स्वराज्य के प्रतीक हैं छत्रपति शिवाजी महाराज के किले : संदीप माहिंद ‘गुरुजी’

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सूर्या फाउंडेशन के तत्वावधान में स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘श्री शिवछत्रपति दुर्ग दर्शन यात्रा’ पूर्ण, गौरवशाली इतिहास को अपने हृदय में संजोकर लौटे 13 राज्यों के 70 युवा नईदिल्ली। छत्रपति शिवाजी महाराज के किले केवल पर्यटन के स्थल नहीं हैं। ये पवित्र तीर्थ हैं। भारत की स्वाधीनता के लिए…

बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल बुंदेला

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छत्रसाल का जन्म टीकमगढ़ के कछार कचनई में 4 मई 1649 को चंपत राय और सारंधा के घर हुआ था। वह ओरछा के रुद्र प्रताप सिंह के वंशज थे । छत्रसाल 12 वर्ष के थे जब महोबा के उनके पिता चंपत राय को औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मुगलों ने…

भारतीय इतिहास के साथ एक सुनियोजित खिलवाड़

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भारतीय इतिहास की पाठय पुस्तकों में औरंगजेब और शिवाजी महाराज के संघर्ष के पश्चात चुनिन्दा घटनाओं को ही प्राथमिकता से बताया जाता हैं जैसे की नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली द्वारा भारत पर आक्रमण करना, प्लासी की लड़ाई में सिराज-उद-दौलाह की हार और अंग्रेजो का बंगाल पर राज होना…

छत्रपति शिवाजी के शिल्पी समर्थ रामदास

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हमारे सनातनी संत केवल संत होकर तपस्या, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा पाठ व मोक्षप्राप्ति के हेतु ही कार्य ही नहीं करते हैं अपितु समय समय पर देश समाज की राजनीति को राजदरबार (संसद) से लेकर, समाज के चौक चौबारों तक व युद्ध की भूमि में जाकर रणभेरी बजाने तक का कार्य…

विश्व का पहला सर्जिकल स्ट्राइक

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छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों में पुणे का लाल महल बहुत महत्त्वपूर्ण था। उन्होंने बचपन का बहुत सा समय वहाँ बिताया था; पर इस समय उस पर औरंगजेब के मामा शाइस्ता खाँ का कब्जा था। उसके एक लाख सैनिक महल में अन्दर और बाहर तैनात थे; पर छत्रपति शिवाजी ने भी…

छत्रपति शिवाजी महाराज : हिंदुत्व के प्रहरी

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यह एक महान योद्धा और एक ऐसे नेता को उनकी जयंती पर याद करने का समय है, जिनके पास असाधारण गुण थे जिनकी तुलना किसी और के साथ नही की जा सकती।  शक्तिशाली, सनातन धर्मी, दृढ़निश्चयी, अपनत्व का प्रतीक, व्यावहारिक, सक्रिय, शुद्ध और धैर्यवान यह कुछ गुण हैं। जब हिंदुओं…

4 दिसंबर 1971 से मनाया जाता है नौसेना दिवस

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देश के कुछ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि भारतीय नौसेना दिवस और स्थापना दिवस अलग अलग है हालांकि इसकी जानकारी कम लोगों को क्यों है इस पर बात नहीं करेंगे, इसे सिर्फ जानकारी का अभाव ही कह सकते हैं या फिर देश की सेना के प्रति…

शिवाजी का सुराज-शासन प्रबंधन का दीपस्तंभ

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भारत का इतिहास गवाह है कि जब-जब भारत पर विपत्तियां आई हैं या भारत का जन-मन टूटने के कगार पर पहुंचा या उसका अस्तित्व और पहचान दांव पर लगी और ऐसा लगने लगा कि अब इस देश को नष्ट होने से कोई नहीं बचा सकता, तब-तब कोई न कोई ऐसा चमत्कार हुआ अथवा कहा जाए कि चेतना का ऐसा ज्वार उठता रहा,

शिव राज

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शिवाजी महाराज की जयंती तिथि के अनुसार फाल्गुन कृष्ण व्दितीया को अर्थात 10 मार्च को पड़ती है। इस अवसर पर उनका पुण्य स्मरण।

छत्रपति शिवाजी राज्याभिषेक हुआ

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राजदरबार का निर्माण किया गया। 32 मन के सोने से छत्र और राज सिंहासन का निर्माण किया गया। श्रीनृपशालिवाहन शक 1596, आनंदनाम संवत्सर ज्येष्ठ शुद्ध 13 शनिवार, सूर्योदय पूर्वं तीन घटका महाराज सिंहासन पर बैठे (6 जून 1674)। महाराज ने इस अवसर पर सबको कुछ-न-कुछ दिया। पूरे राज्याभिषेक पर 50 लाख रुपये का खर्च आया।

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