स्व-सामर्थ्य की पहचान

स्वयं पर विश्वास होना यह सबसे बड़ी शक्ति है। अपने सामर्थ्य का आत्मबोध बहुत आवश्यक है। वह यदि नहीं होगा तो किसी आकस्मिक संकट के समय मनुष्य घबरा जाता है। डर के कारण ‘पॅनिक’ हो जाता है। परंतु जो आत्मनिर्भर है वह संकटों से नहीं डरता। उसे स्वयं के सामर्थ्य पर विश्वास होता है। स्वामी रामतीर्थ इस विषय में एक पक्षी की कथा सुनाते थे।
एक जंगल में एक दिन बहुत बडी आग लगती है। सारे प्राणी भागने लगते हैं। केवल एक पक्षी एक उंचे झाड पर बैठकर आराम से गाता रहता है। उसको इस तरीके से गाते देख एक सियार उससे कहता है ‘जंगल में आग लगी है, और तुम आराम से गाना गा रहे हो? हम सभी सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। तुम भी भागो।’
पक्षी बोला, “मैं क्यों भागूं। मैं मेरी शक्ति पहचानता हूं। मेरी शक्ति मेरे पंखो में है, मैं जब चाहे तब उडकर जा सकता हूं। मेरी चिंता मत करो।”
संदेश: जो स्वत: के सामर्थ्य को पहचानता है वह संकटों पर कैसे मात की जाती है यह भी समझता है।

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