फिल्मी दुनिया का सचिन

‘धूम 3’ का फर्स्ट लुक देखने के बाद आमिर खान और अभिषेक बच्चन पत्रकारों से मुखातिब हुए। कुछ छोटे-छोटे प्रश्नों के बाद एक प्रश्न किसी ने पूछ कि सचिन तेंडुलकर अपने 24 सालों के कैरियर के बाद निवृत्त हो रहे हैं। इस बारे में आपके क्या विचार हैं? हालांकि यह प्रश्न उन दोनों के लिये अनपेक्षित था फिर भी ‘फुलटास’ साबित हुआ। आमिर ने कहा उस बारे में कई बातें बताई जा सकती हैं। सचिन ने मारे हुए चौकों-छक्कों को देखकर कभी काम की थकान मिट गयी तो कभी उनके द्वारा लगाये गये शतकों के कारण मन आनंदित हो गया। सचिन ने अपने खेल से देश के नागरिकों को बहुत सुख दिया और अपने देश को एक खास पहचान भी दिलवाई। अभिषेक ने भी आमिर की इस बात से सहमत होते हुए कहा कि तीन वर्ष पूर्व हुए वर्ल्ड कप के श्रीलंका विरुद्ध भारत मुकाबले में जब सचिन बल्लेबाजी कर रहे थे तो मैं अपनी जगह से नहीं ऊठा। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे उठने से सचिन आउट हो जायेगा। वास्तविक रूप से ऐसा कुछ भी नहीं होनेवाला था परंतु इसके कारण सचिन के प्रति उनका लगाव स्पष्ट होता है। दुनिया के किसी भी देश में जाने पर उनकी लोकप्रियता का नमूना देखने मिला और हमारा देश उनके कर्तृत्व के कारण पहचाना जाता है इस बात का अभिमान भी हुआ।

‘फिल्मी दुनिया’ में सचिन तेंडुलकर का सर्वप्रथम दर्शन होने की याद को ताजा करने के लिये 23 साल पहले ‘फ्लैशबैक’ में जाना होगा।
मेहबूब स्टूडियो में विनय सिन्हा निर्मित और राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित ‘अंदाज अपना अपना’ का मुहूर्त आयोजित किया गया था। फिल्म में आमिर खान, सलमान खान, रवीना टंडन और करिश्मा कपूर मुख्य भूमिका में थे। अत: फिल्मी लोगों, पत्रकारों और फोटोग्राफरों की वहां भीड थी। जब फोटोग्राफर फ्लैश चमका रहे थे और पत्रकार छोटी-छोटी घटनाओं में भी खबरें ढूंढ रहे थे उस समय अचानक वहां एक मेहमान का आगमन हुआ और वह था सचिन तेंडुलकर। उसके आने से वातावरण में एक सुखद बदलाव आया। उनके आने के कारण खबरों का फोकस बदल गया। उनके आने के कारण आमिर, सलमा, करिश्मा और रवीना भी रोमांचित हो गये।

उनकी उपस्थिति के कारण फोटोग्राफर और पत्रकारों को भी बहुत आनंद हुआ। उस समय तक देश में टीवी समाचार चैनलों की संख्या अधिक न होने के कारण वहां ज्यादा भीड नहीं थी अत: इस क्षण का सभी ने आनंद उठाया।

उस समय सचिन तेंडुलकर पाकिस्तान से अपना पहला टेस्ट मैच खेलकर आया था। शुरू से ही उसके चारों ओर एक वलय और प्रसार माध्यमों का रुझान होने के कारण उसकी उपस्थिति ध्यान आकर्षित करने वाली रही।

जहां सचिन हो वहां गॉसिप मैगजीनवालों को चबाते रहने के लिये कोई न कोई मसाला मिल ही जाता है। वैसे तो ये लोग किसी के भी करीबी बन जाते हैं। किसी भी पारिवारिक कार्यक्रम में शिल्पा शिरोडकर और सचिन तेंडुलकर मिले और उनमें कुछ बातें हुईं तो तुरंत ये अफवाह फैल गई कि उनके बीच कुछ चल रहा है। तत्कालिन अखबारों ने तो जो उनके मन में आया वह लिख दिया। यहां तक कि इस चर्चा के बहाने उहोंने क्रिकेट खिलाडियों और फिल्मी अभिनेत्रियों के बीच हुए पुराने संबंधों को भी उजागर कर दिया। खार में शिल्पा शिरोडकर के घर पर हुई मुलाकात में जब मैंने इसके बारे पूछा तो उन्होंने कहा मैं और सचिन एक पारिवारिक कार्यक्रम में मिले उसे लेकर इतनी चर्चा क्यों? मेरे पिताजी रणजी क्रिकेट खेलते थे इसलिये हमारा क्रिकेट से भी संबंध रहा है। आदि…

