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फैशन व्यक्ति के निजी स्वभाव को भलिभांति दर्शाता है। हर व्यक्ति के स्वभाव में किसी खास रंग के प्रति लगाव झलकता है। किसी को भड़कीले रंग एवं खालिस चमकीले वस्त्र लुभाते हैं, तो कुछ लोग हलके और सौम्य वस्त्र पसंद करते ह

फैशन शब्द एकबारगी सुनने में एक स्टाइलिश शब्द प्रतीत होता है लेकिन यह एक सारगर्भित शब्द है। फैशन से हमारा आशय यह नहीं होता कि हमने कितने स्टाइलिश कपड़े पहने हैं या हम कितने महंगे ब्रांडेड कपड़ों से सजे हैं। फैशन एक नजरिया- एक दृष्टिकोण है। फैशन से तात्पर्य है स्वंय को संवारना, निखारना एक निश्चित प्रारूप में ढालना जो चक्षुप्रिय हो। हम अपने नियमित एकरस  जीवन से कभी कभी बोर होने लगते हैं और उत्तेजना की तलाश में स्वयं को विभिन्न रूपों में परिवर्तित करते हैं और फैशनेबल बन जाते हैं। आज सोशल मीडिया के दौर में लोगों का स्वयं के प्रति नजरिया बदला है। आजकल चाहे उच्च वर्ग हो या मध्यम या फिर निम्न वर्ग सभी लोग अपने को आकर्षक बनाना चाहते हैं। वैसे भी अगर हम अपने जीवन परिदृश्य में झांके तो इस भागदौड़ वाली जिंदगी में और प्रतिस्पर्धा  के इस दौर में हमारा प्रारूप बहुत मायने रखता है। जब कभी हम किसी नए व्यक्ति से मिलते हैं तो सर्वप्रथम उसके व्यक्तित्व को अवलोकित करते हैं, मसलन उसने क्या पहना है? उसकी वेशभूषा कैसी है? उसके कपड़े, जूतें या सैंडिल में कोई तारतम्य है या नहीं? उसके बोलने का, चलने  का, खाने पीने का सलीका कैसा है? इसलिए आज फैशन हमारे दैनिक जीवन में रच-बस गया है।

हमारे समाज में हर पेशे से जुड़े लोग होते हैं और सामान्यतः उन्हें हम उसी रूप में देखना पसंद करते हैं। जैसे अगर कोई फ़िल्मी हस्ती हो तो अपेक्षा अत्यधिक फैशनेबल की होगी। वैसे ही अगर कोई राजनीतिक व्यक्ति हो तो अपेक्षा सादगी की होगी लेकिन उसमे भी फैशन की विशिष्टता होगी उदाहरणस्वरूप हमारे माननीय प्रधानमंत्री जिनके पहनावों की अक्सर चर्चा होती है।

इसी प्रकार कलाकारों, गायकों और प्रकृतिप्रेमियों की अपनी एक  वेशभूषा होती है। उनके  फैशन का अलग अंदाज़ होता है। जब व्यक्तित्व और परिधान एकरूपता में हो तो हम आकर्षक प्रतीत होते हैं।  कभी एक छोटी सी बिंदी आपको स्टाइलिसट बना देती है तो कभी एक गलत तरीके से लगा हेयरपिन आपको फूहड़ की श्रेणी में खड़ा कर देता है। वैसे यूरोपीय और भारतीय फैशन के मापदंड थोड़े अलग हैं। हालांकि आज आधुनिकता के इस दौर में, भारतीय फैशन बहुत हद तक यूरोपिय फैशन से प्रभावित है।

फैशन व्यक्ति के निजी स्वभाव को भलिभांति दर्शाता है। हर व्यक्ति के स्वभाव में किसी खास रंग के प्रति लगाव झलकता है। किसी को भड़कीले रंग एवं खालिस चमकीले वस्त्र लुभाते हैं। तो कुछ लोग हलके और सौम्य वस्त्र पसंद करते हैं।

रंगों के प्रति हमारा चुनाव हमारे स्वभाव को शतप्रतिशत दर्शाता है। कुछ गहरे रंग जैसे लाल, नीला, भूरा, काला, बैगनी, हरा इत्यादि अलग-अलग स्वभाव के लोगो के पसंदीदा होते है।

