भारत भक्ति से भरा मन है ‘स्वामी विवेकानंद’

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स्वामी विवेकानंद ऐसे संन्यासी हैं, जिन्होंने हिमालय की कंदराओं में जाकर स्वयं के मोक्ष के प्रयास नहीं किये बल्कि भारत के उत्थान के लिए अपना जीवन खपा दिया। विश्व धर्म सम्मलेन के मंच से दुनिया को भारत के ‘स्व’ से परिचित कराने का सामर्थ्य स्वामी विवेकानंद में ही था, क्योंकि…

सनातन धर्म होगा अगला पड़ाव!

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  वेदों और शास्त्रों के माध्यम से यह पता चलता है कि सनातन धर्म दुनिया का सबसे पुराना और एकमात्र धर्म है जहां हिंसा और अपराध को बढ़ावा नहीं दिया जाता है बल्कि प्यार और सहयोग की भावना जागृत की जाती है। 'सनातन' का अर्थ है 'शाश्वत' यानी 'हमेशा बना…

पुरुषार्थ चतुष्ट्य

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भारतीय संस्कृति में जीवन को सर्व प्रकारेण आनंदपूर्ण मनाने के लिए पुरुषार्थ चतुष्टय-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की उद्भावना को रखा गया है। सबसे पहले धर्म की अवधारणा है। यदि धर्म को सर्वप्रथम न रखा गया होता, तो ‘अर्थ’ और ‘काम’ के पीछे-पीछे भागते रहने से समाज में अव्यवस्था फैल जाती।

तुलसी की सामाजिक समरसता

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तुलसीदास जिस समय अपने विश्वप्रसिद्ध प्रबंध ‘रामचरित मानस’ की रचना कर रहे थे, देश में मुस्लिम शासकों का साम्राज्य स्थापित हो चुका था। मुसलमान परम्पराये, रहन-सहन और संस्कृति भारतीय हिन्दू पराम्पराओं और सनातन संस्कृति से मेल नहीं खाती थीं।

हमारे जीवन पर विवेकानंद का प्रभाव: मेरे भीतर के विवेकानंद!

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आचार्य तुलसी ने मुझे हाथ पकड़कर एक ऐसे महानुभाव के पास ला खड़ा किया, जिन्होंने मुझे मेरे भीतर के विवेकानंद को फिर से तुष्ट करने की राह दिखायी, मुझे स्वामी विवेकानंद के मुझाये रास्तों पर चलने के उपाय बताये और हताशा-निराशा के गहन अंधकार से बाहर निकाला। ये थे आचार्य तुलसी के ही शिष्य आचार्य महाप्रज्ञ।

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