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दिव्यांग जनों के साथ भेदभाव को दंडनीय बनाने और संयुक्त राष्ट्र समझौते के अनुरूप ‘निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक, २०१६’ को संसद ने १६ दिसंबर को पारित कर दिया। इससे दिव्यांग जनों के लिए समाज में सम्माननीय स्थान बनाने में मदद मिलेगी। यही नहीं, पहली बार विधेयक में दिव्यांगों के साथ भेदभाव करने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

दिव्यांगों से जुड़ा एक अति महत्वपूर्ण विधेयक ‘निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक, २०१६‘ संसद द्वारा १६ दिसंबर को पारित कर दिया गया। इसमें निःशक्त जनों से भेदभाव किए जाने पर दो साल तक की कैद और अधिकतम पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। दिव्यांगों की श्रेणी में तेजाब हमले के पीड़ितों को भी शामिल किया गया है। विधेयक के कानून बनने के बाद निःशक्त जनों से संबंधित अधिकांश समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।

निःशक्त व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र संधि और उसके आनुषंगिक विषयों को प्रभावी बनाने वाला निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक काफी व्यापक है और इसके तहत दिव्यांगों की श्रेणियों को सात से बढ़ाकर २१ कर दिया गया है। अब निःशक्तता में मानसिक बीमारी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डायस्ट्रॉफी, गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शामिल हैं। केंद्र के पास और निःशक्तता को भी शामिल करने का अधिकार होगा। दिव्यांगों के लिए राज्य, आयुक्तों और मुख्य आयुक्त नियामक के रूप में काम करेंगे। निजी कंपनियों की इमारतों में दिव्यांगों के आने जाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाना होगा।

दिव्यांगों को अब सरकारी नौकरियों में ४ फीसदी आरक्षण
विधेयक में निःशक्त जनों के लिए आरक्षण की व्यवस्था तीन से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दी गई है। विधेयक में निःशक्त जनों के लिए कई व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इसके प्रावधान सरकार से मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं पर भी लागू होंगे। गौरतलब है कि देश की आबादी के २.२ प्रतिशत लोग दिव्यांग हैं। अभी तक कानून में इनके लिए ३ प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर ४ प्रतिशत किया गया है।

निःशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक २०१६ के कानून बनने के बाद निःशक्त व्यक्तियों को काफी लाभ मिलेंगे और उनका यूनिवर्सल कार्ड बनाया जाएगा जो पूरे देश में मान्य होगा। पहले निःशक्तता से संबंधित कार्ड स्थानीय स्तर पर ही मान्य होता था। दरअसल, इस तरह के कार्ड बनवाने का काम शुरू कर दिया गया है और अगले डेढ़ साल में यह काम पूरा हो जाएगा। यही नहीं, केंद्र सरकार केरल में दिव्यांग विश्वविद्यालय बना रही है और यह अगले साल से शुरू हो जाएगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि हमने यह प्रावधान किया है कि कोई भी दिव्यांग भारत सरकार या राज्य सरकार की योजना का लाभ उठाने से वंचित नहीं रह पाएगा। निगरानी के लिए कोई आयोग बनाने के सुझाव के बारे में श्री गहलोत ने कहा कि आयोग केवल सलाह दे सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने अधिक शक्ति सम्पन्न आयुक्तों की प्रणाली बनाने का प्रावधान किया है। यह केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर होगा। इसके तहत एक केंद्रीय बोर्ड भी बनाया जायेगा, जिसमें तीन सांसद होंगे।

श्री गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सुझाये गए दिव्यांग शब्द के बारे में हमने सभी राज्यों के साथ पत्र व्यवहार किया और एक-दो राज्यों को छोड़कर सभी ने इस शब्द को स्वीकार करने की बात कही। विधेयक सबसे पहले २०१४ में लाया गया था। इसके बाद इसे स्थायी समिति को भेजा गया, जिसने ८२ सुझाव दिए जिनमें से ५९ सुझाव मान लिए गए। उन्होंने कहा कि विधयेक में निःशक्त व्यक्तियों को सशक्त बनाने के प्रयास किए गए हैं। निःशक्त व्यक्तियों की पहले सात श्रेणियां थीं और अब श्रेणियों की संख्या बढ़ाकर २१ कर दी गई हैं।

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