लाल रंग रक्तिमा लिए होता है। इस रंग को पसंद करने वाले ज्यादातर लोग ऊर्जावान, हिम्मती और उत्तेजित प्रवृत्ति के होते हैं। लाल रंग हमारी संस्कृति में बहुत शुभ माना जाता है और शादी-ब्याह के अवसर पर इसका ज्यादातर प्रयोग होता है। अतः खास अवसरों पर यह ज्यादातर लोगों द्वारा पहना जाता है और फैशन डिजाइनर इन पर अक्सर नए-नए प्रयोग करते रहते हैं।

नीला रंग आज के परिवेश से बिलकुल घुल-मिल गया है और युवाओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसे पसंद करने वाले अधिकतर लोग व्यवस्थित प्रकृति के होते हैं और बड़े वफादार होते हैं। ये स्वयं पर ली जिम्मेदारी ईमानदारीपूर्वक निभाते हैं। ऐसे लोग विलासी, उच्चतम जीवनयापन में यकीन रखते हैं। इन्हें महंगी और नायाब वस्तुएं प्रिय होती हैं। ये स्वभावतः रोमांटिक होते हैं।

भूरा रंग पसंद करने वाले लोग यथार्थवादी, जमीं से जुड़े और बहुत अच्छे मित्र होते हैं। ये जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। बड़ी से बड़ी सफलता भी इनमें अहंकार नहीं लाती, ये सामान्य-जनों से घुलते-मिलते रहते हैं।

काले परिधानों को चुनने वाले लोग अंशतः रूढ़िवादी, क्रोधी, दूसरों पर हावी होने वाले जिद्दी किस्म के होते हैं। काला रंग मनोविज्ञान की दृष्टि से भले ही थोड़ा निराशाजनक प्रतीत होता है लेकिन फैशन की दुनिया में यह चमत्कारिक रंग है। फैशन डिजाइनर इसका भिन्न- भिन्न रंगों के साथ समावेश करके नए-नए प्रयोग करते हैं और बेहतरीन पोशाक तैयार करते हैं।

बैंगनी रंग रचनात्मकता को दर्शाता है। ऐसे लोगों के स्वभाव में बचपना झलकता है। ये किसी भी काम को अलग तरीके से करना पसंद करते हैं। ये अत्यधिक जिम्मेदारी से घबड़ाते हैं। इन्हें अपना काम पारंपरिक तरीकों से करना नहीं भाता, ये नित्य एकरस जीवन से ऊब जाते हैं और नवीनता  के लिए नए-नए प्रयोग करते रहते हैं।

हरे रंग को पसंद करने वाले प्रकृतिप्रेमी और सकारात्मकता से भरे होते हैं। इनके आंतरिक और बाह्य रूप में कोई फर्क नहीं होता। ये सामाजिक जीवन में अपनी छवि धूमिल नहीं होने देते हैं। इन्हें सामान्यतः लोग दोस्त बनाना पसंद करते हैं।

हलके रंग को पसंद करने वालों का संसार अलग होता है। वे स्वभाव में गहरे रंग पसंद करने वालों से भिन्न होते हैं।

स़फेद रंग वैसे तो सात्विकता को इंगित करता है लेकिन फैशन के मामले में यह एक कैनवास की तरह काम करता है जिस पर शालीनता से रंग उकेरे जाते हैं।

पीला रंग शुद्धता का सूचक है। इस रंग के ऊपर कोई भी आकृति ज्यादा उभरती है इसलिए इसे वस्तु चित्रण के लिए ज्यादा चुना जाता है। इसको पसंद करने वाले आशावादी, ज्ञानी और हंसमुख होते हैं।

आसमानी रंग को शांत, स्थिर, और सौम्य माना गया है। इसे पहनने वाले शांतिप्रिय होते हैं। व्यर्थ के विवाद में पड़ना इन्हें नहीं भाता। इसका सबसे सरल उदाहरण मेरी सहेली ममता है। उसका पसंदीदा रंग आसमानी है। उसके सामने चाहे कितनी भी परेशानी आ जाए वह चुपचाप उसका हल निकालने में लग जाती है।

हलके रंगों में गुलाबी रंग खास कर महिलाओं में खास लोकप्रिय होता है। यह रंग भावुकता, संवेदनशीलता एवं रोमांस को इंगित करता है। गुलाबी रंग बच्चों पर, खास कर लड़कियो पर खूब फबता है।

