संगीत है तो मैं हूं और मैं हूं तो संगीत है- शंकर महादेवन

 

‘हिंदी विवेक’ द्वारा आरंभ आत्मनिर्भर भारत वीड़ियो सीरिज के अंतर्गत बार खास वेब-भेंटवार्ता हैं प्रसिद्ध गायक-संगीतकार शंकर महादेवन से। उनसे संगीत की दुनिया के अलावा, उनके परिवार, आने वाले युवा गायकों, उनकी गीता पर महत्वाकांक्षी संगीत परियोजना आदि संगीत क्षेत्र के विभिन्न विषयों पर हुई अंतरंग बातचीत के कुछ सम्पादित महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत हैं-
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आप संगीत क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। आपके लिए संगीत क्या है?

जब से मैं पैदा हुआ हूं मेरे संगीत ने मेरे साथ जन्म लिया है। संगीत एक्सटेंशन फॉर मी… मैं और संगीत अलग है ऐसा नहीं कह सकते। हम दोनों एक ही हैं और अगर संगीत है तो मैं हूं और संगीत है तो मैं हूं; क्योंकि मुझे नहीं लगता मैं संगीत के बिना कुछ हूं तो मेरा एक्सटेंशन संगीत है।

क्या यहीं वजह है कि आपने इंजीनियरिंग छोड़कर संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई?

जी हां, मैं बहुत ही सर्वसाधारण मध्यम वर्गीय परिवार से जुड़ा हूं। जहां पर बहुत उच्च विचार है। ‘सामान्य रहन-सहन, उच्च विचार’ को माना जाता है। हमारे घर में सभी शिक्षा को काफी महत्व देते हैं। यही वजह है कि मैंने इंजीनियरिंग की शिक्षा ली। आमतौर पर आपने देखा होगा कि दक्षिण भारतीय लोगों का शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित होता है। मेरे घर पर भी कुछ ऐसा हो माहौल था। जो करना है वह करो; लेकिन अपनी पढ़ाई पूरी करो… एक पढ़ालिखा आदमी और एक बिना पढ़ालिखा आदमी में फर्क आपको तुरंत दिखाई देता है। मैंने भले ही इंजीनियरिंग की; लेकिन दिल के अंदर एक ख्वाहिश थी कि कभी ना कभी मैं संगीत के क्षेत्र में कुछ कर दिखाऊं। मेरे अंदर एक जुनून था। इसके बाद मैंने सोचा कि मुझे संगीत क्षेत्र में अभी कोशिश करनी चाहिए, अन्यथा ऐसा होगा कि मैं 50-60 साल का हो जाऊंगा और उसके बाद मैं अपने आपसे सवाल करूंगा कि मैंने संगीत क्षेत्र में कुछ करना चाहिए था और मैंने नहीं किया। आपको अपने जीवन में ऐसे बहुत लोग कहते हुए मिला जाएंगे कि मुझे अभिनय करना चाहिए था… मुझे नर्तन करना चाहिए था… मुझे गायक बनना चाहिए था… मैंने इस तरह की सोच नहीं रखी। मैंने हमेशा कोशिश की; हुआ तो हुआ, नहीं हुआ तो आगे देखा जाएगा और अब जब मैं अपने जीवन को मुड़कर देखता हूं तो मुझे इस बात का अहसास होता है कि मैंने खुद अपने करियर को चुना और मैंने ऐसा कर कुछ गलत नहीं किया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बावजूद आपके परिवार वालों ने आपको संगीत क्षेत्र में करियर बनाने की अनुमति दी। आप अपने बेटे के बारे में क्या सोचते हैं?