लक्ष्मीकांत बेर्डे ने एक बार सचिन से संबंधित एक बहुत अच्छा किस्सा सुनाया। एक निजी कार्यक्रम में दोनों की मुलाकात हुई। सचिन ने लक्ष्मीकांत बेर्डे से कहा कि मैं अपने शालेय काल से आपकी हास्य फिल्मों का आनंद ले रहा हूं। फिर क्रिकेट के बीच से समय निकालकर कुछ फिल्में वीडियो पर देखीं तो कुछ थियेटर में। इससे बहुत आनंद मिलता है और तनाव कम होता है।

लक्ष्मीकांत बेेर्डे भी क्रिकेट के शौकीन थे सो वे भी कभी-कभी वानखेडे स्टेडियम पहुंच जाते थे या फिर सेट पर ही टीवी के माध्यम से ये शौक पूरा कर लेते थे। उसे क्रिकेट अभिनय करने के लिये टानिक की तरह लगता था।

मनमोहन देसाई भी क्रिकेट के दीवाने थे। उनके सेट पर भी टीवी हुआ करता था और वे रविवार को टेनिस बाल से क्रिकेट खेला भी करते थे। एक बार क्रिकेट विषय को लेकर लिये गये साक्षात्कार में उन्होंने जी भर कर बातें कीं। उस समय वे सचिन के बारे में भी दिल कोलकर बोले। उनके अनुसार सचिन की बल्लेबाजी और उनकी फिल्मों में एक समानता है। वह यह कि दोनों के ही कारण आम आदमी का भरपूर मनोरंजन होता है। किसी भी प्रकार की शंका को मन में न रखकर इनका भरपूर आनंद उठाना चाहिये। मनमोहन देसाई भरपूर बातें करते थे इसलिये उनसे मिलने में बहुत आनंद आता था।

संगीतकार लक्ष्मीकांत भी क्रिकेट के शौकीन थे। क्रिकेट के मौसम में किसी भी फिल्मी पार्टी में उनसे मुलाकात होने पर क्रिकेट की बात चलती ही थी। वे भी सचिन के प्रशंसक थे, इतने कि एक दिन उन्होंने मुझसे पूछ कि क्या मैं कुछ-कुछ सचिन जैसा दिखता हूं?
सचिन फिल्मी दुनिया में भी फैल चुका है।

एक बार सनी देओल की जबरजस्त मारधाड़ वाली फिल्म बाक्स आफिस पर आई और दूसरे ही दिन शारजाह में सचिन ने आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जमकर धुलाई की। घर बैठे इस तरह की शानदार धुलाई देखने के कारण दर्शक बाक्स आफिस तक गये ही नहीं और ‘जोर’ केवल खाली कुर्सियों ने ही देखी। फिल्म इतनी बुरी तरह पिटी कि फिर उठ नहीं पाई। इसके बाद यह प्रयत्न किया जाने लगा कि फिल्मों का प्रदर्शन क्रिकेट मैचों के कार्यक्रम के अनुसार तय किये जायें। यह सही भी था क्योंकि सचिन की शानदार बल्लेबाजी छोड़कर फिल्म देखने कौन जाता?

सचिन के लिये कुछ फिल्मों का खास प्रदर्शन भी किया जाने लगा। संदीप सावंत दिग्दर्शित और आस्कर मनोनीत मराठी फिल्म श्वास, तथा रवि जाधव द्वारा निर्देशित मराठी फिल्म नटरंग का खास उल्लेख किया जाना चाहिये। इससे मराठी फिल्म इंडस्ट्री में एक सुखकारक खबर फैल गयी कि सचिन मराठी फिल्में देखता है। सचिन ने भी अपने स्वभाव के अनुसार इन फिल्मों की जमकर तारीफ की। फिल्मों के सचिन अर्थात सचिन पिलगांवकर के आत्मचरित्र का प्रकाशन भी सचिन तेंडुलकर के द्वारा किया गया। इस अवसर पर अमिताभ बच्चन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को चार चांद लगा दिये।

सचिन पर एक मनोरंजक, मसालेदार और दर्शकों को संदेश देनेवाली फिल्म तो बन ही सकती है।
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