वैसे फैशन  को कई बातें प्रभावित करती हैं, जिसमें जलवायु, संस्कृति और त्यौहार शामिल होते हैं। ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में जहां ठण्ड ज्यादा पड़ती है वहां मोटे और गहरे रंग के ढ़ंके कपड़ों को ही अलग-अलग तरीकों से आकर्षक बनाते हैं। जहां ज्यादा गर्मी पड़ती है वहां छोटे और हलके कपड़े प्रयोग में लाते हैं। पूरे वर्ष जब जिस त्यौहार का समय हो उसी मुताबिक परिधान और आभूषण तैयार किए जाते हैं।

भारतीय संस्कृति भिन्नता लिए हुए है। अतः किसी राज्य में कोई रंग प्राथमिकता लिए हुए है तो कही ठीक इसके विपरीत लोगो का चुनाव होता है-जैसे गुजरात में पुरुष काफी भड़कीले रंगों का प्रयोग करते हैं; वही उत्तर भारत में हलके रंग ज्यादा दीखते हैं।

अब अलग-अलग रंगों के मेल से बनने वालो परिधानों  की चर्चा करें तो दो श्रेणियां आएगी। एक तो एक ही रंग के गहरे और हलके रंगों का मिलाप कर बढ़िया असर दिखाया जा सकता है-जैसे आसमानी और नीला, हल्का और गहरा हरा, लाल और कत्थई, गुलाबी और सिन्दूरी रंग मिलकर एकरूपता दिखाते हैं। वैसे ही भिन्न- भिन्न रंगों जैसे पीला और कत्थई, स़फेद और लाल, पीला और नीला, काला और स़फेद को मिलाकर एक आकर्षक संयोजन तैयार कर सकते हैं। एक महिला या पुरुष के फैशनेबल दिखने में सिर्फ परिधान नहीं बल्कि उन्होंने साथ क्या पहना है काफी मायने रखता है, जैसे जीन्स-टॉप के साथ बड़ी-बड़ी बालिया आजकल ट्रेंड में हैं। वैसे ही इथनिक स्टाइल के झुमके, बड़े लाकेट खूब चलते हैं। मोती और रेशम के गहने भी आजकल काफी ट्रेंड में हैं। अगर आपने बिलकुल प्लेन साड़ी या सूट डाल रखा हो पर थोड़े बड़े गहने आपको फैशनेबल लुक देंगे।

फैशन एक साधारण रंग-रूप वाले लोगों को भी आकर्षक बना देता है। एक सांवले रंग का व्यक्ति भी अगर रंगों का सही संयोजन करे और सही तरीकों से संवरे तो वह बेशक आकर्षक दिखेगा। हमारे प्रसिद्ध डिजाइनर मनीष मल्होत्रा, ऋतु कुमार इत्यादि फ़िल्मी हस्तियों से लेकर बड़े-बड़े राजनीतिक व्यक्तियों के कपड़े तैयार करते हैं। अतः अब फैशन का दायरा बहुत विस्तृत हो गया है और इसकी महत्ता को नकारा नहीं जा सकता।

हम किसी व्यक्ति को उसके फैशन करने के तरीके से बहुत हद तक परख सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति बेमेल तरीके से सजा हो तो जरूर उसमे सामंजस्य का अभाव होगा। अगर कोई ढीले-ढाले कपड़े पहना है तो वह स्वभाव से आरामपसंद होगा। इसी प्रकार जो लोग बिलकुल फिट-फाट रहते हैं वे काम में भी ज्यादातर चुस्त-दुरुस्त  होते हैं।

मेरी बिटिया शानू सिर्फ ग्यारह वर्ष की है लेकिन बचपन से ही वह व्यवस्थित स्वभाव की है। जब भी वह कही जाने को तैयार  होती है वह अपने वार्डरोब से बिलकुल मैच करते हुए ड्रेसस निकालती है फिर उसके साथ मैच करते शूज या सैंडल पहनती है।

कुछ लोग बस फैशन के मारे अपने व्यक्तित्व के विपरीत कपड़े पहन लेते हैं जैसे जीरो साइज के हो और वदन से चिपकी फिटिंग हो या फिर काफी भारी- भरकम हो और कपड़े फैले पैटर्न में हो। ऐसे लोग फैशन करके भी फूहड़ नजर आते हैं। अतः हमारा फैशन ऐसा होना चाहिए कि हमारा व्यक्तित्व उभर कर लोगों पर  प्रभाव उत्पन्न करें और हमारे स्वभाव को भी सही रूप में प्रतिबिंबित करें।

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