मैं आपको बता दूं कि वर्तमान पीढ़ी काफी होशियार है। बहुत तेज है। उन्हें पता है क्या करना चाहिए और क्या नहीं। मैं अपने परिवार के लिए हमेशा समय समय निकालता हूं। मेरे लिए मेरा परिवार सबसे महत्वपूर्ण है। संगीत, फेम, नाम और पैसा ये बाद में आता है। मैंने अपने बच्चों से हमेशा कहा है कि मैं संगीत के क्षेत्र काम कर रहा हूं तो आपको भी इसी में अपना करियर बनाना चाहिए ऐसा बिलकुल भी नहीं है। मैं किसी को जबरदस्ती नहीं करता। लोग कहते हैं, ‘देखो आपके पापा कितना अच्छा गाते हैं। आप भी गाओगे ना ऐसा?‘ लेकिन मुझे यह पसंद नहीं है। मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ मेरे बच्चों की तुलना हो। मुझे लगता है कि उन्हें अपनी एक अलग पहचान बनानी चाहिए। मैंने मेरे बच्चों को कभी भी कोई काम करने से नहीं रोका। अगर उन्हें स्पोर्ट्स में जाना है… उन्हें बिजनेस करना है… मैंने उन्हें हमेशा प्रोत्साहन दिया, मैंने उन्हें नहीं रोका। लेकिन मुझे यह बताते हुए काफी खुशी हो रही हैं कि मेरी तरह मेरे दोनों बच्चे भी संगीत में रुचि रखते हैं। संगीत के प्रति उनका ज्ञान बहुत अच्छा है। कई बार वे मुझे नई चीजों के बारे में जानकारी देते हैं। बाजार, नए वाद्य, नई तकनीक क्या है यह मुझे बताते हैं। ऐसे समय मैं अपने बच्चों से बहुत कुछ सीखता हूं।

आपको कैसा लगता है जब आपके बच्चे आपको सीखते हैं?

एक तरह का भाव उभरता है कि धन्य हैं; क्योंकि एक बाप को इससे ज्यादा खुशी कभी महसूस नहीं हो सकती जब वह अपने बच्चों से दोस्त की तरह व्यवहार करें, उनके साथ बातचीत कर सके, स्टेज पर उनके साथ गाना गा सकें। मैं आपको बता दूं कि मैं कभी-कभी स्टेज पर सोलो परफॉर्मेंस देता हूं तभी दर्शकों को बताता हूं कि मैं जो अगला गाना गा रहा हूं वह मेरे बेटे ने गाया है और आज मैं आपको सुना रहा हूं। ये जो भाव है वह एक अजीब किस्म का होता है। इंडस्ट्री में अक्सर आपने देखा होगा कि पिता के गाने बेटा गाता है लेकिन मेरे परिवार के साथ उल्टा है। मैं जब ‘भाग मिल्खा भाग’ का गाना गाता हूं तो मैं लोगों को बताता हूं कि ये गाना मेरे बेटे ने गाया है और आज मैं आपको सुनाता हूं। मुझे लगता है कि यह भगवान का ही आशीर्वाद ही है।

देखिए संगीत एक बहुत ही सशक्त माध्यम है संवाद का। संगीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बना है। संगीत का जो उद्देश्य है वह मनोरंजन के अलावा बहुत बड़ा है। दुनिया में अगर कोई चीज ऐसी है जिसको कोई जाति, कोई धर्म, कोई सीमा, कोई देश नहीं रोक पाया है तो वह संगीत ही है। किसी व्यक्ति का, किसी भाषा का, किसी देश का संगीत अगर आपको अच्छा लगा है तो आपके दिल को छू जाएगा, इसे रोका नहीं जा सकता। संगीत किसी भी देश के साथ संवाद का अच्छा माध्यम है। मुझे लगता है संगीत के माध्यम से भारत की संस्कृति को बाहरी देशों में प्रस्तुत करना चाहिए। अगर आप भारतीय संगीत को सही तरीके से दुनिया भर में प्रस्तुत करते हैं तो कमाल हो जाएगा।

वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करने के लिए संगीत के क्षेत्र में काम कर रहे हैं लोगों की क्या जिम्मेदारी है ऐसा आपको लगता है?

