मध्य भारत भाजपा के साथ

2014 के लोकसभा चुनावों को लेकर देश के राजनीतिक परिस्थिति का जब हम आंकलन करते हैं,तब देश के बीच का हिस्सा महत्वपूर्ण बनकर सामने आता है. विशेषकर जब हम ‘मोदी लहर’ की बात करते हैं, तब तो इस हिस्से का आंकलन और भी महत्वपूर्ण हो जाता हैं।
गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, झारखण्ड, दादरा नगर हवेली और दमण, दीव का यह क्षेत्र 82 लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करता है। सन 2009 के चुनावों में इन 82 में से भाजपा ने 51 सीटें प्राप्त की थीं. भाजपा का पूरे देश भर से लोकसभा सीटों का कुल योग है 112। उनमें से 51 सीटें, भाजपा को देश के इस हिस्से ने दी है, इसलिए यह क्षेत्र भाजपा के लिए और भी महत्वपूर्ण हैं.

झारखण्ड

देश के मध्य के इस हिस्से में आने वाले सभी प्रदेशों में झारखण्ड बिलकुल अलग है। अपने स्थापना काल से ही यह राजनीतिक उथल-पुथल वाला राज्य रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री रहते हुए अलग झारखण्ड बनने का रास्ता साफ़ हुआ था और वनवासियों के वीर योध्दा, वीर बिरसा मुंडा के जन्मदिवस, 15 नवम्बर 2000 को यह अलग राज्य अस्तित्व में आया। राज्य के बनते समय यहां भाजपा के विधायकों का बहुमत था। अतः भाजपा के बाबूलाल मरांडी पहले मुख्यमंत्री बने। तब से आज तक, लगभग साढ़े तेरह वर्षों में इस प्रदेश ने आठ बार मुख्यमंत्री बदलते देखे हैं। इन नौ मुख्यमंत्रियों में अर्जुन मुंडा और शिबु सोरेन तीन तीन बार तो बाबुलाल मरांडी, मधु कोड़ा और हेमंत सोरेन एक एक बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का प्रभाव इस प्रदेश में, इसके गठन से पहले से है। शिबु सोरेन, जिन्हें झारखण्ड में ‘गुरूजी’ के नाम से पहचाना जाता हैं, ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के लिए प्रारंभिक दिनों में बहुत मेहनत की थी। किन्तु बाद में सत्ता के करीब रहने के कारण एक बहुत बड़े अवसरवादी के रूप में शिबु सोरेन की पहचान होती है। यूपीए सरकार के प्रथम चरण में, सन 2004 में, वे मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने, किन्तु बाद में चिरुडोह काण्ड में गिरफ्तारी का वारंट जारी होने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। एनडीए सरकार को भी उन्होंने समर्थन दिया था। 2002 में वे भाजपा की मदद से राज्यसभा में चुने गए थे।

पिछले चुनाव में झामुमो ने 8 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी खड़े किये थे। उनमे से 2 चुनकर आए। दुमका सीट से छठी बार शिबु सोरेन चुने गए। झामुमो के दुसरे सांसद हैं, पलामू से कामेश्वर बैठा।

2009 के चुनाव में भाजपा ने 12 लोकसभा क्षेत्रों से प्रत्याशी खड़े ेकिये थे, जिनमें से 8 चुनकर आये। इस चुनाव में कांग्रेस की बड़ी दुर्गति हुई थी। खड़े किये हुए 9 प्रत्याशियों में से कांग्रेस सिर्फ राजधानी रांची की सीट जीत पायी थी। केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय वहां से चुने गए थे।

इस बार मुकाबला रोचक है। कांग्रेस और झामुमो ने चुनावी गठबंधन का ऐलान किया हैं, जिसमें कांग्रेस 10 और 4 जगहों पर झामुमो लड़ेगी ऐसा प्रारंभिक बातचीत में तय हुआ है। लेकिन झामुमो के नेता और कार्यकर्ता इस फ़ॉर्मूले से संतुष्ट नहीं हैं। वे सात सीटें चाहते हैं।
उधर लालु यादव की राजद भी मैदान में कूदने के लिए आतुर है। कांग्रेस-झामुमो के गठबंधन में राजद भी जगह चाहता है। ऐसी हालत में कांग्रेस को अपनी सीटें छोडकर देनी पड़ेंगी। कोडरमा से सांसद बाबुलाल मरांडी की ‘झारखण्ड विकास मोर्चा’ यह पार्टी भी मैदान में रहेगी, जो झामुमो के वोट काटेगी, ऐसा चित्र है।

इन सबके अलावा तृणमूल कांग्रेस और भाकपा (माले) भी मैदान में रहेंगी। झामुमो ने चुनावी तैयारियां प्रारम्भ कर दी हैं। 2 फरवरी को शीबू सोरेन के निर्वाचन क्षेत्र, दुमका में झामुमो के स्थापना दिवस का विशाल कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वतः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वहा डेरा डाले हुए थे।

