महंगाई से त्रस्त सामान्य जनता !

किसी भी वस्तु की मांग जब तेज होती है तो उसकी कीमत बढ़ने लगती है और उसे महंगाई का नाम दिया जाता है। यह व्यक्ति के हर दिन के खर्चे को भी प्रभावित करती है और उसका असर पूरे परिवार पर नजर आता है। महंगाई के कारण देश की अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
आम आदमी महंगाई के कारण परेशान है कुछ लोग शहर से गांव की तरफ चले गये हैं क्योंकि जितनी उनकी कमाई है उतने में परिवार का पेट नहीं पाला जा सकता हैं इसलिए वह खेती करने में ही खुश हैं कम से कम चैन से पेट तो भरेगा। सरकारें आती हैं जाती है, महंगाई को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन महंगाई पर किसी का नियंत्रण नहीं है और यह साल दर साल बढ़ती ही जा रही है।   
 
देश का हर नागरिक किसी ना किसी राजनीतिक दल से खुद को जोड़ कर रखता है लेकिन कोई भी राजनीतिक दल किसी का घर नहीं चलाते हैं। व्यक्ति को अपनी जरूरतों के लिए खुद काम करना पड़ता है और परिवार का पेट पालना पड़ता है। लोगों का राजनीतिक दल से जुड़ाव भी आर्थिक सोर्स के लिए नहीं होता है बल्कि वह सामाजिक या धार्मिक तौर पर होता है फिर ऐसे में अगर महंगाई बढ़ती जाए तो तकलीफ सभी को होने लगती है। महंगाई के लिए किसी एक सरकार को नहीं दोषी ठहराया जा सकता है क्योंकि महंगाई बढ़ने के अनेक कारण होते हैं जिसमें सरकार और जनता दोनों ही जिम्मेदार होती है। महंगाई पर रोक लगाने में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक प्रमुख भूमिका निभाते हैं लेकिन उनके भी कुछ मानक हैं जिसके आधार पर ही वह कोई फैसला लेते है। 
देश में पिछले कुछ समय से महंगाई ने अपनी रफ्तार पकड़ी है जिससे आम आदमी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। कोविड काल में ज्यादातर लोगों की नौकरी नहीं रही और जिनकी रही उनकी आय कम हो गयी ऐसे में महंगाई की मार उन पर बहुत भारी पड़ रही है। तमाम अलग अलग कारणों से महंगाई में वृद्धि हुई है जबकि सरकार की तरफ से कोई खास प्रयास नहीं किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2020 में थोक महंगाई दर का आंकड़ा 2.29 फीसदी था जो नवंबर 2021 में बढ़कर 14.23 फीसदी पर पहुंच गया। जनवरी 2022 में यह फिर से कम होकर 12.96 फीसदी पर पहुंच गया। इससे आम आदमी को थोड़ी राहत मिली है लेकिन यह अभी काफी नहीं है। खुदरा महंगाई दर फरवरी में  6.07 फीसदी पर पहुंच गयी जबकि यह जनवरी में 6.01 फीसदी थी। फरवरी 2021 में यह 5.01 फीसदी पर था। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक खुदरा महंगाई दर 2-6 फीसदी के बीच में होना चाहिए।
इस महंगाई का सबसे अधिक असर खाद्य पदार्थों और सब्जियों पर हुआ जो हर आदमी की जरूरत है। पेट्रोल और डीजल के दामों में भी वृद्धि हुई है जिससे यातायात महंगा हुआ जिसका सीधा असर सब्जियों और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही है जिसका असर मध्यम वर्ग पर सबसे अधिक होता है क्योंकि देश के अधिकतर वाहन पेट्रोल पर चलते हैं जबकि माल ढोने वाले वाहन डीजल पर आधारित होते है। देश में 9 दिनों में 8 बार पेट्रोल के दाम बढ़ चुके हैं और राजस्थान के गंगानगर में सबसे अधिक 121.62 रुपये पेट्रोल और 112.52 रुपये में डीजल बेचा जा रहा है।     

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