भारत का वास्तुशास्त्र

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ये समूचा विश्व ही मेरा घर है, ऐसी संकल्पना सामने रखकर यदि संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर की भूमिका के बीच इस विश्व के वास्तुशास्त्र के दृष्टिकोण से विवेचन किया गया तो कई उद्बोधक निष्कर्ष सामने आएंगे। उनकी उक्ति के आधार पर समूची पृथ्वी को एक वास्तु, एक घर मान लिया गया तो

वास्तुशास्त्र के अनुरूप बनाएं रसोईघर

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घर की सुख-शांति के लिए छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, इसीलिए रसोईघर के निर्माण में भी वास्तुशास्र के नियमों का पालन करना जरूरी है।

वास्तुशान्ति करना आवश्यक

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नये घर का निर्माण करना और उसमें विधि-विधान से प्रवेश करके जीवन-यापन करना हरेक व्यक्ति की इच्छा होती है। नये घर की वास्तुशान्ति करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

घर खरीदते समय बरतें सावधानियां

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बहुत दिनों से ग्रह संकुलों के विज्ञापनों में गुप्त में टीवी, फर्नीचर, सोना-चांदी अथवा कार का आकर्षक प्रलोभन दिखाया जाता है। किंतु एक जगह भी ऐसा नहीं कहा जाता कि बिना कोई तोड़-फोड़ किये पूरी तरह से वास्तु मार्गदर्शन की सुविधा प्रदान की जायेगी।

वास्तुशास्त्र घर का!

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स्नानगृह के लिए सब से बढिया स्थान माने पूर्व दिशा, क्यों कि सबेरे स्नान करते समय सूर्यकिरणें बदनपर फैलना माने उनमें से अतिनील किरणें बदनपर तथा बाथरूम पर फैलना लाभदायक होता है।

वास्तुशास्त्र घर का!

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संपूर्ण घर के आग्नेय कोने के कमरे में रसोई घर होना चाहिए। रसोईघर में ओटला पूर्व की ओर की दीवार से कुछ दूर लेकिन दक्षिण दिशा से सटा हुआ हो और गॅस सिगडी इस प्रकार रखी जाए, कि जिससे रसोई बनानेवाली गृहिणी का मुख पूर्व दिशा में होगा। किचन ओटले के ऊपर पानी का सिंक पूर्व दिशा की ओर हो। फ्रीज आग्नेय दिशा में रखा जाए।

दिशाओं का महत्व

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वास्तुशास्त्र के दृष्टिकोण से विचार करते हुए हम आठ दिशाओं को महत्व देते हैं। क्योंकि शास्त्र का मूल दिशा पर अवलंबित है। वैदिक वास्तुशास्त्र में प्रत्येक दिशा का एक विशिष्ट गुणधर्म बताया गया है।

वास्तुशास्त्र वाकई क्या है?

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वास्तुशास्त्र वाकई क्या हैं? उससे वास्तव मेंं क्या होता हैं? यह विज्ञान है कि अंधश्रद्धा? ऐसे के कई सवाल आम आदमी के मन में उभरते हैं। यह स्वाभाविक है कि किसी भी विषय की पूरी जानकारी होते तक उस संबंध में आशंकाएं होती ही है। आपकी आशंकाओं को दूर करने का यहां प्रयत्न किया गया हैं।

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