अब श्रवण कुमार कहां?

विज्ञान युग में मानव स्वार्थी बन गया है। घर, घर नहीं रहे। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं। मानव की मानवता कम हो रही है। ऐसी सामाजिक स्थिति में घर के बड़े-बूढ़े लाचारी का जीवन जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 1999 को अंतराष्ट्रीय वयोवृद्ध लोगों का वर्ष घोषित किया था। भारत ने सन् 2007 में कानून बनाया। उम्र की 60 वर्ष की आयु पार करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को संख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में चौथा स्थान है। कुछ वर्षों में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर होगा।

बुढापा व्यक्ति की विवशता होती है। कोई बुढ़ापे को नहीं चाहता मगर बुढ़ापा आता ही है। और उसे सहना, भोगना पड़ता ही है। बुढ़ापा व्यक्ति को निष्क्रिय बना देता है। जैन समाज के तेरापंथ के नवम आचार्य अणुव्रत अनुशास्ता गणाधिपति श्री तुलसी ने कहा था-

‘‘ई दुनिया री मोटी दुविधा मौत और बुढ़ापे।
भारी दुख वस्था में खोवै अपणो आपो॥
इंद्रंया हीण खोण तनशक्ति, हाथ-पैर सब कापैैं।
चलता श्वास फूल ज्यावै हाल्यां सो सीनै कापै॥’’

प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञजी कहते थे, बुढ़ापे से दोस्ती करो। जो सदा प्रसन्न रहता है वह बुढ़ापे से घबराता नहीं, अपितु उसका भी स्वागत करता है। निराशा, चिंता और मानसिक कुंठा से बुढ़ापा जल्दी आता है।

जोवण जोश होश सब हरसी।
जब बुढ़ापो कष्ठ पकड़सी॥

मानसिक स्तर पर बुढापे की परिभाषा है। चिंता, तनाव, आवेश, चिड़चिड़ापन, उत्साह और निराशा का जीवन जीना। यदि बुढ़ापे का भय मिट जाए और यह बात समझ में आ जाए कि बुढ़ापे का भी आनंद होता है, तो बुढ़ापा कष्टदायी नहीं होता। बुढ़ापे को रोका जा सकता है बशर्ते कि आदमी जागरूक रहे। खान-पान, सयंम, नियमित योगासन और बुढ़ापे के साथ मैत्री के प्रयोग से एक सीमा तक बुढ़ापे को रोका जा सकता है। जो व्यक्ति विचारों का आग्रह नहीं करता, अस्थियों में अकड़न नहीं होने देता, पृष्ठ रज्जु को लचीला बना कर रखता है, तनाव मुक्त रहता है और निषेधात्मक भावों से बचकर रहता है उस व्यक्ति के मन पर कभी बुढ़ापा नहीं उतर सकता। जहां उत्साह है, श्रम है, कल्पना है वहां बुढ़ापा नहीं है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों का विचार किया गया है। रेलवे, बस, वायुयान के किरायों में उन्हें रियायत दी गयी है। आय कर, व्यवसाय कर, स्वास्थ्य सेवा में छूट, अधिक ब्याजदर, रेलवे आरक्षण में अलग कतार, श्रावण बालक और अन्नपूर्णा योजनाओं में भी सीनियर सिटीजन्स को प्राथमिकता दी है।

महाराष्ट्र में दो हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिक संघ है, जिनके करीब दस लाख सदस्य हैं। ये संघ आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य पोषण, आहार, निवास, कल्याण योजना तथा संवेदनशील समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को नवऊर्जा देने वाले नानानानी पार्क जगह-जगह बन रहे हैं। जहां उन्हें स्वयंसेवकों में भावनात्मक आधार मिलता है।

मुंबई निवासी 92 साल के गोविंद तथा भाऊसाहब परब पिछले पांच वर्षों से मैराथन प्रतियोगिता में चार से पांच किलोमीटर दौड़कर युवकों जैसा उत्साह दिखाते हैं। डोंबिवली के सुरेशचंद्र जोशी ने सारी जिंदगी डाकखाने में नौकरी की, लेकिन अब 78 वर्ष की आयु में 111 कविताओं का काव्य संग्रह तैयार किया तथा 103 कार्यक्रम काव्यपठन के किए और जिंदगी का एक अलग आनंद लिया। लार्सन और टुब्रो कंपनी में इंजीनियर के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद अनंत आपटे जीने सात किताबें लिखीं।

आज विज्ञान युग में मानव स्वार्थी बन गया है। माता-पिता को वृद्धावस्था में वृद्धाश्रम में भेजने वालों की तादाद बढ़ रही है। बालक श्रवण अपने कंधे पर माता-पिता को कांवर में बैठाकर यात्रा पर ले गया था। अब ऐसे बालक श्रावण कहां हैं?

कहा जाता है-भूतकाल में जीनेवाला बूढ़ा, भविष्य के रंगो में रंगने वाला बालक और वर्तमान में जो जीता है, वह युवक। अपनी उम्र भूलकर, चरैवित चरैवित अर्थात् चलते रहो, चलते रहो, तो बुढ़ापे से मैत्री होगी।

सभी वरिष्ठ नागरिक सुखमय जीवन जीना चाहते हैं वे परस्पर सहयोग से जिएं। एक मेल के सुख:दुख में शामिल हों। एक दूसरे को समझें और संभालें अपनत्व से वरिष्ठ नागरिक परिवार में शामिल हों। हरेक के गुणों को समझों बुराई की ओर ध्यान न दो। अंह भाव को छोड़ो।
संत कबीरदास ने कहा है-

‘‘मैं मैं मैं बकरी कहे, गले छुरी किरवाय।
मैना मैना मैना कहे, सबके मनको भाय॥’’

‘‘वरिष्ठ नागरिकों साथ रहिए, साथ सोचिए, और साथ-साथ कार्य करिए’’ इन विाचारों को समझकर अपना जीवन सुखमय बनाएं। जीवन में सकरात्मक दृष्टि (पाजिटिव थिकिंग) सफलता दिलाती है। महाराष्ट्र भूषण कवि श्री मंगेश पाउंगावकर कहते हैं-

सांका कसं जगायंच?
कण्हत कण्हन की गाणं म्हाणन?
तुम्हीच ठरवा।

समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। वह आता है और चला जाता है। हम जागरूक रहकर स्वयं को जाने-पहचाने और सुखी रहें। ‘कावाय तस्मै नम:।’ कहीं कहना, कहीं सहना और शांति से रहना इस सूत्रो को अपनाने वाला व्यक्ति अच्छा जीवन जी सकता है।

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