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पूर्व केंद्रीय वित्त एवं गृह मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में अग्रणी वर्तमान राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने कभी स्वप्न में भी यह कल्पना नहीं की होगी कि केंद्र सरकार की अधीनस्थ सर्वोच्च जांच संस्था सीबीआई के जिस मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में कभी उन्हें विशिष्ट अतिथि का सम्मान प्रदान किया गया था ,उसी मुख्यालय में उन्हें आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोपी के रूप में रात गुजारनी पड़ेगी। गौरतलब है कि 30 अप्रैल 2011 को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस मुख्यालय का उद्घाटन किया था ,तब पी चिदंबरम उनकी सरकार में गृह मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उस समय वे सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में अग्रणी माने जाते थे।  मनमोहन सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय अहम मानी जाती थी, परंतु 2014 में जब मनमोहन सरकार का पतन हुआ और भाजपा पहली बार लोकसभा चुनावों में अपने दम पर सरकार बनाने में सफल हुई तो राजनीतिक हालात इतनी तेजी से बदलते गए कि 134 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के समक्ष आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने की स्थिति में भी नहीं रह सकी। इसके बाद तो चिदंबरम जैसे दिग्गज कांग्रेस नेताओं के सितारे भी गर्दिश में आने लगे।

मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल में ही चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ने लगी थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।  उन्हें कई बार अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट से राहत भी मिली ,परंतु गत 20 अगस्त 2019 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी तो वह गिरफ्तारी के डर से अंतर्ध्यान हो गए और 27 घंटे तक भूमिगत रहे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस पार्टी से जुड़े देश के ख्याति वकीलों ने चिदंबरम को राहत दिलाने के लिए दिनभर प्रयास किए, परंतु सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की बेंच में उनके केस की सुनवाई के लिस्टिंग ना होने के कारण सीबीआई को उनकी गिरफ्तारी का अवसर मिल गया।

चिदंबरम के विरुद्ध लुक आउट नोटिस जारी करना भी सीबीआई का आश्चर्यजनक कदम था ,परंतु सीबीआई को यह विकल्प चुनने के लिए दरअसल चिदंबरम ने ही विवश किया। अगर वे सीबीआई के सामने खुद को स्वयं की गिरफ्तारी के लिए प्रस्तुत कर देते तो उन्हें अपमानजनक परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। उन्होंने स्वयं कहा है कि वे न्यायालय का सम्मान करते हैं और उन्हें उस पर पूरा भरोसा है। जब उन्हें अपने निर्दोष होने का पूरा भरोसा है, तब उन्हें निर्भय होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना चाहिए। अगर उन्हें ऐसा महसूस होता है कि राजनीतिक द्वेष वश उन्हें किसी साजिश के तहत फंसाया गया है तो उसका फैसला भी अदालत ही कर सकती है। अदालत उन्हें इसका पूरा अवसर प्रदान करेगी।

यह भी एक दिलचस्प तथ्य है कि चिदंबरम की गिरफ्तारी उस समय हुई है जब केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर अमित शाह आसीन हैं। और वह भी मोदी सरकार में उतने ही ताकतवर हैं, जितने ताकतवर कभी चिदंबरम मनमोहन सरकार में हुआ करते थे।  संयोग की बात है कि जब चिदंबरम केंद्र में गृह मंत्री थे,तब अमित शाह को गुजरात में गिरफ्तार किया गया था। आज केंद्र में अमित शाह गृहमंत्री है और सीबीआई द्वारा उन्हें गिरफ्तार किया गया है। राजनीति में समय का पहिया कितनी तेजी से घूमता है,इसके उदाहरणों की संख्या कम नहीं है।

चिदंबरम का मामला उनमें सबसे ऊपर माना जा सकता है, क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसी जिल्लत किसी भूतपूर्व केंद्रीय वित्त और गृह मंत्री को नहीं झेलनी पड़ी जिसका सामना चिदंबरम कर रहे हैं। मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अगर नीरव मोदी और विजय माल्या की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है तो चिदंबरम भी किसी ना किसी रूप में उसके लिए जिम्मेदार हैं।

चिदंबरम का कहना है कि मैं भाग नहीं रहा हूं ,परंतु आजादी के लिए लड़ना पड़ता है। अगर जिंदगी और आजादी में से किसी एक को चुनना हो तो मैं आजादी को चुन लूंगा। चिदंबरम ने जिस पत्रकार वार्ता में यह बातें कहीं वह आनन-फानन में कांग्रेस दफ्तर में तब बुलाई गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट में शाम तक भी उनकी याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी थी। बहरहाल अब चिदंबरम को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना है और अगर वह खुद को निर्दोष बता रहे हैं तो मानसिक रूप से भी उन्होंने खुद को कानूनी लड़ाई के लिए तैयार कर लिया होगा।

पहले ऐसा प्रतीत हुआ था कि कांग्रेस पार्टी चिदंबरम के पक्ष में खुलकर सामने आने के लिए तैयार नहीं है, परंतु चिदंबरम की गिरफ्तारी जब अपरिहार्य दिखाई देने लगी तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर के जरिए कहा कि चिदंबरम मोदी सरकार की विफलताओं को उजागर करते हैं, इस कारण सरकार को पसंद नहीं है, इसलिए चिदंबरम को शर्मनाक तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने यह भी कहा कि हम सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे चाहे कोई नतीजा हो। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर के माध्यम से सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार ईडी ,सीबीआई और मीडिया का गलत इस्तेमाल कर चिदंबरम की छवि को नुकसान पहुंचा रही है।

तमिलनाडु में द्रमुक के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम को द्रमुक का साथ भी मिल गया है। कांग्रेस के कार्यकर्ता जगह-जगह चिदंबरम की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं ,परंतु दिक्कत यह है कि चिदंबरम का राजनीतिक प्रभाव केवल तमिलनाडु तक ही सीमित है। कार्यकर्ताओं से हमेशा ही उनकी दूरी रही है। यहां तक कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता भी चिदंबरम पर यह कटाक्ष करने से नहीं चूके हैं कि वे खुद को बौद्धिक रूप से श्रेष्ठ वर्ग का मानते हैं। अब यह उत्सुकता का विषय है कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को इस तरह राजनीतिक रंग देने में सफल होती है फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि चिदंबरम की आगे की राह आसान नहीं है।

                                                                    (लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है)

 

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