मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा संस्कृति का विनाश

“अरबस्तान और पश्चिम एशिया के असभ्य वहशी आठवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही भारतवर्ष में घुसने लगे थे। इन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने असंख्य हिन्दू मंदिर तोड़े, अनगिनत स्थापत्यों और मूर्तियों का विध्वस किया, हिन्दूओं के राजप्रासादों व दूर्गों को लूंटा, हिन्दू पुरुषों का कत्लेआम किया और हिन्दू महिलाओं को अपहृत किया। इस इतिहास को सब शिक्षित और अशिक्षित भारतीय जानते है। इतिहास की पुस्तकों में बारीकी से इन घटनाओं के वर्णन है, पर कई भारतीय यह तथ्य नहीं जानते कि इन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने संसार की सर्वश्रेष्ठ सभ्यता, संस्कृति और समाज को भी नष्ट किया जब मूर्तिभंजक मुसलमान भारतवर्ष में घूसे तब हिन्दू संस्कृति अपनी रचनात्मकता में चरमसीमा पर थी।

मुस्लिम आक्रमणकारियों ने न केवल अनगिनत मंदिरों और अन्य संरचनाओं का विध्वंस किया, बल्कि हिन्दूओं की सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं का भी दमन किया; हिंदू धर्म की प्राचीन शक्ति को नुकसान पहुंचाया; हिंदू संस्कृति के प्रसार को रोका और इसे स्थायी रूप से कमजोर कर दिया; हिंदू कलाओं के विकास को रोका; सभी वैचारिक क्षेत्रों में रचनात्मक आवेग को समाप्त कर दिया; लोगों के सांस्कृतिक गौरव को नष्ट किया और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में मूल्य, ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रसारण को बाधित किया; हिंदू राज्य और समाज के विकास को नष्ट कर दिया; ज्ञान प्राप्ति, अनुसंधान और चिंतन को बुरी तरह से प्रभावित किया और हिंदू समाज के नैतिक आधार को छिन्न-भिन्न कर दिया। हिंदुओं को भारी मानसिक क्षति हुई।”

– रिजवान सलीम

(स्रोत: The Hindustan Times, नई दिल्ली, २८ दिसम्बर १९९७)

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