पैसा और प्यार

कहा जाता है कि पैसे से प्यार नहीं खरीदा जा सकता। ज़ाहिर है यह प्यार का विचार है। पैसा इस बारे में क्या सोचता है, यह जानने के लिए मैंने पैसे बात की –

मैं : पता है, लोग कहते हैं कि पैसे से प्यार नहीं खरीदा जा सकता।
पैसा : फिर किस चीज़ से खरीदा जा सकता है?
मैं : नहीं-नहीं, प्यार बेचा नहीं जाता।
पैसा : जब बेचा नहीं जाता तो खरीदने का सवाल क

हां से आया? वैसे दुनिया में जो भी चीज़ बिकती है, वह पैसे से खरीदी जा सकती है।
मैं : नहीं-नहीं, तुम मेरा मतलब नहीं समझे।
पैसा : क्या नहीं समझा? तुम पैसे को मत समझाओ। पैसा सब समझता है।
मैं : देखो, कहने का मतलब यह है कि पैसे से सच्चा प्यार नहीं खरीदा जा सकता।
पैसा : सच्चा प्यार मतलब? प्यार में डुप्लिकेट माल भी मिलता है ?
मैं : तुम बात को गलत दिशा में ले जा रहे हो। सच्चा प्यार, प्यार के बदले में प्यार मांगता है, पैसा नहीं!
पैसा : यानी आदमी अपना प्यार देता है और बदले में दूसरे का प्यार लेता है। तब तो दूसरे के प्यार की कीमत ज़रूर ़ज़्यादा होती होगी।
मैं : नहीं भाई, प्यार में एक-दूसरे का मूल्य नहीं देखा जाता। प्यार का मूल्य समान होता है।
पैसा : फिर प्यार के बदले में प्यार लेने से फ़ायदा क्या?
मैं : फ़ायदा मतलब?
पैसा : मैं समझाता हूं। तुम्हारे पास पांच रुपये का सिक्का है? … है! वैरी गुड! मेरे पास भी है। अब तुम अपना पांच का सिक्का मुझे दो, बदले में अपना पांच का सिक्का मैं तुम्हें देता हूं। अब, तुमने मुझे पांच दिये और मैंने तुम्हें पांच दिये। तुम बताओ, फ़ायदा किसे हुआ?
मैं : किसीको नहीं हुआ।
पैसा : नहीं! मुझे हुआ!! मेरा सिक्का खोटा था। अब तुम समझे, दुनिया में फोकट में कुछ नहीं मिलता। जो फोकट में मिलता है, वह भी फोकट में नहीं होता।
मैं : बात को इतना गोल-गोल घुमा कर मत बोलो। सीधा बोलो – क्या तुम यह कहना चाहते हो कि पैसा प्यार से बड़ा होता है ?
पैसा : बिलकुल होता है! अगर, भरोसा नहीं हो तो किसी ऐसे आदमी के पास जाओ जिसके पास प्यार भी है और पैसा भी। उससे प्यार मांग कर देखो, वह तुरंत सीना खोल कर देने को तैयार हो जाएगा। फिर, उससे पैसे मांग कर देखना। वह फ़ौरन मना कर देगा। अगर, किसी कारण से मना नहीं कर पाया तो कल आने को कहेगा। जब तुम कल जाओगे तो फिर कल आने को कहेगा। और, यह तो सारी दुनिया जानती है कल कभी आता नहीं। तो भैये, प्यार तो सब दे सकते हैं। पैसा हर कोई नहीं दे सकता!
मैं : अरे, तुम तो प्यार के ख़िलाफ़ इतने ज़ोर से बोलते हो!
पैसा : बोलूंगा क्यों नहीं। तुम भी तो फोकट में पैसे का महत्व कम कर रहे हो। और, जहां तक बोलने का सवाल है, तुमने वह गुजराती की कहावत नहीं सुनी क्या – पैसो बोले छे! पैसा ज़िंदगी में सब जगह बोलता है, फिर प्यार में क्यों नहीं बोलेगा ?
मैं : तुम कुछ भी बोलो, लोग प्यार में सब कुछ कुरबान कर देते हैं। पैसा भी!
पैसा : अरे, तुम तो सोलह साल की उम्र की बात कर रहे हो। उस उम्र में अक्ल कहां होती है कि कोई पैसे की कीमत समझे!
मैं : बड़े-बड़े लोग भी प्यार में सब कुरबान कर देते हैं।
पैसा : वे बस उम्र में बड़े हो जाते हैं, अक्ल में नहीं। अक्ल से सोलह के ही रहते हैं। आज के ज़माने में जो आदमी पैसे का महत्व नकारता है, उसे अपनी अक्ल की जांच करवानी चाहिए।
मैं : और, उस जांच में पैसा लगेगा।
पैसा : अब बात आयी तुम्हारी समझ में !!
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