पलटवार के लिए अनुकूल समय

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कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तान जबरदस्ती हॉट केक बनाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश करता है जबकि उसके यहां पर बलूचों के अधिकारों का खुले आम उल्लंघन होता रहता है। भारत के पास मौका है कि वह भी उन तमाम मुद्दों को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खींचे तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को स्वतंत्र कराने का प्रयत्न करें।

वैश्विक क्षितिज पर भारतीय सूर्योदय

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पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है। वैसे तो भारत शुरू से ही किसी गुट में जाने से बचा रहा लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सभी महाशक्तियों की दृष्टि हमारी ओर ही रही। स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव वर्ष एक संकल्प पत्र की भांति है, कि आने वाले वर्षों में भारत सर्व प्रमुख ‘सुपर पावर’ बन कर उभरे।

ट्विटर और टेस्ला-प्रमुख एलन मस्क का विवादित सौदा

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सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर और टेस्ला-प्रमुख एलन मस्क के बीच 44 अरब डॉलर का सौदा खटाई में पड़ गया है। अब यह मामला लम्बी कानूनी लड़ाई का रूप लेने जा रहा है। इसमें दोनों पक्षों के अरबों डॉलर स्वाहा होंगे। ट्विटर के चेयरमैन ब्रेट टेलर का कहना है कि ट्विटर…

धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचाई जानी चाहिए?

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क्या यह मध्य युग की वापसी है जब धार्मिक विचारों को लेकर बड़े-बड़े हत्याकांड हो रहे थे? या उस खुली बहस का प्रस्थान-बिंदु है, जो कभी न कभी तो होगी। ‘शार्ली एब्दो’ पर हुए हमले के बाद आतंकवाद की निंदा करने के अलावा कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा क्या हो? क्या किसी की धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचाई जानी चाहिए? फ्री स्पीच के मायने क्या कुछ भी बोलने की स्वतंत्रता है?

शिंज़ो आबे ने दी भारत-जापान मैत्री को नई ऊँचाई

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शिंज़ो आबे की हत्या की खबर से भारत स्तब्ध है। भारतीय जनता के मन में जो सम्मान जापान के प्रति है, वह किसी दूसरे देश के लिए नहीं है। हाल के वर्षों में शिंज़ो आबे के कारण यह सम्मान और ज्यादा बढ़ा है। ऐसे दोस्त को खोकर भारत दुखी है। इस हत्या के राजनीतिक परिणाम भी होंगे। खासतौर से सुदूर पूर्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम पर इसका असर जरूर होगा।

दुनिया का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘रिम्पैक’

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वैसे तो प्रशांत महासागर क्षेत्र में होने वाला रिम्पैक युद्धाभ्यास 1971 से हो रहा है लेकिन इस वर्ष उसका सामरिक महत्त्व बढ़ गया है।  26 देशों का यह संयुक्त नौसेना अभ्यास चीन के आक्रामक रुख के खिलाफ एक घेराव साबित होगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता दायरा

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भारत के समानव अंतरिक्ष-अभियान गगनयान की पहली परीक्षण उड़ान जल्द ही होने वाली है। शुरुआती उड़ान में अंतरिक्ष-यात्री नहीं होंगे, पर जब जाएंगे तब उनके साथ ‘व्योममित्र’ नामक एक रोबोट भी अंतरिक्ष जाएगा। यह रोबोट पूरे यान के मापदंडों पर निगरानी रखेगा। इसमें कोई नई बात नहीं है, केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दायरे की ओर इशारा है।

नई विश्व-व्यवस्था की खोज

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पेट्रोलियम की भूमिका समाप्त होगी, तो उससे जुड़ी शक्ति-श्रृंखलाएं भी कमजोर होंगी। उनका स्थान कोई और व्यवस्था लेगी। हम मोटे तौर पर पेट्रो डॉलर कहते हैं, वह ध्वस्त होगा तो उसका स्थान कौन लेगा? यह परिवर्तन नई वैश्विक-व्यवस्था को जन्म देगा। भारत का भी महाशक्ति के रूप में उदय होगा। संरा सुरक्षा परिषद की व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव है। भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील का ग्रुप-4 सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट का दावेदार है। अमेरिका और रूस दोनों भारत के दावे के समर्थक हैं, पर चीन उसे स्वीकार नहीं करता।

वैश्विक-संकट और भारत की बढ़ती भूमिका

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दुनिया के सामने एक तरफ महामारी का खतरा है, वहीं आर्थिक-प्रगति और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। कोरोना के अलावा दुनिया में शीतयुद्ध का संक्रमण भी हुआ है। खासतौर से अमेरिका की चीन और रूस के साथ रिश्तों में तल्खी बढ़ती जा रही है। यूरोप में यूक्रेन की सीमा पर युद्ध के हालात बने हुए हैं। हालांकि भारत ने सावधानी के साथ खुद को इस होड़ से अलग रखा है, पर हमें चीन और पाकिस्तान की साठगांठ का सामना करना पड़ेगा।

शानदार विजय स्मृतियां

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14 दिसम्बर को भारतीय सेना ने एक गुप्त संदेश पकड़ा कि दोपहर ग्यारह बजे ढाका के गवर्नमेंट हाउस में एक महत्त्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें पाकिस्तानी प्रशासन के बड़े अधिकारी भाग लेने वाले हैं। भारतीय सेना ने तय किया कि इसी समय उस भवन पर बम गिराए जाएं। बैठक के दौरान ही मिग 21 विमानों ने भवन पर बम गिराए, जिससे मुख्य हॉल की छत ध्वस्त हो गई। गवर्नर अब्दुल मुतालेब मलिक ने कांपते हाथों से अपना इस्तीफ़ा लिखा।

ऑपरेशन ‘देवी शक्ति’

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यह नाम ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ इसलिए रखा गया क्योंकि जैसे ‘मां दुर्गा’ राक्षसों से बेगुनाहों की रक्षा करती हैं, उसी प्रकार इस मिशन का लक्ष्य बेकसूर नागरिकों को तालिबान के आतंकियों की हिंसा से रक्षा करना है। यह ऑपरेशन वायुसेना की भूमिका और तालिबानियों की निर्ममता पर एक साथ टिप्पणी है।

अफगानिस्तान की हलचल का भारत पर प्रभाव

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अफगानिस्तान में तालिबान का वर्चस्व स्थापित हो चुका है। राष्ट्रपति अशरफ गनी, उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह और उनके सहयोगी देश छोड़कर चले गए हैं।

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