प्रेम और भक्ति के लिए मीरा का प्रतिरोध

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जिन्होंने देश को अन्याय-अत्याचार के घने अंधकार से मुक्त करके न्याय-विकास के प्रकाश से प्रकाशित किया है। अपनी रचनाओं से जिन्होंने साहित्य को तो आलोकित किया ही है, अपने अटल विद्रोह से जिन्होंने समाज को न्याय, समता, निष्ठा और अदम्य साहस की उजली राह दिखायी।

खतरे में हैं हमारी भाषाएं।

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अपनी पारिवारिक-सामाजिक-व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच से एक-दो पल का वक्त निकालिए और जरा थमकर अपने आस-पास के माहौल पर गौर फरमाइए, तो चकित होते हुए आप पाइएगा कि आपके आस-पास का सारा माहौल ही बदल गया है।

हमारे जीवन पर विवेकानंद का प्रभाव: मेरे भीतर के विवेकानंद!

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आचार्य तुलसी ने मुझे हाथ पकड़कर एक ऐसे महानुभाव के पास ला खड़ा किया, जिन्होंने मुझे मेरे भीतर के विवेकानंद को फिर से तुष्ट करने की राह दिखायी, मुझे स्वामी विवेकानंद के मुझाये रास्तों पर चलने के उपाय बताये और हताशा-निराशा के गहन अंधकार से बाहर निकाला। ये थे आचार्य तुलसी के ही शिष्य आचार्य महाप्रज्ञ।

शब्द शक्ति का कालजयी जादू वंदे मातरम्!

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सन् 1907 में जब भिकाजी कामा ने भारत के राष्ट्रध्वज      के रूप में पहली बार तिरंगा का निर्माण किया और जर्मनी के स्टुटगार्ड में उसे फहराया, तब राष्ट्रगीत के तौर पर वहां ‘वंदे  मातरम्’ का ही गायन हुआ। लेकिन जब आज़ादी का समय आया, तब देश के राष्ट्रध्वज के साथ ही जब राष्ट्रगीत के चयन की बात आयी, तब रवींद्रनाथ ठाकुर के ‘जन गण मन’ के मुकाबले ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम्’ पिछड़ गया।

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