वीर सावरकर ने अंग्रेजों से माफ़ी क्यों मांगी?

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वीर सावरकर भारत देश के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। कांग्रेस राज की बात है। मणिशंकर अय्यर ने मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देने के लिए अण्डेमान स्थित सेलुलर जेल से वीर सावरकर के स्मृति चिन्हों को हटवा दिया। यहाँ तक उन्हें अंग्रेजों से माफ़ी मांगने के नाम पर गद्दार…

आत्मबलिदानी सती रामरखी देवी

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दिल्ली में मुगल शासक औरंगजेब के बन्दीगृह में जब गुरु तेगबहादुर जी ने देश और हिन्दू धर्म की रक्षार्थ अपना शीश कटाया, तो उससे पूर्व उनके तीन अनुयायियों ने भी प्रसन्नतापूर्वक यह हौतात्मय व्रत स्वीकार किया था। वे थे भाई मतिदास, भाई सतीदास और भाई दयाला। इस कारण इतिहास में…

बंगभूमि के सपूत क्रांतिकारी रासबिहारी बोस

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बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में प्रत्येक देशवासी के मन में भारत माता की दासता की बेडि़याँ काटने की उत्कट अभिलाषा जोर मार रही थी। कुछ लोग शान्ति के मार्ग से इन्हें तोड़ना चाहते थे, तो कुछ जैसे को तैसा वाले मार्ग को अपना कर बम-गोली से अंग्रेजों को सदा के…

क्रान्ति पुरोधा जोधासिंह अटैया

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भारत की स्वतन्त्रता का पावन उद्देश्य और अदम्य उत्साह 1857 की महान क्रान्ति का प्रमुख कारण ही नहीं, आत्माहुति का प्रथम आह्नान भी था। देश के हर क्षेत्र से हर वर्ग और आयु के वीरों और वीरांगनाओं ने इस आह्वान को स्वीकार किया और अपने रक्त से भारत माँ का…

पेशावर कांड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

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चन्द्रसिंह का जन्म ग्राम रौणसेरा, (जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड) में 25 दिसम्बर, 1891 को हुआ था। वह बचपन से ही बहुत हृष्ट-पुष्ट था। ऐसे लोगों को वहाँ ‘भड़’ कहा जाता है। 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया।  उन दिनों प्रथम विश्वयुद्ध प्रारम्भ हो जाने के कारण सेना…

युवा बलिदानी अनंत लक्ष्मण कान्हेरे

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भारत माँ की कोख कभी सपूतों से खाली नहीं रही। ऐसा ही एक सपूत थे अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए केवल 19 साल की युवावस्था में ही फाँसी के फन्दे को चूम लिया। महाराष्ट्र के नासिक नगर में उन दिनों जैक्सन नामक अंग्रेज जिलाधीश कार्यरत था।…

कैसा था भगत सिंह के सपनों का भारत

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23 मार्च 1931 को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर ने देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को स्वीकार कर लिया था और शायद मन में सपना लिए उस पर झूल गए कि आने वाला भारत आजाद होगा और वहां सभी सुख, चैन व भाई चारे से…

आजादी के मतवाले अमर शहीद हेमू कालाणी

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अमर शहीद हेमू कालाणी में राष्ट्रवाद की भावना का संचार बचपन में ही हो गया था, इतिहास गवाह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में वीर सेनानियों ने, मां भारती को अंग्रेजों के शासन से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से,  देश के कोने कोने से भाग लिया था। इन वीर…

दिव्यांग क्रन्तिकारी चारू चन्द्र बोस

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बंगाल के क्रांतिकारियों की निगाह में अलीपुर का सरकारी वकील आशुतोष विश्वास बहुत समय से खटक रहा था। देशभक्तों को पकड़वाने, उन पर झूठे मुकदमे लादने तथा फिर उन्हें कड़ी सजा दिलवाने में वह अपनी कानूनी बुद्धि का पूरा उपयोग कर रहा था। ब्रिटिश शासन के लिए वह एक पुष्प…

लाला लाजपत राय की आजादी में भूमिका

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देश आज 28 जनवरी 2022 को लाला लाजपत राय की 157वीं जयंती मना रहा है। देश की आजादी के लिए उनका बलिदान आज भी देश के लाखों लोगों को प्रेरित करता है और उनकी प्रेरणा की वजह से ही हम आज करीब 150 साल बाद भी उन्हें याद करते हैं।…

रानी गाईदिन्ल्यू: स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वोत्तर की प्रतिनिधि यौद्धा 

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पूर्वोत्तर के जनजातीय क्षेत्रों में एक लोकोक्ति बड़ी ही प्रचलित है -  “सोत पो, तेरह नाती ; तेहे करीबा कूँहिंयार खेती।” अर्थात स्त्री यथेष्ट संख्या में जब बच्चों को जन्म देगी तब ही समाज में खेती सफल होगी। पूर्वोत्तर के हाड़तोड़ श्रम करने वाले समाज में यह कहावत परिस्थितिवश ही जन्मी…

वीर सावरकर : बहुमुखी प्रतिभा के धनी

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वीर सावरकर एक लेखक, कवि, समाजसेवी, राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी, वक्ता, दार्शनिक, रणनीतिकार और हिंदुत्व के प्रतीक थे। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनका कार्य सराहनीय है। भारत माता और समाज के सभी वर्गों के लिए उनका प्यार और स्नेह उनके जीवन भर किए गए अथक कार्यों में देखा जा सकता…

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