मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा संस्कृति का विनाश

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“अरबस्तान और पश्चिम एशिया के असभ्य वहशी आठवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही भारतवर्ष में घुसने लगे थे। इन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने असंख्य हिन्दू मंदिर तोड़े, अनगिनत स्थापत्यों और मूर्तियों का विध्वस किया, हिन्दूओं के राजप्रासादों व दूर्गों को लूंटा, हिन्दू पुरुषों का कत्लेआम किया और हिन्दू महिलाओं को अपहृत…

विवेकशील मुसलमान आगे आएं…

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ज्ञानवापी सर्वे के बाद देश भर में सरगर्मी विचारणीय है। उस में सामने आई बात पहले ही जगजाहिर थी। इस्लामी आक्रमणकारियों के क्रिया-कलाप के तथ्यों पर कभी विशेष विवाद नहीं रहा। तथ्य सदियों से जगजाहिर हैं। हाल में वामपंथी इतिहासकारों ने लीपापोती करने की कोशिश की, किन्तु विफल रहे। बल्कि…

ज्ञानवापी में है शिवस्वरूप, ज्ञानस्वरूप जल

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यह ज्ञानवापी बड़ी दिव्य है इसके लिए स्कन्दपुराण के काशीखण्ड में स्वयं भगवान् विश्वनाथ कहते हैं कि, "मनुष्यों! जो सनातन शिवज्ञान है, वेदों का ज्ञान है, वही इस कुण्ड में जल बनकर प्रकट हुआ है।" सन्ध्या में व कलशस्थापना में जो "आपो हि ष्ठा" आदि तीन मन्त्र प्रयुक्त होते हैं,…

लखनऊ नवाबों का नहीं बल्कि हिन्दुओं का शहर है 

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लखनऊ का इतिहास : लखनऊ जो नवाबों का शहर के नाम से विख्यात है जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने इस पूरे शहर के नक्शे से लेकर नाम तक परिवर्तित करते हुए केवल अपनी झूठी अमानत सिद्ध की है। मुस्लिमों ने हिन्दुओं से सभी विरासतों को अपना नाम देकर उसे इतिहास के…

अंग्रेजों के अनुसार अखंड भारत का मानचित्र

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ज्यादा अतीत में न जायें तो भी 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज प्रशासनिक अफसर जब कलकत्ता के अपने दफ़्तर में बैठते थे तो प्रोटोकॉल के अनुसार उनके पीछे की दीवार पर उस भारत का मानचित्र लगा होता था जिसे वो "इंडिया" कहकर पुकारते थे। दरअसल, आज का भारत सीमित…

पौराणिक इतिहास

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तिब्बत में बने प्रसिद्ध थोलिंग मठ जाने का रास्ता (पैदल) माणा होते हुए सरस्वती नदी के किनारे खड़ी चढ़ाई से होकर जाने वाला एक अत्यंत दुर्गम कठिन पथ है। प्राचीन काल में साधु संत इसी मार्ग से पवित्र मानसरोवर व कैलास यात्रा पर चले जाते थे।

सावरकर और गांधी के संबंधों पर प्रश्न उठाने वाले सच्चाई देखें

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वीर सावरकर या उनके जैसे दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों ने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनके देश के लोग ही कभी उनके शौर्य, वीरता और इरादे पर प्रश्न उठाएंगे। वीर सावरकर के साथ त्रासदी यही है कि वैचारिक मतभेदों के कारण एक महान स्वतंत्रता सेनानी, योद्धा, समाज सुधारक, लेखक ,कवि…

संघ के योगदान से जब बदली देश की तस्वीर

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सांप्रदायिक, हिंदूवादी, फांसीवादी और हिन्दू आतंकवाद सहित ना जाने कितने नामों से इसे पुकारा गया लेकिन यह संगठन कभी पीछे नहीं हटा। जनसेवा और देशसेवा को हमेशा अपनी प्राथमिकता बनाए रखा और समय समय पर देश के लिए योगदान भी दिया है। डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने सन 1925 में विजयादशमी…

जब इतिहास बोलता है….

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इतिहास अन्वेषण यह ऐरे-गैरे का काम नहीं है। सारी जिंदगी समर्पित करने के बाद इतिहास के किसी रहस्य से परदा उठ सकता है। अमुमन यह दिखाई देता है कि इस क्षेत्र में नई पीढ़ी आती नहीं है, फिर भी मिरज का तीस-पैंतीस वर्षीय युवक इस विषय में स्वयं को झोंक देता है, यह राहत की बात है।

इतिहास-सत्य का अनावरण करती पुस्तक

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कन्नड़ के प्रसिद्ध उपन्यासकार डॉ. एस. एल. भैरप्पा ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर महत्वपूर्ण उपन्यास ‘आवरण’ की रचना की है। मूलत: कन्नड़ के इस उपन्यास के दो वर्षों में ही तेईस संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

राव समाज के इतिहास की पहचान

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प्राचीन काल से ही हिंदू समाज के स्त्री‡पुरुषों का परिचय माता-पिता के नाम से होने की प्रथा रही है। राम दशरथ का पुत्र है इस नाते ‘दशराथी राम’ यह उसका पहचान है, इसी तरह कर्ण की पहचान भी ‘राधेय’ नाम से की जात है। राम के परिचय के साथ इक्ष्वाकु वंश यह नाम भी पड़ गया है। कुल और वंश का परिचय अपनी धरोहर ही है।

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