काशी नगरी के अनोखे कोतवाल जब औरंगजेब पर पड़े थे भारी

काशी नगरी की महिमा अद्भुत और अपार है कहा जाता है कि काशी नगरी भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी हुई है। इसे मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। हिन्दू धर्मग्रंथों से यह पता चलता है कि लोग अपनी अंतिम सांस काशी में लेना चाहते थे क्योंकि यहां प्राण त्यागने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी को संसार की सबसे पुरानी नगरी भी मानी जाती है। काशी नगरी का उल्लेख सबसे पुराने ग्रंथ ऋग्वेद में भी मिलता है इसका दूसरा नाम वाराणसी भी था जिसे समय के साथ लोगों ने बनारस कर दिया था लेकिन हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से वाराणसी कर दिया। 

उपरोक्त सभी तथ्यों के साथ काशी के कोतवाल काल भैरव को लेकर भी कई तथ्य है जिसका पालन आज भी वहां का प्रशासन करता है। ऐसा कहा जाता है कि काशी विश्वनाथ का दर्शन का लाभ तभी मिलता है जब उनसे पहले उनके कोतवाल काल भैरव का दर्शन किया जाता है। काल भैरव को काशी का कोतवाल इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह पूरे नगरी की सुरक्षा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि काशी नगरी में दंड और न्याय का काम सिर्फ काल भैरव के पास होता है। खुद यमराज भी बिना काल भैरव की आज्ञा के किसी के प्राण नहीं ले सकते हैं। 
काल भैरव की महिमा का आकलन इस बात से भी लगाया जा सकता है कि आज भी जब कोई प्रशासनिक अधिकारी इस नगरी में आता है तो वह सबसे पहले काल भैरव के दर्शन करता है और फिर अपना कार्यभार संभालता है। भैरव बाबा मंदिर के पास वाली कोतवाली में कोतवाल की कुर्सी आज भी खाली पड़ी रहती है खुद कोतवाल उसके बगल में एक अलग कुर्सी पर बैठते हैं ऐसा कहा जाता है कि कोतवाल की कुर्सी पर खुद भैरव बाबा विराजमान होते हैं। काशी के काल भैरव की कुल 8 चौकियां हैं- भीषण भैरव, संहार भैरव, उन्मत्त भैरव, क्रोधी भैरव, कपाल भैरव, असितंग भैरव, चंड भैरव, रौरव भैरव।
औरंगजेब को भी भगाया 
काल भैरव को लेकर एक और कथा विख्यात है कि जब क्रूर मुगल बादशाह औरंगजेब ने काशी पर कब्जा करना चाहा तब काल भैरव जी की शक्ति के आगे उसे भागना पड़ा। औरंगजेब की सेना ने काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा और बहुत नुकसान पहुंचाया लेकिन इसी दौरान जैसे ही काल भैरव के मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया गया वैसे की पागल कुत्तों का एक बड़ा झुंड औरंगजेब के सैनिकों पर टूट पड़ा। पागल कुत्ते जैसे ही किसी सैनिक को काटते वह दूसरे सैनिकों को काटने लगता। हालात यह हो गये कि औरंगजेब खुद डर गया और उसे भागना पड़ा। मुगल बादशाह ने अपने ही सैनिकों को मारने का आदेश दे दिया क्योंकि उसके अधिकतर सैनिक पागल हो चुके थे।
काल भैरव को भगवान शिव का गण और माता पार्वती का अनुचर माना जाता है भैरव का तात्विक अर्थ भय का हरण करने वाला होता है। शायद इसलिए ही भगवान भोले शंकर ने उन्हें काशी का कोतवाल बनाया है। काशी के लोगों का मानना है कि काल भैरव समय समय पर अपनी उपस्थिति का एहसास कराते रहते हैं।   

आपकी प्रतिक्रिया...