मूर्ख भेड़िया और समझदार पिल्ला

Continue Reading मूर्ख भेड़िया और समझदार पिल्ला

एक बार की बात है कि एक कुत्ते का पिल्ला अपने मालिक के घर के बाहर धूप में सोया पड़ा था। मालिक का घर जंगल के किनारे पर था। अतः वहां भेड़िया, गीदड़ और लकड़बग्घे जैसे चालाक जानवर आते रहते थे।

स्व-सामर्थ्य की पहचान

Continue Reading स्व-सामर्थ्य की पहचान

स्वयं पर विश्वास होना यह सबसे बड़ी शक्ति है। अपने सामर्थ्य का आत्मबोध बहुत आवश्यक है। वह यदि नहीं होगा तो किसी आकस्मिक संकट के समय मनुष्य घबरा जाता है। डर के कारण ‘पॅनिक’ हो जाता है। परंतु जो आत्मनिर्भर है वह संकटों से नहीं डरता। उसे स्वयं के सामर्थ्य…

करुणाकंद

Continue Reading करुणाकंद

“एक ओर तो मुझे अपराध-बोध हो रहा था कि मैं स्वयं सिद्धि और देव के लिए कुछ नहीं कर पाया; दूसरी ओर मेरा मन कह रहा था- धन्य हो करुणाकंद! आपने सिद्धि को वापस लाकर देव जैसे करोड़ों लोगों की आस्था को टूटने से बचाया है।”

End of content

No more pages to load