नेपाल में चीनी ड्रेगन का शिकंजा

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चीनी राजदूत होऊ यांछी की पिछले तीन महीनों में नेपाल के राजनीतिक नेताओं से मुलाकातों से इतना तो साफ हो गया है कि नेपाल में भारत विरोधी खेल की वे सूत्रधार हैं। नेपाली प्रधानमंत्री ओली तो इस राजदूत महिला के हाथों कठपुतली बन गए हैं। जो कभी भारत के करीब माने जाते थे वे अब चीनी ड्रेगन के पंजे में जकड़ गए हैं।

चीन को जरूर मिलेगा भारत से करारा जवाब!

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भारत को वैश्विक जनमत का समर्थन मिलेगा, पर चीन का सामना हमें अपनी सामर्थ्य से करना होगा, किसी की मदद से नहीं। ...चीन की चुनौती हमें अपनी सामर्थ्य को बढ़ाने की प्रेरणा दे रही है। अभी दें या कुछ समय बाद, चीन को जवाब तो हमें देना ही है।

ब द ल ते    रि श्ते

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पाकिस्तान दो तरह से घिरा हुआ है। एक तरफ वह आर्थिक संकट में है और दूसरी तरफ मुस्लिम देश भी उससे कन्नी काट रहे हैं। इसके विपरीत मुस्लिम देशों से भारत के रिश्तों में गजब का सुधार हुआ है। यह भारतीय राजनीति की एक बड़ी उपलब्धि है।

टेक्नोट्रॉनिक युद्ध के लिए तैयार भारतीय सेना

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भविष्य के युद्ध नेटवर्क सेंट्रिक होंगे। यानी सैनिक पूरी तरह सायबर स्पेस से जुड़े होंगे। विशेष किस्म के सूट और ‘कॉम्बैट गॉगल’ सैनिक पहनेंगे। सैनिक के सामने जो कुछ भी आएगा उसे ये चश्मे रिकॉर्ड करते जाएंगे। इनकी मदद के मार्फत दिशाज्ञान होगा, शत्रु पक्ष की खुफिया जानकारी होगी और लोकल भाषा का तुरंत अनुवाद भी होता जाएगा।

सशक्त होती ग्रामीण युवा स्त्रीशक्ति

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बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में भारत के तकनीकी आर्थिक रूपांतरण के समानांतर जो सब से बड़ी परिघटना गुजरी है वह है लड़कियों की जीवन में बढ़ती भागीदारी। लड़कियों के हौसलों मेंं कमी नहीं है। चुनौतियों का सामना करना भी वे खूब जानती हैं। ग्रामीण युवतियां भी इसमें पीछे नहीं हैं। लेकिन समाज व सरकार दोनों को उनके साथ खड़े होना पड़ेगा।

मजदूरों के हितैषी डॉ. आंबेडकर

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भारत में मजदूर आंदोलनउन्नीसवीं सदी में ही शुरू हो गए थे। सन १८७७ में नागपुर की एम्प्रेस मिल्स के मजदूरों ने हड़ताल की। इसके बाद १८८४ में मुंबई की कपड़ा मिलों के ५००० मजदूरों ने हड़ताल की। सन १९२० में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस बन चुकी थी। सन १९२२ में फैक्ट्रीज एक्ट लागू हुआ जिसके तहत मजदूरों के काम के घंटे १० तय हुए थे।

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