हमारे देश में हर मौके के लिए गाना बना हुआ है। फिर चाहे जन्मदिन हो या मृत्यु दिन… शादी हो या विदाई… हर अवसर के लिए गाने हैं। हर प्रांत का अपना एक लोकगीत है। भारत के पास हजार साल पुराना खजाना है। अगर भारतीय संगीत को हम वैश्विक स्तर पर लेकर जाए तो बहुत ही अच्छा होगा। संगीत भारत को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाएगा।

हिंदी के अलावा आपने अन्य कई भाषाओं में गीत गाए हैं। आप स्वयं दक्षिण भारतीय हैं। हर भाषा के संगीत का एक अलग अंदाज और लहजा होता है। उसे आत्मसात करने में आपको कितना समय लगता है?

काम करने के साथ एक आदत बन जाती है। मैंने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन की दुनिया से की थी। इसमें किसी एक भाषा में डब किए गए गाने को हम मराठी, गुजराती, कन्नड, मलयालम, उड़िया, असमी, पंजाबी और बंगाली भाषाओं में डब करते थे। ये सारा काम मुंबई में होता था। जब आप किसी विज्ञान को किसी भाषा में डब करते हैं तो उसका लहजा बहुत स्पष्ट होना चाहिए। मैं इन सभी भाषाओं में पहले से ही गाता था। विज्ञापन उद्योग में काम करते हुए मुझे सभी भाषाओं में गाने की आदत हो गई थी। जब मैंने गाना, गाना शुरू किया तब भगवान के आशीर्वाद से मुझे हर भाषा में गाना गाने का मौका मिला। हिंदी, मराठी, तमिल, कन्नड भाषा में तो मैं गाना गाता ही रहता हूं। जितने मेरे हिंदी में गाने हैं उससे कई ज्यादा मेरे तेलुगु, तामिल, मलयालम में हैं। आप जब काम करते हैं तब आपके अंदर एक विद्यार्थी होना चाहिए, आपको सीखने की इच्छा होनी चाहिए। इससे आपकी राह आसान हो जाती है।

आपने कई भाषायओं में गाने गाए हैं लेकिन आप कितनी भाषाएं बोल पाते हैं?

मैंने भले ही कई भाषाओं में गाने गाए हैं, लेकिन वे भाषाएं मैं बहुत कम बोल पाता हूं। टूटी फूटी हिंदी बोलता हूं, इंग्लिश आती हैं, मुझे तमिल, मराठी बोलनी आती है। बाकी भाषाएं मुश्किल लगती हैं।

आपको किसी भाषा में जब गाना, गाना हो तब संगीत निर्देशक पहले आपको गाने का मतलब बताते होंगे?

भारत देश की खासियत यह है कि हर 200 मीटर पर लोगों की भाषा में आपको बदलाव दिखेगा। लोकगीत वाली कन्नड अलग है, शहर वाली कन्नड अलग है। आप अगर खेतों के तरफ जाएगे तो वहां अलग ही कन्नड मिलेगी। सिर्फ कन्नड ही नहीं; बल्कि मराठी में भी आपको कई बोलियां मिल जाएंगीं। शहर और गांव की बोलियां एक दूसरे से काफी अलग होती हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि हमेशा विद्यार्थी बने रहो।

संगीत के क्षेत्र में आपने काफी नाम कमाया हैं इसके साथ ही आपने मराठी फिल्म ‘कट्यार काळजात घुसली’ से एक्टिंग डेब्यू भी किया है। दर्शक एक बार फिर से आपको बड़े पर्दे पर अभिनय करते देखना चाहते हैं। इस बारे में आपकी क्या योजना है?

मेरे लिए मराठी फिल्म ‘कट्यार काळजात घुसली’ काफी स्पेशल थी। इस फिल्म में निभाया हुआ मेरे किरदार भी काफी स्पेशल था। फिल्म निर्देशक सुबोध भावे ने बड़े प्यार से मुझे ये रोल ऑफर किया था। मैंने जब ये फिल्म साइन की तब मैं नहीं जानता था कि मैं एक्टिंग कर पाऊंगा की नहीं। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो काफी पसंद की गई। मुझे एक्टिंग में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। इसके बावजूद अगर अच्छी फिल्म, अच्छा किरदार मिलता है तो जरूर करूंगा।

कोरोना काल में आपने क्या कोई नई चीज की है?

