LAC पर चीनी सैनिक बना रहे पक्का मकान, 50 हजार से अधिक सैनिक तैनात

भारत और चीन के बीच चल रहा सीमा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है और चीन की तरफ से शांति की कोशिश की भी नहीं की जा रही है। पिछले साल गलवान घाटी मे दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव हुआ था। इस घटना के बाद कई बैठकें भी हुई लेकिन यह विवाद पूरी तरह से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। चीन ने अपनी सेना को पीछे हटने का आदेश दे दिया था जिसके बाद से यह समझा जाने लगा था कि अब हालात स्थिर हो चुके है और चीन भी शांति के साथ विवाद को खत्म कर चुका है लेकिन हाल के कुछ घटनाक्रमों पर नजर डालें तो यह प्रतीत होता है कि चीन अभी भी अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं है। 
 
चीन के सैनिकों ने उत्तराखंड इलाके में घुसपैठ की और एक पुल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। जानकारी के मुताबिक चीन के करीब 100 से अधिक सैनिक उत्तराखंड के बाराहोती इलाके में घोड़े पर बैठकर घुस आए उन्होंने काफी अंदर तक सब कुछ देखा और नुकसान किया। सेना को इसकी सूचना मिली और वह लोग जब तक उस इलाके में पहुंचे चीनी सैनिक जा चुके थे। उस इलाके के एक मात्र पुल को भी तोड़ दिया गया हालांकि सरकार की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया है और उत्तराखंड सरकार की तरफ से भी यही कहा गया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। उत्तराखंड का बाराहोती वह इलाका है जहां पहले भी चीनी सैनिक घुसपैठ कर चुके हैं। सन 1962 की लड़ाई के दौरान भी चीनी सैनिकों ने यहां पर घुसपैठ की थी और कई इलाकों को कब्जे में लेने की कोशिश की थी। जिस इलाके में चीनी सैनिक घुसे थे वह विवादित क्षेत्र है और वहां किसी भी देश की सेना तैनात नहीं रहती है इसलिए चीनी सैनिक भारतीय सेना से बच निकले। 
 
चीन की तरफ से सीमा पर फिर से हरकत तेज कर दी गई है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीनी सैनिकों को फिर से बढ़ाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक करीब 50 हजार सैनिकों की अभी तक तैनाती कर दी गयी है जबकि यह संख्या समय के साथ अभी और भी बढ़ सकती है इसके साथ ही ड्रोन की मदद से सीमावर्ती इलाकों पर नजर रखी जा रही है। उधर भारतीय सेना भी पीपल्स लिबरेशन आर्मी पर नजर बनाए हुए है और ड्रोन के माध्यम से ही इसका जवाब देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कुछ अत्याधुनिक ड्रोन भारतीय सेना में शामिल किये जा रहे है जो इजराइल से मंगाए गये है। 
LAC पर चीनी सैनिक अपने ठिकानों को स्थाई रुप से तैयार कर रहे हैं जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि चीन किसी रणनीति के तहत यहां लंबा रुकने वाला है। सीमा पर पहले से अस्थाई ढांचों को तोड़कर उसे स्थाई रुप दिया जा रहा है जो भारत के लिए एक चिंता का विषय है। चीनी सेना की तरफ से यह स्थाई कार्य कंक्रीट की इमारतों के रुप में नजर आ रहा है जो यह संकेत देता है कि चीन की सेना यहां से जल्दी निकलने वाली नहीं है। चीन अब किसी मौके की तलाश में रहेगा जिस समय वह भारत पर हमला कर सके। 

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