चारधाम सड़क परियोजना को हरी झंडी, चीन सीमा तक होगी पहुंच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों से बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी में है। भोले नाथ की पूजा और गंगा आरती के साथ वह भक्ति व काशीवासियों की सेवा में लीन है उधर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार के पक्ष में एक बड़ा फैसला हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना को मंजूरी दे दी। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब चारधाम के लिए डबल रोड तैयार किया जाएगा जिससे चारधाम की यात्रा किसी भी मौसम में की जा सकेगी। इस योजना को स्वीकृति मिलने से अब भारत चीन सीमा के नजदीक तक सड़क तैयार कर सकेगा जिससे युद्ध के समय में भारतीय सैनिकों को काफी लाभ मिलेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तर्ज पर यह फैसला केंद्र के पक्ष में सुनाया और कहा कि देश की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता है इसलिए यह सड़क परियोजना का होना बहुत जरूरी है जिससे युद्ध के समय सेना आसानी से अपने टैंक व जरूरी सामानों को सीमा पर पहुंचा सके। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सड़क के चौड़ीकरण के साथ ही एक कमेटी का भी गठन किया है जिसमें पूर्व न्यायमूर्ति एके सीकरी को अध्यक्ष बनाया गया है। यह कमेटी इस पूरे मामले पर काम करेगी इसके साथ ही कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन, उत्तराखंड सरकार और सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वह इस पूरे मामले पर सहयोग करें। 

केंद्र सरकार की चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ परियोजना का उद्देश्य सभी चारधामों को जोड़ना है जिससे लोग पूरे साल दर्शन कर सकें। इस सड़क निर्माण के बाद सेना को भी फायदा होगा क्योंकि इसी सड़क के माध्यम से हमारी पहुंच चीनी सीमा तक हो जाएगी जिससे किसी भी मुश्किल समय में सेना आसानी से टैंकर, ट्रक और गोला बारुद सीमा पर पहुंचा सकेगी। चारधाम की यह 900 किमी लंबी परियोजना है जिसमें से 400 किमी पर काम पूरा हो चुका है जबकि बाकी के 500 किमी पर काम जारी है। इस सड़क निर्माण के दौरान 2 सुरंगों, 15 छोटे पुल, 25 बड़े पुल,18 यात्री सेवा केंद्र और 13 बायपास का निर्माण किया जायेगा। इस परियोजना पर करीब 12 हजार करोड़ का खर्च आयेगा। 

केंद्र सरकार की इस परियोजना को कोर्ट में चुनौती दी गयी थी और यह दावा किया गया था कि इस परियोजना की वजह से पेड़ों की कटाई हो रही है। चारधाम परियोजना के चलते जो सड़क निर्माण किया जायेगा उसकी वजह से भूस्खलन होने की भी संभावना अधिक होगी इसलिए इस परियोजना को तुरंत रोक लगाई जाए। केंद्र सरकार की तरफ से इस पर सफाई पेश करते हुए कहा गया कि भूस्खलन को ध्यान में रखकर ही सड़क का निर्माण किया जा रहा है लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के लिए कई कारण होते हैं। केंद्र सरकार की तरफ से एक बंद लिफाफे में सीमा पर चीन के निर्माण कार्यों की कुछ तस्वीरें साझा की गयी और अदालत को बताया गया कि चीन बहुत ही तेजी से सीमा के नजदीक काम कर रहा है। चीन की तरफ हवाई पट्टी, एयरपोर्ट, हैलीपैड, टैंको, सैनिकों के लिए बिल्डिंग और रेलवे लाइन का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में भारत को भी सीमा पर पहुंच बनानी जरुरी है और सड़क की चौड़ाई कम से कम 10 मीटर होनी चाहिए।        

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