हमने पिछले चार महीनों बहुत काम किया है। इस दौरान हमने कई गानों की रिकॉर्डिंग की, नए गाने क्रिएट किए, बच्चों के साथ हमने कई गानों की रिकॉर्डिंग की, कई गानों को कंपोज किया, ऑनलाइन कई शो का हिस्सा बने और कोरोना काल के दौरान मुझे जितना समय मिला मुझे मेरे जिंदगी में नहीं मिला। इससे पहले मैं लगातार काम के चलते बहुत व्यस्त हुआ करता था। मैंने एक जगह से लेकर दूसरी जगह सफर करता रहता था। कोरोना काल में मुझे जो वक्त मिला इसमें मैंने अपने बारे में सोचा, कुछ नया क्रिएट करने का मौका मिला, कंपोज करने का समय मिला और इस दौरान मैंने ऐसी चीजें की जोकि आम जीवन में मुझे कभी करने का मौका नहीं मिलता।

आप, एहसान और लॉय के साथ मिलकर म्यूजिक को कंपोज करते हैं। इस दौरान तीनों की बॉन्डिंग किस तरह की होती है? क्योंकि आप हमें काफी अलग और इमोशनल दिखाई दिए?

हम तीनों एक दूसरे से काफी अलग है, हम तीनों अलग-अलग पर्सनालिटी के हैं, हम तीनों का म्यूजिकल चॉईस अलग है, हमारा स्वभाव अलग है, हम तीनों अलग-अलग होकर भी एक हैं। हम तीनों एक जैसे होते तो शायद हम साथ नहीं होते और पूरा मामला बिगड़ जाता। हम सिचुएशन को जब तीन अलग-अलग नजरिए से देखते हैं तो उसमें से कुछ और निकल आता है जोकि बहुत खास होता है। हम तीनों सिर्फ एक दूसरे के साथ काम नहीं करते बल्कि एक दूसरे का सम्मान भी करते हैं। हम तीनों में झगड़ा होता है तो हम ये कभी नहीं कहते हैं कि नहीं करना है एक दूसरे के साथ काम, हम हमेशा कुछ बड़ा करने की सोचते हैं। हम तीनों रोज लड़ते हैं इसके बावजूद हम एक परिवार की तरह काम करते हैं। इस परिवार में प्यार और एकता बनाए रखने के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है। हम तीनों का रिश्ता पति-पत्नी जैसा है। आपको अपनी शादीशुदा जिंदगी बनाए रखनी है तो आपको इस पर काम करना होगा। आप सिर्फ एक दूसरे के साथ बैठे हैं, बात नहीं कर रहे हैं तो ये रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। पाटर्नरशिप में भी ऐसा ही होता है।

आपने पाटर्नर एहसान और लॉय के साथ मिलकर मराठी गाना ‘तरुण आहे रात्र अजून’ गाने को रिक्रिएट किया है। इस बारे में क्या कहेंगे?

जी हां, इस गाने को हृदयनाथ मंगेशकर ने खुद रिक्रिएट करने को कहा था। उनका मुझे फोन आया था पंडित जी ने मुझे आग्रह किया कि ‘तरुण आहे रात्र अजून’ गाने को नए अंदाज में रिक्रिएट करिए। हृदयनाथ मंगेशकर ने मुझसे बात करते हुए कहा कि आपके सोचने के तरीका अलग हैं। आप इस गाने को रिक्रिएट करेंगे क्या? इसके बाद मैंने जवाब में कहा कि आपके लिए सबकुछ। मैं आपको बता दूं, मैं पंडित जी का बहुत बड़ा फैन हूं और उन्हें मैं अच्छी तरह से जानता हूं।

‘तरुण आहे रात्र अजून’ इस गाने में आपने दर्शकों के लिए क्या नयापन डाला?

कम्पोजीशन बना हुआ था। इसमें तबला जैसे इन्स्ट्रुमेंट का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन जब हमने इस गाने को रिक्रिएट किया तब हमें उसके कोड चेंज किए, उसके अरेंजमेंट चेंज किए, गाने का म्यूजिक प्रोडक्शन चेंज किया। इस गाने के साथ ही हमने दर्शकों के सामने कुछ नया पेश किया।

आजकल हर पुराने गानों को रिक्रिएट किया जा रहा है। क्या आपको यह सही लगता है?