इस सारे परिदृश्य में भाजपा की तैयारी ज्यादा जमीनी लगती है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ रविन्द्र कुमार राय ने 11 फरवरी से 19 फरवरी तक ‘एक वोट कमल को, एक नोट नरेंद्र मोदी को’ यह अभियान चलाने की घोषणा की है। वर्तमान में भाजपा के पास 8 सीटें हैं। इनमें हजारीबाग से यशवंत सिन्हा, जमशेदपुर से अर्जुन मुंडा, खूंटी से करिया मुंडा आदि प्रमुख हैं। इस बार भाजपा सभी 14 सीटों पर प्रत्याशी खड़े करेगी ऐसे संकेत हैं। ऐसी परिस्थिति में 14 में से 10 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी चुनकर आना स्वाभाविक लगता है। इस समय पुरे बिहार और झारखण्ड में मोदी जी की जबरदस्त लहर हैं. इस लहर में भाजपा रांची, सिंहभूम समवेत 12 सीटों तक भी पहुंची तो आश्चर्य नहीं होगा। झारखण्ड भाजपा का इतिहास अंतर्कलह का इतिहास भी है। यदि भाजपा एकजुट होकर लड़ती है और बेदाग़ छवि के उम्मीदवारों को मैदान में उतारती है, तो ही ऐसी जीत संभव है।

गुजरात

देश के मध्य क्षेत्र के इन सभी राज्यों में गुजरात का रुख एकदम साफ़ है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। अर्थात इस बार गुजरात से बड़ी संख्या में भाजपा के सांसद चुन कर आयेंगे ऐसा लग रहा है। पिछले चुनाव में गुजरात की 26 सीटों में से भाजपा के खाते में मात्र 15 सीटें आयी थीं। कांग्रेस ने तब 11 सीटें झटक ली थीं। कच्छ का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के खाते में गया था। सुरेन्द्र नगर, राजकोट, पोरबंदर, जामनगर पर कांग्रेस का कब्जा हो गया था। दाहोद, आणंद, खेडा और महाराष्ट्र से सटा वलसाड, ये सभी सीटें कांग्रेस के पास गयी थीं।

लेकिन इस बार चित्र अलग रहेगा ऐसा सभी का अंदाज है। नरेंद्र मोदी, गुजरात से शत-प्रतिशत, याने पूरे 26 सांसद चुनकर लाने की योजना पर काम कर रहे हैं। भाजपा के परम्परागत लोकसभा क्षेत्र, याने अहमदाबाद, बरोडा, सूरत आदि तो भाजपा के पास रहेंगे ही, लेकिन कच्छ और उसके साथ कांग्रेस ने 2009 में झटकी सभी सीटें भाजपा के पास लाने के लिए, गुजरात भाजपा ने बूथ स्तर पर योजना बनाई है। कांग्रेस की तयारी वैसी दिखती नहीं है। 2009 में जीती हुई 11 सीटों को अपने पास रखने की कोई ठोस योजना अभी तक सामने नहीं आयी है।
शत-प्रतिशत न भी सही, तो भी 22 से 23 सांसद गुजरात से भाजपा के खाते में जायेंगे ऐसे आसार नजर आते हैं।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में भी पिछले चुनाव में भाजपा को झटका लगा था। कुल 29 सीटों में भाजपा के खाते में मात्र 16 सीटें ही आयी थीं। मालवा से भाजपा के अनेक परम्परागत संसदीय क्षेत्र टूट गए थे। देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, खंडवा. . ये सारे परम्परागत रूप से जनसंघ/ भाजपा के क्षेत्र थे जो 2009 में कांग्रेस के खाते में चले गए थे। इंदौर में सुमित्राताई महाजन और भोपाल में कैलाश जोशी की बढ़त काफी घट गयी थी। 11 सीटें कांग्रेस के खाते में आयी थीं।

इस 2009 के चुनाव में महाकोशल/ विंध्य ने बड़ी मात्रा में भाजपा की साख को बचाए रखा था। इस बार भी इन क्षेत्रों में भाजपा के बढ़त के आसार हैं। जबलपुर से वर्तमान सांसद, राकेश सिंह के तीसरी बार विजयी होने के स्पष्ट आसार हैं। पिछली बार की पराजित सीटें, मंडला, शहडोल और रीवा में भी भाजपा की स्थिति मजबूत है। मालवा और मध्यभारत अंचल से भी पिछली बार की तुलना में भाजपा को कहीं अधिक सीटें मिलने का चित्र सामने आ रहा है।

दादरा – नगर हवेली और दमण -दीव

देश के इस मध्य क्षेत्र में दादरा – नगर हवेली और दमण – दीव यह 2 छोटे संसदीय क्षेत्र हैं। वर्तमान में यह दोनों भी भाजपा के पास हैं। भाजपा की बात करें तो दमण-दीव सांसद लालू पटेल और दादरा नगर हवेली सांसद नटू पटेल भाजपा की टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। दिसम्बर में हुए विधान सभा चुनावों के पश्चात इन दोनों सीटों पर भाजपा को जीतने में बहुत मुश्किल नहीं जायेगी ऐसे संकेत हैं।

इन सभी पहलुओं पर विचार किया तो भाजपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस मध्य क्षेत्र की स्थिति इस प्रकार रहेगी-

प्रदेश कुल लोस सीटें पिछले चुनाव में भाजपा को प्राप्त सीटें आगामी चुनाव में भाजपा को अनुमानित सीटें
मध्य प्रदेश 29 16 25
गुजरात 26 15 23
झारखण्ड 14 08 10
छत्तीसगढ़ 11 10 10
दादरा नगर हवेली 01 01 01
दमण दीव 01 01 01
कुल योग 82 51 70
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