सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र

Continue Readingसांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छाया में गणतंत्र

बदलाव की चेतना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी देखने में आई थी। इसीलिए इसे भारतीय स्वाभिमान की जागृति का संग्राम भी कहा जाता है। राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध लोक-चेतना का यह प्रबुद्ध अभियान था। यह चेतना उत्तरोतर ऐसी विस्तृत हुई कि समूची दुनिया में उपनिवेशवाद के विरुद्ध मुक्ति का स्वर मुखर हो गया। परिणाम स्वरूप भारत की आजादी एशिया और अफ्रीका की भी आजादी लेकर आई।

थल सेना दिवस: तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित

Continue Readingथल सेना दिवस: तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित

  किसी भी देश की सेना से उसकी ताकत का पता चलता है और बाकी देश पर उसकी एक छवि निर्धारित होती है। दुनिया के सभी देश अपनी पूरी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अपनी सेना पर खर्च करते हैं ताकि उससे देश की रक्षा की जा सके और समय…

दुनिया में भारत और हिन्दू धर्म का बजा डंका

Continue Readingदुनिया में भारत और हिन्दू धर्म का बजा डंका

हिंदुत्व की बात शुरू होते ही सबसे पहले जिस सन्यासी का नाम याद आता है वो नाम अधिकांश लोगों के लिए स्वामी विवेकानंद का होगा। उन्हें ख़ास तौर पर उनके “शिकागो व्याख्यान” के लिए याद किया जाता है।  ये जो सर्व धर्म सम्मलेन हो रहा था, वो शिकागो के एक…

स्वामी विवेकानन्द जी की राष्ट्रीय प्रेरणा

Continue Readingस्वामी विवेकानन्द जी की राष्ट्रीय प्रेरणा

सन १८६३ के प्रारंभ में, १२ जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ हैं उस समय देश की परिस्थिति कैसी थी? १८५७ के क्रन्तियुध्द की ज्वालाएं बुझ रही थी।  यह युध्द छापामार शैली में लगभग १८५९ तक चला। अर्थात स्वामी विवेकानंद के जन्म के लगभग ४ वर्ष पहले तक इस…

स्वामी विवेकानंद: कड़ी मेहनत, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति से बदल सकता है भारत

Continue Readingस्वामी विवेकानंद: कड़ी मेहनत, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति से बदल सकता है भारत

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेंद्र दत्त था। स्वामी विवेकानंद की जयंती को देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन युवाओं को कुछ करने की प्रेरणा देता है। हमारे देश…

संघ के 6 उत्सव और उनके महत्व

Continue Readingसंघ के 6 उत्सव और उनके महत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) किसी परिचय का मोहताज नहीं है यह एक ऐसा संगठन है जो पूरे विश्व में चर्चित है वैसे तो इसका सीधे तौर पर राजनीति से कोई नाता नहीं है लेकिन फिर भी कुछ राजनीतिक दल संघ के कार्यों पर आपत्ति उठाते रहते है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ…

सरकारी नियंत्रण से कब मुक्त होंगे मंदिर?

Continue Readingसरकारी नियंत्रण से कब मुक्त होंगे मंदिर?

देश के साधु संतों ने अब इस कमान को संभाल लिया है तो हमें विश्वास है कि हिन्दुओं के आस्था केन्द्र मंदिरों पर से सरकारी नियंत्रण से मुक्ति मिलेगी और इसका आगाज उत्तराखंड की सरकार के इस आदेश से हो गया है कि राज्य के चारों धाम में आने वाले मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाता है। 

एक अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह है अखंड भारत

Continue Readingएक अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह है अखंड भारत

कुल मिलाकर अगर हम अखंड भारत चाहते हैं तो भारतीय संस्कृति जो हिंदू संस्कृति है उसे अपना मानदंड बनाकर चलना होगा। दीनदयाल जी के अखंड भारत के स्वप्न् को साकार करने के आह्वान का आज पुन: स्मरण करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था, ... हमें हिम्मत हारने की जरूरत नहीं। यदि पिछले सिपाही थके हैं तो नए आगे आएंगे।

काशी बना भारतीय संस्कृति के गौरव का प्रतीक

Continue Readingकाशी बना भारतीय संस्कृति के गौरव का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के साथ इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का निर्माण हुआ। प्रमुख संप्रदायों के संतों की मौजूदगी में महादेव का अनुष्ठान हुआ। गंगा घाटों के साथ शहर की प्रमुख भागों को सजाया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर के सात संपूर्ण कॉरिडोर के…

आज के युग में “अहं ब्रह्मास्मि” की अनिवार्यता

Continue Readingआज के युग में “अहं ब्रह्मास्मि” की अनिवार्यता

हजारों वर्षों से भारत अपनी महान विरासत और ऋषियों के लिए जाना जाता है।  विभिन्न समयों पर, ऋषियों ने मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया, जैसे कि मन, बुद्धि, स्मृति, अहंकार और आत्मन। इन पहलुओं की संतों के विस्तृत अध्ययन और ज्ञान का व्यापक रूप से वैश्विक विचारकों और दार्शनिकों द्वारा अपने स्वयं के…

ब्रह्म मुहूर्त का महत्त्व

Continue Readingब्रह्म मुहूर्त का महत्त्व

सूर्योदय से चार घड़ी पूर्व यानी करीब डेढ़ घंटे पहले का समय ब्रह्म मुहूर्त होता है और हिन्दू धर्म में नींद त्यागने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त समय बताया गया है। ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह करीब 4 से 5.30 तक का समय जब सभी को नींद त्यागनी चाहिए और…

स्व की आध्यात्मिकता से राष्ट्रीय एकात्मकता और अखंडता आयेगी – डॉ. मोहन भागवत जी

Continue Readingस्व की आध्यात्मिकता से राष्ट्रीय एकात्मकता और अखंडता आयेगी – डॉ. मोहन भागवत जी

हम स्वाधीन हुये लेकिन अभी भी हम स्वतंत्र होने की प्रक्रिया में हैं।  इस स्वाधीनता के लिये सभी वर्ग क्षेत्र समाज के लोगों ने त्याग व् बलिदान दिया और स्वाधीनता को लेकर सबके मन  में समान भाव था. जो बातें कुंद्रा डिक्लेरेशन में सन 1830 में कही गई थी वही…

End of content

No more pages to load