मैं इसके खिलाफ हूं। 10 साल के बाद अगर हृदयनाथ मंगेशकर जैसे व्यक्ति आपको फोन कर बोलते तो जरूर करना चाहिए। लेकिन हर फिल्म में एक पुराना गाना लेकर उसका खराब रिमेक्स करना गलत है। पुराने का रिमेक्स देखकर आपको यह लगे कि वो पुराना गाना कितना अच्छा था। यह जो तरीका है इसके मैं खिलाफ हूं। मुझे सिर्फ उन लोगों को सवाल करना है कि क्या आपको अपने म्यूजिक कंपोजर पर भरोसा नहीं है? आपने अगर अपनी फिल्म के लिए किसी म्यूजिक कंपोजर को साइन किया है तो उन्हें फिल्म के लिए ओरिजनल गाना बनाने दीजिए। हाल ही में वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट्स’ रिलीज हुई है। दर्शक इस वेब सीरीज को काफी पसंद कर रहे हैं। ‘बंदिश बैंडिट्स’ के लिए मैंने नया ओरिजनल म्यूजिक क्रिएट किया है। इसमें शास्त्रीय संगीत, ठुमरी, दादरा, भजन, फोक म्यूजिक हैं। ये सब ओरिजनल है। मैंने ‘बंदिश बैंडिट्स’ के लिए नई बंदिश, नई ठुमरी, नया भजन, नया विरह रस सब मैंने नया बनाया। इसमें तो खुशी मिलती हैं कंपोजर को। अन्यथा आप फिल्म के लिए क्यों कंपोजर साइन करते हैं?

वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट्स’ के लिए आपने ठुमरी और बंदिश जैसी कई चीजें कंपोज की हैं। इसके लिए आपने दिन में कितना रियाज किया?

हमारा रियाज दिन भर दिमाग में चलता रहता है। 24 घंटे दिगाम में रियाज चलता रहता है। हम हर समय कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं। कुछ ना कुछ क्रिएट करते रहते हैं। सुर का मामला है। दिमाग का एक हिस्सा लगातार इस बारे में सोचता रहता है।

जब हमने आपको सुना तो ऐसा बिलकुल नहीं लगा कि बिना गले की रियाज के आपने गाना गाया है?

मां सरस्वती का आशीर्वाद है! उनके बिना कुछ हो नहीं सकता। आप कितना भी रियाज करो या फिर रियाज मत करो, आप पर अगर मां सरस्वती की कृपा नहीं है आप कुछ नहीं कर सकते।

रियलिटी शो और संगीत महोत्सव इसमें आपको क्या फर्क महसूस होता है?

संगीत रियलिटी शो युवाओं को आगे बढ़ने का मौका देता है। यह एक अच्छा प्लेटफार्म है। आज की तारीख में अगर एक युवा को संगीत में करियर बनाना हैं तो उनके लिए यह एक अच्छा माध्यम है। किसी गायक को गाना गाना है उसे पता ही नहीं होता कि उसे क्या करना है। गायन में आगे बढ़ना है तो वह सोच तो सकता है कि वह रियलिटी शो का हिस्सा बनकर आगे बढ़ सकता है। दूसरी बात यह भी कि ये जो बच्चे इन गायन रियलिटी शो में आते हैं तो वे पहले से ही सुपरस्टार बन जाते हैं। उनके दिल में यह गलतफहमी होती हैं कि मैं कभी सुपरस्टार बनूंगा। मैं इन बच्चों से कहता हूं कि आप पहले से सुपरस्टार हो, आप जानते हो कि शो खत्म होने से पहले सभी लोग आपके नाम के साथ आपको पहचनाने लगते हैं मानो वह बच्चा उनके घर का बच्चा हो। रियलिटी शो खत्म होने के बाद उनका काम शुरू होता है। अपने स्टारडम को बनाए रखने के लिए खूब मेहनत करो। अपने टैलेंट को वे दर्शकों के सामने किस तरह से लाते हैं यह उन पर निर्भर करता है।

संगीत रियलिटी शो से आगे आए क्या ऐसे कुछ गायक हैं, जिन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग जगह बनाई हो?

