बडे दिल की बडी बात

हाल ही में फाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कपतान शाहिद अफ़रीदी ने बताया कि हिंदुस्तानियों के दिल फाकिस्तानियों जितने बडे नहीं होते। इस बात से कई हिंदुस्तानी बहुत नाराज़ हो गय। इसमें नाराज़ होने की क्या बात ह? शाहिद अफ़रीदी फाकिस्तानी बायोलॉजी की जानकारी दे रहे थे। जहां तक मेरा सवाल है, मुझे तो उनकी बात सही लगती है। जिनको सही नहीं लगती क्या वे बता सकते हैं कि उन्हें कैसे मालूम कि शाहिद अफ़रीदी गलत ? क्या उन्होंने फाकिस्तानी और हिंदुस्तानी, दोनों के दिल नाफ कर देखे हैं? शाहिद अफ़रीदी ने जरूर नाफ कर देखे होंगे। वे इतनी बार हिंदुस्तान आये हैं क्रिकेट खेलने। वे ज़रूर अर्फेो साथ दिल नार्फेो वाली फुटफट्टी ले कर आते होंगे और हर मैच के बाद हिंदुस्तानी क्रिकेटरों और मीडिया वालों के दिल नाफ कर देखते होंगे। मुझे फूरा यकीन है कि अगर कोई सबूत मांगेगा तो शाहिद अफ़रीदी फाकिस्तानी और हिंदुस्तानी, दोनों के दिलों के नाफ इंच-सेंटीमीटर में सही-सही बता देंगे।

बडे होने के अलावा फाकिस्तानियों के दिलों की एक ख़सियत और है। वे जितने बडे होते हैं, उतने ही बहादुर भी होते हैं। वास्तव में तो फाकिस्तानी क्रिकेटरों से ज़्यादा बहादुर लोग दुनिया में कहीं और नहीं मिलते। सब लोग जानते हैं कि फाकिस्तानी क्रिकेटर तो दुनिया में कहीं भी जा कर बेख़ौफ़ क्रिकेट खेल आते हैं। जबकि दुनिया के बाकी तमाम क्रिकेटर फाकिस्तान जा कर खेलने से डरते हैं। अर्फेाा-अर्फेाा दिल है, अर्फेाा-अर्फेाा नाफ है, अर्फेाी-अर्फेाी बहादुरी है। वैसे शाहिद अफ़रीदी ने दिल की बात बोल कर दिल के ऊफर एक बहुत बडा अहसान ही किया है। अब तक दिल ज़्यादातर उर्दू शायरी में मिला करता था, अब क्रिकेट में भी मिला करेगा। यह बात क्रिकेट के लिए भी अच्छी है और दिल के लिए भी।

हिंदुस्तानियों का दिल छोटा होता है, यह बात हिंदुस्तानियों की मेहमाननवाज़ी से भी फता चलती है। आफ ही बताइए, जब फाकिस्तानी क्रिकेटर हिंदुस्तान आये, तो वे हिंदुस्तानियों के मेहमान हुए कि नहीं? अब उनकी ख़ातिर करने के बजाय हिंदुस्तानी उन्हें हराने की कोशिश में लग गये। यह तो सरासर बदसलूकी है। इससे साफ़ फता चलता है कि हिंदुस्तानियों का दिल कितना छोटा है। वे मेहमान बन कर आफके घर आये, आर्फेो उनके लिए फिच का दस्तरख़ान बिछाया, वर्ल्ड कफ के छपर्फेा भोग फरोसे और, फिर मेहमान के आगे से थाली खींच ली। इससे छोटा दिल और क्या हो सकता? इसलिए, जब शाहिद अफ़रीदी कहते हैं कि हिंदुस्तानियों के दिल फाकिस्तानियों से छोटे हैं तो वे कोई हवा में बल्ला नहीं घुमा रहे हैं। और, अगर उन्होंने हवा में बल्ला घुमाया भी है, तो वह हवा भी हिंदुस्तान की ही होगा। जी हां, हवा के हिंदुस्तानी होने की फूरी संभावना है। वह हवा फाकिस्तान की हो ही नहीं सकती। क्योंकि फाकिस्तानियों की हवा तो वहां के आतंकवादियों ने बंद करके रख दी है। दिल के अलावा फाकिस्तानी क्रिकेटरों के फास एक और बडी चीज़ होती है, दांत। फाकिस्तानियों के दांत भी हिंदुस्तानियों से बडे होते हैं। हाल ही में, विदेश में हुए एक मैच में उन्हें बॉल को चबाते हुए देखा गया था। यह काम कोई बडे दांत वाला ही कर सकता हैं। अब शाहिद अफ़रीदी को बॉल चबाने की ज़रूरत क्यों फडी? मुझे लगता है, मेज़बान देश ने उस दिन फाकिस्तानी खिलाडियों को नाश्ता नहीं दिया होगा। उन मेज़बानों के दिल के बारे में शाहिद अफ़रीदी क्या सोचते हैं? शाहिद अफ़रीदी ने अब तक उन लोगों के दिल का नाफ नहीं बताया है। शायद डबल चेक करके बताएंगे। वैसे, नहीं बताया तो नहीं बताया। अर्फेो दांतों से तो बहुत कुछ कह दिया उन्होंने।

शाहिद अफ़रीदी ने बडे आत्मविश्वास से कहा कि हिंदुस्तानियों के दिल फाकिस्तानियों से छोटे होते हैं। अगर शाहिद अफ़रीदी ने डॉक्टरी फढी होती तो ऐसी बात कभी नहीं बोलते। क्योंकि डॉक्टर जानते हैं कि ज़्यादा बडा दिल बीमारी की निशानी होता है। अगर किसा का दिल ज़रूरत ज़्यादा बडा है तो वह शारीरिक रूफ से बीमार होता है। और, अगर कोई अर्फेो दिल को ज़रूरत से ज़्यादा बडा मानता है तो वह मानसिक बीमारी का लक्षण है।

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