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केशव की शादी को चार साल हो गये, पर अभी तक उसकी कोई संतान नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि कमी केशव में ही है, उसकी पत्नी में नहीं. वह मां बनने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट है. केशव को समझ नहीं आया कि आखिर उसमें इस कमी की वजह क्या है. वह अच्छे खाते-पीते परिवार से है. उसकी पढ़ाई और परवरिश भी अच्छी हुई है. फिर यह कमी क्यों‍? डॉक्टर्स के अनुसार  उसका स्पर्म काउंट बेहद वीक है. जांच में पता चला कि मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने के कारण ऐसा हुआ है.

मोबाइल फोन आज के समय में हमारी जिंदगी की अभिन्न जरूरतों में शामिल हो गया है. स्मार्टफोन के आने से लोगों की यह जरूरत लत में तब्दील होती जा रही है. कारण, स्मार्टफोन ने हमारी हर जरूरत की चीज को खुद में समेट रखा है. चाहे बुक हो या कैलकुलेटर, नोटपैट हो या फिर टॉर्च सबकुछ एक छोटे से फोन के अंदर है. ऐसे में अपने फोन पर लोगों की निर्भरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. खास कर युवा वर्ग सबसे अधिक संख्या में स्मार्टफोन की इस लत की गिरफ्त में हैं.

हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएसएसआर) द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह पाया गया कि कॉलेज में पढ़नेवाले छात्र एक दिन में औसतन 150 से ज्यादा बार अपना मोबाइल फोन देखते हैं. शोध का शीर्षक ‘स्मार्टफोन डिपेंडेंसी,  हेडोनिज्म एंड पर्चेज बिहेवियर : इंप्लिकेशन फॉर डिजिटल इंडिया इनीशिएटिव ‘ (Smartphone Dependancy, Henonismn and Purchase Behaviour : Implication for Digital India Initiative) है. इस अध्ययन में कुल 20 केंद्रीय विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया. इस दौरान प्रत्येक विश्वविद्यालय के 200 छात्रों से बातचीत की गयी. इस प्रोजेक्ट के निदेशक मोहम्मद नावेद खान के अनुसार- ”विश्वविद्यालय के छात्रों के मन में यह डर होता है कि औरों के मुकाबलें कहीं उनसे कुछ जानकारियां छूट न जायें या वह किसी मुद्दे के बारे में अनभिज्ञ रह जाए. अध्ययन में यह पता चला कि एक युवा एक दिन में औसतन 150 से ज्यादा बार अपना मोबाइल फोन चेक करता है. कम-से-कम 14 फीसदी छात्र प्रति दिन तीन या उससे कम घंटे, करीब 63 फीसदी छात्र चार से सात घंटे और करीब 23 फीसदी छात्र हर दिन में आठ घंटे से ज्यादा समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं.  इससे उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.”

मोबाइल फोन से निकलने वाली हानिकारक तरंगों के प्रभाव से व्यक्ति कई तरह की गंभीर बीमारियों के चपेट में आ सकता है. जैसे – कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, स्लीपिंग डिसऑर्डर्स (जैसे – अनिद्रा, अधिक नींद, नींद में चलना, नींद में कांपना आदि), पारकिंसन (हाथों-पैरों में कंपन ), अल्जाइमर (भूलने की बीमारी), रक्तचाप, हृदयाघात, बांझपन, श्रवण समस्या, नेत्र समस्या, त्वचा में एलर्जी, इंफेक्शन आदि. यही नहीं मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल व्यक्ति के एक्सीटेंडल रिस्क को भी बढ़ा देता है.

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