“विवेक संवाद” की संगोष्ठी में “टेक ए बिग लीप” पर विचार मंथन

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देश की चौतरफा प्रगति तथा भौतिक और सामाजिक विकास केवल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और भारतीय संस्कृति पर आधारित विचारों से ही संभव है। ’ उक्त विचार केंद्रीय सड़क परिवहन व नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने २८ जून को ‘विवेक स

त्रिपुरा में भी कमल खिलने की आस

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भाजपा त्रिपुरा के लिए नवप्रवेशी है परंतु कुछ महीने के भीतर ही इस दल ने यहां की राजनीति में सुनामी ला दी है। चुनाव पूर्व के अभियान के दौरान मोदी जी की सभा के लिए भाजपा कार्यकर्ता एक छोटा सा स्टेडियम भी नहीं भर सके थे, लेकिन वहीं अब एक भाजपा कार्यकर्ता की

भाजपा का सेक्युलर मार्ग से साम्प्रदायिक कार्ड

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साम्प्रदायिक कार्ड का अर्थ है, मतदाता की जातिगत पहचान के आधार पर वोट मांगना। यह पहचान जातिगत अथवा धार्मिक भी हो सकती है। इस आलेख में मैं जाति और मोटे तौर पर धर्म के आधार की चर्चा करूंगा।   स्वतंत्रता के बाद के भारत के बहुचर्चित समाजशास्त्री प

यादें बीते हुए साल की….

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जनवरी माह से शुरू होने वाले नए वर्ष में सब से पहले आनेवाला त्यौहार होता है मकर संक्रमण। संक्रमण शब्द का अर्थ है परिवर्तन, आगे बढ़ना या अपनी स्थिति बदलना। और अगर साल की शुरुआत ही परिवर्तन से हो तो स्वाभाविक है कि यह दौर साल के अंत तक चलता है। विगत वर्ष अर

आर्थिक क्रांति का प्रारंभ

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ऐसा लग रहा है कि स्वाधीनता के ६९ वर्ष बाद भारत के इतिहास में वास्तविक अर्थ में आर्थिक सुधारों और क्रांति का पर्व आरंभ हो चुका है। इसकी साक्ष्य है मोदी सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम। ५०० और १००० रु. के नोटों का निर्मौद्रिकरण कर के उन्हें रद्द कर देना।

‘सुशासन’ के लिए भाजपा सदैव प्रतिबद्ध है…

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भरौली, गोरखपुर के अपने पैतृक गांव से पांच दशक पहले मुंबई आए श्री आर.एन.सिंह ने व्यवसाय के साथ सामाजिक-शैक्षणिक क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किया है। उत्तर भारतीयों के जीवन में आशा की किरण जगाने वाले श्री सिंह ‘हमारा महानगर’ के रूप में मीडिया के

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संकल्पित मातृत्व की प्रतिक जीजा माता

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***सुलभा देशपांडे ***                   वीर प्रसुता भारत माता की कोख सदा ही दिव्य मातृत्व से सुशोभित रही है। अपने राष्ट्र की सुरक्षा एवं उसे वैभव शिखर पर ले जाने में जितना पुरुषों का योगदान है उनसे कहीं

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कबीर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में

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***प्रवीण गुगनानी ***               बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय।               जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥     कबीर के वृहद्, विशाल रचना संसार

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