गोरक्षा-राष्ट्र रक्षा

गो रक्षा से राष्ट्र रक्षा संभव है इसलिए हमारे देश में संतों ने युगों-युगों से गो रक्षा को सर्वाधिक महत्व दिया है। संतों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर गो रक्षा में अपना अमूल्य योगदान दिया है। ध्यातव्य है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मंगल पाण्डेय ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इसलिए विद्रोह किया था क्योंकि अंग्रेजों ने बंदूक में गाय की चर्बी का इस्तेमाल किया था। गाय भारत की संस्कृति के साथ ही भारतीयों की आस्था का प्रतीक है इसलिए विदेशी शक्तियों ने भारतीयों की आस्था पर कुठाराघात करने के लिए गाय को हर बार अपने निशाने पर लिया।

इतिहास से लेकर आज तक यह सिद्ध हुआ है कि गोवंश संरक्षण और राष्ट्र रक्षा एक दूसरे के पूरक हैं। बावजूद इसके आजादी से लेकर आज तक भारत में सम्पूर्ण गोवंश हत्या बंदी लागू नहीं हो पाया है। इसका दुःख प्रत्येक भारतीय को है कि हम अपनी ही संस्कृति आस्था के मान बिंदुओं की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं जबकि हम बहुसंख्यक हैं। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में जो किया सो किया लेकिन जब हम आजादी के 75 वें अमृत महोत्सव के दौरान राष्ट्र के गौरव का मूल्यांकन कर रहे हैं, तब ऐसे शुभ अवसर पर तो हमें अपनी गलतियों को सुधारना ही चाहिए।

 देश में सम्पूर्ण गोहत्या बंदी पर बने केन्द्रीय कानून

देशवासी लम्बे समय से देश में सम्पूर्ण गोहत्या बंदी पर केन्द्रीय कानून की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे अमलीजामा पहना दिया तो अमृत महोत्सवी वर्ष में इसे सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा और ‘सोने पर सुहागा’ कहा जाएगा। इस ऐतिहासिक बिल को पास कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नया कीर्तिमान रच सकते हैं, जिसे प्रत्येक भारतीय कभी नहीं भूल पाएंगे। इसके फलस्वरूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यश पताका सदैव लहराती रहेगी।

भारतीय संविधान भी गोवंश रक्षा का पक्षधर

भारतीय संविधान गो हत्या का निषेध करता है। संविधान के अनुच्छेद 48 में स्पष्ट उल्लेख है कि गाय और गोवंश की रक्षा की जानी चाहिए। राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा और विशिष्टत: गाय व बछड़ों तथा अन्य दुधारू एवं वाहक पशुओं की नस्लों के परिरक्षण, सुधार और उनकी हत्या का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा। इस अनुच्छेद के आलोक में केंद्र सरकार गोवंश हत्या निषेध कानून बना सकती है। महात्मा गांधी ने भी स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि गोवंश सहित अन्य मूक दुधारू या वाहन योग्य पशुओं की हत्या नहीं की जानी चाहिए।

भारत की संस्कृति व आस्था का प्रतीक गाय

गो रक्षा से राष्ट्र रक्षा संभव है इसलिए हमारे देश में संतों ने युगों-युगों से गो रक्षा को सर्वाधिक महत्व दिया है। संतों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर गो रक्षा में अपना अमूल्य योगदान दिया है। स्मरण होगा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मंगल पाण्डेय ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इसलिए विद्रोह किया था क्योंकि अंग्रेजों ने बंदूक में गाय की चर्बी का इस्तेमाल किया था। गाय भारत की संस्कृति के साथ ही भारतीयों की आस्था का प्रतीक है इसलिए विदेशी शक्तियों ने भारतीयों की आस्था पर कुठाराघात करने के लिए गाय को हर बार अपने निशाने पर लिया। अब समय आ गया है कि राष्ट्र रक्षा में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले गोवंश की सुरक्षा देश की सबसे लोकप्रिय मोदी सरकार सुनिश्चित करे।

गाय हिन्दुस्थान की रक्षा करने वाली है

मैं खुद गाय को पूजता और मान देता हूं। गाय हिन्दुस्थान की रक्षा करने वाली है क्योंकि उसकी संतान पर हिन्दुस्थान का, जो खेती प्रधान देश है, आधार है।

महात्मा गांधी

व्यर्थ नहीं जाएगा संतों का बलिदान

सम्पूर्ण विश्व का मंगल एवं कल्याण करने की कामना करने वाले मानवता के पुजारी महात्मा संतों को यदि गो रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान करना पड़े, इससे बड़ा देश का दुर्भाग्य क्या होगा? लेकिन दुर्भाग्यवश आजाद भारत में ही देश की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने ही सन 1966 में गोहत्या बंदी की मांग को लेकर आन्दोलन करने वाले लाखों निहत्थे साधू संतों पर गोलियां चलवा दी और सैकड़ों निर्दोष संतों की हत्या करवा दी थी, लेकिन संतों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। समस्त महाजन संस्था सहित देश के असंख्य साधू संत, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि जो काम 70 वर्षों में कांग्रेस की सरकार नहीं कर पाई, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जरुर करेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेन्द्र मोदी जी ने राज्य में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था क्योंकि वे गाय माता के प्रति संवेदनशील हैं।

गोवध पर कानूनी  प्रतिबंध क्यों नहीं?

गोवधबंदी के लिए लंबे समय से चल रहे आन्दोलन के बारे में आप जानते ही हैं। संसद के पिछले सत्र में भी यह मुद्दा सामने आया था और जहां तक मेरा सवाल है, मैं यह समझ नहीं पाता कि भारत जैसे एक हिन्दू बहुल देश में जहां गलत हो या सही, गोवध के विरुद्ध ऐसा तीव्र जन-संवेग है। वहां गोवध पर कानूनी प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा सकता? (जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लिखा गया पत्र)

                                                                   जयप्रकाश नारायण (लोकनायक)

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