी सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्तियां और चित्र हैं।’

आपको बता दें किये ये पुरावशेष, ‘शिव और उनके भक्त’, ‘ नारी शक्ति की पूजा’, ‘भगवान विष्णु और उनके रूप’, जैन परंपरा, चित्र और सजावटी वस्तुओं से जुड़े हैं। खबर के मुताबिक ये मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की सामग्रियों जैसे बलुआ पत्थर, संगमरमर, कांस्य, पीतल से बनी मूर्तियां और कागज पर बनी चित्रकारी (पेंटिंग) हैं।

इसके पहले साल 2014 में भी जब मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर थे तो भारत से चोरी हुई नटराज की मूर्ति को ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने वापस करने की घोषणा की थी। यही नहीं 2011 में यूनेस्को ने अनुमान लगाया था कि 1989 तक भारत से लगभग 50,000 कलाकृतियां चोरी कर ली गई थीं। बाद के दशकों में यह संख्या दो और तीन गुना ही हुई होगी। भारत में इस तरह की कोई राष्ट्रीय गणना नहीं हुई है। बता दें कि अमेरिकी एचएसआइ डिपार्टमेंट ने इस बात की तसदीक की है कि हर साल सैकड़ों भारतीय कलाकृतियां चोरी करके अमेरिकी बाजार में ले जाई जाती हैं।

जब कुछ साल पहले जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल कुछ समय पहले भारत आईं तो उन्होंने दसवीं सदी की मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी अवतार वाली प्रतिमा लौटाने की घोषणा की थी। यह मूर्ति जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से 1990 के दशक में गायब हो गई थी, जो जर्मनी के स्टुटगार्ड के लिंडन म्यूजियम में पाई गई।

भारत से गायब हुई कलाकृतियों में से कुछ तो 2000 साल या उससे भी अधिक पुरानी बताई जाती हैं। हालांकि बहुत सी प्रतिमाएं ऐसी हैं जिन्हें भारत लाया जा चुका है, ये धार्मिक भी हैं और गैर धार्मिक भी। लौटाई गई वस्तुओं में धार्मिक मूर्तियां, कांसे और टेराकोटा की बनी प्राच्य वस्तुएं शामिल हैं। इन्हें भारत के सबसे संपन्न धार्मिक स्थलों से लूटा और चुराया गया।

दरअसल जब-जब भारत पर आतताइयों ने आक्रमण किया और लूटा, तब तब वे अपने साथ भारत से कई बहुमूल्य और अति प्राचीन धरोहर भी अपने साथ ले गये। यह सिलसिला मुस्लिम आक्रांताओं से लेकर अंग्रेजों के शासन काल तक जारी रहा।

इस दौरान हमारे देश से सैकड़ों-हजारों बहुमूल्य प्रतिमाएं चोरी करके विदेशों में मोटी कीमत पर बेचने का सिलसिला चलता रहा है। कुछ मूर्तियों और प्रतिमाएं विदेशों के सरकारी संग्रहालयों में देखी गईं तो कुछ ऐसी भी हैं जो विदेश में लोगों के प्राइवेट संग्रहालय में हैं, जिनका पता चलना मुश्किल है। इसमें ब्रिटेन सबसे आगे हैं, ब्रिटेन में अभी भी कई ऐसे अंग्रेज जिनके दादा या परदादा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में थे, उनके घरों में आज भी ऐसी प्राचीन मूर्तियां देखने को मिल जाएंगी, लेकिन उन्हें लौटाना इनके लिए कतई संभव नहीं होगा।

कुछ दुर्लभ मूर्तियां और धरोहर यूपीए के शासन काल में भारत आई थीं, लेकिन एनडीए के शासन काल में इस प्रक्रिया में और तेजी आई है।

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