चीन के मोतियों की माला का जवाब है हीरों का हार

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चीन ने अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा को अमली जामा पहनाने के लिए 2005 में मोतियों की माला ( Strings of pearls) नीति का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य विश्व में अपना दबदबा कायम करना और अपने उद्योगों के लिए अकूत संसाधनों का इंतजाम करना था।चूंकि चीन यह मानता है कि 21 वीं…

शिक्षा का भविष्य और भविष्य की शिक्षा

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नई शिक्षा नीति का उद्देश्य ज्ञान आधारित जीवंत समाज का विकास रखा गया है जिसे प्राप्त करने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को पर्याप्त लचीला बनाया जाएगा। यह भारतीय शिक्षा पद्धति को राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना के अनुरूप संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को लोकतांत्रिक बनाने के प्रयास की अभिव्यक्ति है।

चीनी घुसपैठ और डरकर उसका पीछे हटना

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आखिरकार भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोवाल ने अपने चीनी समकक्ष से बातचीत करके उसे लद्दाख के मोर्चे पर पीछे हटने के लिए विवश कर दिया है।उन्होंने साफ कह दिया कि नया भारत किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं कर सकता है।

 यदि  आज चीन-पाकिस्तान एक साथ भारत पर हमला करें तो क्या होगा?

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भारत यथासंभव रूस, अमेरिका तथा इजरायल से प्राप्त मिसाइल सुरक्षा प्रणाली और अपने द्वारा विकसित सुरक्षा प्रणाली से स्वयं को बचाने का प्रयास करेगा। यदि ऐसा हुआ तो यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा दु:स्वप्न होगा। दूसरी ओर यदि परमाणु युद्ध की नौबत नहीं आयी तो चीन का आर्थिक एवं सैनिक महाशक्ति बनने का सपना सदा-सर्वदा के लिए टूट जाएगा। भारत दस साल पीछे चला जाएगा।

युद्धकामी चीन को पीछे हटना ही होगा

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चीनी सेना डोकलाम का बदला लेने के लिए इसे रुकवाना चाहती थी जिसे भारतीय सेना की दृढ़ता और मनोबल नाकाम कर दिया। गौरतलब है कि चीन पहले ही तिब्बत में एल.ए.सी.के पास तक सड़क व ढांचागत सुविधाओं का जाल बिछा चुका है। अब जब भारतीय सेना वैसा ही कर रही है तो उसे नागवार गुजर रहा है। 

शताब्दी पुरुष चन्द्रकुंवर बर्त्वाल

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छायावाद और प्रगतिवाद के कवि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल को प्रकृति के प्रति रागपरक रहस्य चेतना और गहन लगाव के कारण भारत का कीट्स भी कहा गया है। उनका जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के मालकोटी ग्राम में हुआ था। उनका यह शताब्दी वर्ष है। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके संपूर्ण साहित्य को नए सिरे से प्रकाशित करके उसका नया पाठ तैयार किया जाए।

हिंदी भाषी चाहें सबका विकास

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सन 2019 का चुनाव इस अर्थ में महत्वपूर्ण होने जा रहा है कि इसमें 21वीं सदी में पैदा होने वाला मतदाता भी हिस्सा लेगा।  जाहिर है कि नया मतदाता पुराने भ्रमजालों से बचते हुए अपनी शर्तों पर मतदान करेगा। चूंकि उसकी प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं अलग होंगी अतः उसका मत भी अपेक्षाकृत राष्ट्रविकास पर अधिक केन्द्रित होगा। कुछ ऐसा ही महत्व महाराष्ट्र में हिंदी भाषी मतदाताओं का भी है।

मोदी राज में हिंदी के अच्छे दिन

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  आज हिंदी विश्व के सब से सक्षम मानव संसाधन की अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई है। वह विश्व भर में फैल रहे पेशेवर भारतीयों के द्वारा सभी महाद्वीपों तथा लगभग सभी देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। भारतवर्ष की निरंतर विकासमान राजनीतिक और आर्थिक हैस

हिंदी पर मंडराता भीषण संकट

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हिंदी की बोलियों को स्वतंत्र भाषाओं का दर्जा देने की क्षुद्र राजनीतिक साजिश इस समय चल रही है| यदि ये बोलियां भाषाएं बन गईं तो हिंदी कमजोर होगी और देश को एक भाषासूत्र में बांधने के प्रयास भी विफल हो जाएंगे| हिंदी कमजोर हुई तो ये बोलियां भी कहीं की नहीं रहेंगी| इस संकट को देशवासियों को जान लेना चाहिए|

 गांवों में सुरक्षित है भारतीयता

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 राजनीतिक प्रभावों के चलते भले ही गांवों का परंपरागत परिवेश पहले जैसा न बचा हो परन्तु वहां भारतीयता के निर्माणक तत्व आज भी बहुत प्रबल हैं| हमारी लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता, एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहयोग का भाव यथावत सुरक्षित है|

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