गुजरात में उत्तर भारतीयों के विरूद्ध प्रांतवाद क्यों?

गुजरात से उत्तरभारतीयों का पलायन एक धक्कादायक घटना है.बनासकाँठा में एक 14महीने की बच्ची के साथ बलात्कार अतिनिंदनीय जघन्य अपराध है.दोषी कोई भी हो, उसे कठोरतम सजा दी जानी चाहिए. कुछ केसों में फास्टट्रैक अदालतों ने त्वरित निर्णय देकर स्तुत्य कार्य किया है. केंद्र सरकार द्वारा ऐसे जघन्य अपराध के लिए कानून में परिवर्तन कर फाँसी की सजा का प्रावधान करने से ऐसा संभव हुआ है.लेकिन एक व्यक्ति के किए गए अपराध की सज़ा बाकी के निर्दोष समाज को देना भीड़ का न्याय बन कर रह जाता है.गुजरात में इस घृणित घटना के बाद निर्दोष उत्तरभारतीय काम-काजी एवं मजदूरो के खिलाफ सुनियोजित तरीके से जुलूस निकालकर मारपीट और धमकी दे कर भय का वातावरण तैयार किया गया. उन्हें गुजरात से पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. परिणाम स्वरूप उत्तर भारत जाने वाली ट्रेनों में अप्रत्याशित संख्या में लोग बिहार, उत्तर प्रदेश तथा उड़ीसा के लिए पलायन करने लगे हैं.गुजरात के बड़े शहरों के रेल्वे स्टेशनों पर क्षमता से कई गुना ज्यादा भीड़ जमने लगी है. इसके पीछे ठाकोर सेना के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सरेआम धमकी देकर उत्तरभारतीयों को ठिकाना छोड़कर वापस अपने प्रदेश जाने अन्यथा परिणाम भुगतने की भाषा बोल रहे हैं. सरकार ने लगभग 450 से ज्यादा असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार करके स्थिति को नियंत्रण में रखा तो है,लेकिन पलायन को रोकना गुजरात सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. ठाकोर सेना वहां के कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर के प्रभाव में है.उनके निकट सहयोगी ही इसके कर्ताधर्ता हैं. सभी खबरों में चाहे समाचार पत्र हों या टीवी चैनल, हर जगह मारपीट, धमकी के पीछे अल्पेश ठाकोर के कार्यकर्ताओं का नाम आता है.आश्चर्य है कि कांग्रेस पलायन को गलत तो मानती है लेकिन गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए जबान नहीं खोलती है.राजनितिक लाभ के लिए निर्दोष नागरिक कैसे पिस रहा है, गुजरात का यह घटनाक्रम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.बड़े-बड़े कारखाने, फैक्टरियां मजदूरों, कर्मचारियों के पलायन से बंद पड़ गई हैं.बिहार एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस हालात से चिंतित हैं. सामाजिक तानाबाना एक बार टूटता है तो वह परस्पर अविश्वास को जन्म देता है. इस स्थिति से गुजरात को बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है. गुजरात सरकार और पुलिस जितनी मुस्तैदी से काम करेगी, उतनी जल्दी स्थिति सामान्य की ओर लौटेगी तथा एक उन्नत प्रदेश नये संकट से शीघ्र उबर जायेगा.

आपकी प्रतिक्रिया...