पटना टु गांधीनगर

Continue Reading पटना टु गांधीनगर

  समग्र देश में सत्ता हासिल करने की भाजपा की दौड़ पटना होते हुए गांधीनगर तक पहुंची है। बिहार में नीतीश कुमार के साथ वह फिर काबिज है; जबकि गुजरात में राज्यसभा की तीसरी सीट दो कांग्रेसी विधायकों की बेवकूफी के कारण वह हार गई। चुनावों में हारजीत तो न

पूर्वी हिमालय में भी ड्रैगन की साजिश

Continue Reading पूर्वी हिमालय में भी ड्रैगन की साजिश

डोकलाम में भारतीय व चीन सेनाएं भले ही आमने-सामने हो; लेकिन १९६२ को अब दोहराया नहीं जा सकता। वैश्विक परिदृश्य इतना बदल चुका है कि चीनियों की भौगोलिक और आर्थिक विस्तारवादी नीतियों के प्रति महाशक्तियों के कान खड़े हो चुके हैं। पूरे हिमालय में पश्चिम से लेकर प

खाड़ी में एक और गंभीर संकट

Continue Reading खाड़ी में एक और गंभीर संकट

  सऊदी अरब के नेतृत्व में कई अरब देशों ने कतर के साथ राजनीतिक सम्बंध तोड़ दिए हैं। ये पूरे देश अमेरिकी समर्थक रहे हैं। अतः इसे अमेरिकी लॉबी में फूट माना जा रहा है। इससे मध्यपूर्व में नए समीकरण बनेंगे। इसके परिणाम घातक ही होंगे। अप्रवासी भारतीयों के

नवचैतन्य का आगाज

Continue Reading नवचैतन्य का आगाज

मोदी सरकार के तीन वर्ष भारत के नवनिर्माण की नींव रखने का आगाज देते हैं और यह कोई छोटा काम नहीं है। नवनिर्माण की राह तभी खुलती है जब जनता में आधी सदी में पनपी निराशा की भावना दूर हो और उनमें नवचैतन्य का संचार हो। मोदी सरकार के कार्यों से यह आशा पल्लवित ह

पाकिस्तानी साजिश का शिकार

Continue Reading पाकिस्तानी साजिश का शिकार

कुलभूषण जाधव पाकिस्तान के कुचक्र का शिकार बन गया है। यह भी उसके भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध का एक हिस्सा है। उसे कश्मीर को जलते रखना है, बांग्लादेश के टूटने के घाव को सहलाना है। आतंकवादी राष्ट्र होने की बात से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हटाना है। जाधव की

नवयुग का सूत्रपात

Continue Reading नवयुग का सूत्रपात

भाजपा हाल के चुनावों में एक संगठित राष्ट्रीय शक्ति व कर्मठ नेतृत्व के साथ उभरी है, जबकि कांग्रेस नेतृत्वविहीन एवं असंगठित दिखाई दे रही है। अखिलेश की सपा एवं मायावती की बसपा तथा केजरीवाल की आप महज क्षेत्रीय पार्टियां ही बन कर रह गई हैं। उनके राष्ट्रीय मा

खिलता कमल

Continue Reading खिलता कमल

देश में ४ फरवरी से लेकर ८ मार्च तक लोकतंत्र तक सब से बड़ा उत्सव होने जा रहा है। सब से बड़ा उत्सव इसलिए कि देश के लगभग २० फीसदी मतदाता पांच राज्यों में हो रहे इन विधान सभा चुनावों में अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। मतदाताओं की संख्या कुल १६.८ करोड़ होगी। कुल ६९० स

नोटबंदी का एक्स-रे

Continue Reading नोटबंदी का एक्स-रे

ओशो और नोटबंदी की बात करना बड़ा अटपटा लगेगा। लेकिन ओशो के चिंतन की गहराई में उतरे तो इसमें सिद्धांत पकड़ में आ जाएगा। ओशो ने कहा है, जब बदलाव या नवनिर्माण होता है तब सब कुछ उल्टा-पुल्टा हुआ लगता है। अराजकता का माहौल बन जाता है। पुरानी इमारत ध्वस्त हो जाती

दिल्ली का वायु-प्रलय

Continue Reading दिल्ली का वायु-प्रलय

राजधानी परिक्षेत्र में धुंध बेहद बढ़ गई, सामने सौ मीटर पर भी कुछ दिखाई न दें, सांस लेना दूभर हो गया, मास्क भी कोई काम नहीं दे रहे थे, कई बीमार हो गए। प्रकृति से खिलवाड़ की यह सजा है। परमाणु बम से भी अधिक यह ‘पर्यावरण बम’ विनाशक है। पहले जैसे जल-प्रलय हुआ करते थे, वैसे अब वायु-प्रलय होंगे। दिल्ली की स्थिति इसका आरंभिक संकेत है।

व्यक्ति-पूजा की राजनीति

Continue Reading व्यक्ति-पूजा की राजनीति

फांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव किस बात की ओर संकेत करते हैं? क्या सत्ताधारियों का भ्रष्टाचार, भाईभतीजावाद, जनता फर जबरन निर्णय लादने या जनता की आवाज न सुनने, सत्ता फर काबिज लोगों के खिलाफ रोष अथवा गठबंधन व फार्टी संगठनों के बीच आफसी खींचतान आदि ने फांसा फलट दिया? हर चुनाव में ये कारण होते ही हैं।

चेहरे की तलाश

Continue Reading चेहरे की तलाश

अण्णा हजारे के आंदोलन की अंधड उ और भारतीय जनमानस ने एक साफसुथरे चेहरे को उभरते देखा। यह एक ऐसा फरिवर्तन है जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अर्फेाा वजूद हमेशा बनाए रखेगा। यदि जनआंदोलनों को विभाजित करना हो तो उसे तीन वर्गों में बांटा जा सकता है-

End of content

No more pages to load