15 साल पहले गायक अरिजीत सिंह आए थे। लेकिन अरिजीत तो पब्लिक वोटिंग से बाहर निकल गया था। फिर भी वह अपनी मेहनत से आगे बढ़ा। श्रेया घोषाल भी इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा भी मैथिली ठाकुर, प्रतिभा सिंह बघेल जैसे नाम हैं। हमने कई रियलिटी शो के गायकों को आगे बढ़ने का मौका दिया है।

भारत के अलावा आप दुनियाभर में कई कार्यक्रम करते हैं। इस दौरान आपको भारत की प्रतिमा में कुछ बदलाव महसूस होता है?

बहुत बहुत बदलाव आया हैं… हम जैसे ही दूसरे देशों में उतरते हैं, वहां हमारा दिल से स्वागत किया जाता है। वे हमारा सम्मान करते हैं, हम सिर उठाकर चल सकते हैं कि हम भारत से हैं। हमें शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। जिस तरह से हमारा भारत तरक्की कर रहा है इस पर हमें गर्व है। मुझे बताते हुए भी गर्व महसूस होता है कि मैं भारत से हूं।

आपको भारत में किस तरह का बदलाव नजर आता है?

भारत तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ रहा हैं। टेक्नोलॉजी से लेकर लोगों के विचारों तक में काफी बदलाव हो रहा है। अपने देश को गाली देना बहुत आसान है लेकिन मैं आपको बता दूं भारत जैसा देश पूरी दुनिया में नहीं हैं।

संगीत के क्षेत्र में अभी ऐसी कौनसी पहलू है जिसमें आप परिवर्तन लाना चाहते हैं?

मैं भारत सरकार से बात करने वाला हूं, हमारी जो ये संस्कृति है, हमारे देश के पास जो एक संगीत खजाना है उसे आगे बढ़ाया जाए। मुझे यह बताते हुए काफी दुख होता है कि हम हमारे ही संगीत का आदर नहीं करते। हमें इसका आदर, उसकी रक्षा और प्रसार करने की जरूरत है। हमारे वेदों से लेकर भगवद् गीता में भी संगीत का उल्लेख है। मैं बता दूं, भगवत गीता पर हमारे देश में एक भी म्यूजिकल प्रोजेक्ट नहीं। मेरे मन में ख्याल आ रहा है कि गीता में अगर 300 श्लोक हैं तो मुझे इन्हें 300 गायकों से गवाना चाहिए और मुझे उम्मीद है कि यह देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। 300 गायकों से अगल-अलग राग, रागिनी गवाकर मैं इस देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बनाना चाहता हूं। इसके लिए मुझे भारत सरकार समर्थन दें, लोग मुझे समर्थन दें।

आपने अपने करियर में कई अलग-अलग संगीतकारों के साथ काम किया है। जब उनका बनाया हुआ संगीत आप गाते हैं तो आपके दिमाग में क्या चल रहा होता है?

जब मैं किसी गीतकार का गाना गाता हूं तो मैं अपने अंदर के कंपोजर को घर छोड़कर जाता हूं। चुपचाप एक गायक की तरह जाता हूं और गाना गाता हूं। लेकिन कई कंपोजर ऐसे भी होते हैं जोकि मेरे सुझावों सजेशन का स्वागत करते हैं।

अपने अपने करियर में कई अवार्ड अपने नाम किए हैं, सबसे ज्यादा खुशी किस अवार्ड से हुई है?

मैंने अब तक जितने अवार्ड पाए हैं उन सभी में मुझे खुशी दी है। लेकिन मेरे लिए वह अवार्ड सबसे बड़ा है जब एयरपोर्ट पर पोछा लगाने वाला इंसान आपसे कहता है कि आपका गाया ‘मां’ वाला गाना हमें बहुत पसंद है और हम परिवार के साथ बैठकर आपका गाना सुनते हैं। उनका यह कहना मेरे लिए सबसे बड़ा अवार्ड है।
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