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*****अशफाक कादरी********

विश् व संगीत दिवस (२१ जून ) को देश भर में संगीत के आयोजन होते हैं। वर्ष १९८२ से प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले इस दिवस में संगीत की विश् व बंधुत्व के क्षेत्र में योगदान के मद्देनजर सांस्कृतिक आदान -प्रदान पर चर्चाएं, शास्त्रीय, उप शास्त्रीय, लोक गीत एवं भाव संगीत के कार्यक्रम होते हैं।

 भारतीय संस्कृति एवं समाज में संगीत का महत्वपूर्ण स्थान है। यह सांस्कृतिक धारा का मूर्तिमान प्रतीक एवं अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यह हृदय को स्पर्श करने वाली कला है जो हमारे जीवन के रोम -रोम मेें रची -बसी है। प्रकृति के कण -कण में संगीत के सप्त स्वर मिठास घोलते हैं। ‘सम् और गीत ’ दो शब्दों के समन्वय से बने इस शब्द की विराटता को सहिष्णुता, मानवता और विश् व बंधुत्व में देखा जा सकता है। हमारे जीवन में प्रात : काल ईश् वर की आराधना संगीत से प्रारंभ होती है जो दिन भर संगीत की गतियों, लय, मर्यादाओं के साथ आनंद की प्राप्ति होती है। रात ईश् वर स्तुति के साथ संगीत की स्वर लहरियां हमें गहरी निद्रा, सुकून और शांति देता है। पृथ्वी पर मनुष्य के आगमन के साथ संगीत के स्वरों ने उसे आनंदमय बनाया है। वेदों में संगीत साधना के उल्लेख मिलते हैं। रामायण, महाभारत काल में संगीत का उल्लेख मिलता है। बौद्ध काल, जैन ग्रन्थों में संगीत की जानकारी मिलती है। राजा -महाराजाओं के समय संगीत को राजाश्रय दिया जाता था, तथा संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है एवं श्रेष्ठ कलाकारों को पुरस्कृत किया जाता था। मुगल काल में तानसेन, बैजू बावरा, जैसे गुणी संगीत साधक थे। इस प्रकार हमारे देश मे संगीत को राजाश्रय, संगीत उत्सवों का आयोजन एवं संगीत कलाकारों को पुरस्कृत करने की परंपरा सदियों से चल रही है।

भारत में विभिन्न राष्ट्रीय पर्वों पर संगीतोत्सवों के आयोजन किए जाते हैं। संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली राज्यों की संगीत नाटक अकादमियां, संगीत संस्थान अपने क्षेत्रों में शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। विश् व संगीत दिवस (२१ जून ) को देश भर में संगीत के आयोजन होते हैं। वर्ष १९८२ से प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले इस दिवस में संगीत की विश् व बंधुत्व के क्षेत्र में योगदान के मद्देनजर सांस्कृतिक आदान -प्रदान पर चर्चाएं, शास्त्रीय, उप शास्त्रीय, लोक गीत एवं भाव संगीत के कार्यक्रम होते हैं।

हमारे देश में होने वाले संगीत उत्सवों में जालंधर (पंजाब ) का ‘हरवल्लभ संगीत समारोह ’ संगीत का महाकुंभ है, इस तीन दिवसीय अखंड कार्यक्रम में देश भर के कलाकार श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं शास्त्रीय गायन, वादन प्रस्तुत कर नई सृजन शक्ति और विश् वास के साथ विदा होते हैं। वृंदावन में स्वामी हरिदास संगीत -नृत्य समारोह में कलाकार मध्य कालीन संगीत के संत स्वामी हरिदास जी को स्वरांजली प्रस्तुत करते हैं। संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति में प्रतिवर्ष ग्वालियर में ‘तानसेन महोत्सव ’ होता है जिसमें स्व . तानसेन की समाधि पर कलाकार अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। संगीत साधक उस्ताद अलाऊद्दीन खां साहब की स्मृति में भोपाल में संगीत सम्मेलन होता है। प्रयाग संगीत समिति द्वारा इलाहाबाद में विष्णु दिगंबर संगीत सम्मेलन भी गायन, वादन, नृत्य का अनूठा आयोजन है।

प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ द्वारा भास्कर राव संगीत समारोह गायन, वादन, नृत्य का यादगार अनुष्ठान है। संगीत कला केंद्र आगरा में होने वाला ‘विष्णु दिगंबर पलुस्कर संगीत समारोह ’ बहुआयामी आयोजन है जिसमें नई प्रतिभाओं के लिए अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता का आयोजन होता है। बृहद गुजरात संगीत समिति, अहमदाबाद द्वारा अहमदाबाद में अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। सप्तक द्वारा अहमदाबाद में संगीत का अनूठा आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के कलाकार शामिल होते हैं।

मुंबई में स्वर साधना समिति द्वारा प्रतिवर्ष मार्च -अप्रैल में तीन दिवसीय ‘स्वर साधनोत्सव ’ का आयोजन किया जाता है जिसमें शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य के अनूठे कार्यक्रम होते हैं, जिसमें हिंदुस्तानी, कर्नाटक संगीत के साथ कत्थक, कुचीपुडी, ओडीसी, मणिपुरी, भरतनाट्यम आदि भारत के विभिन्न भागों के शास्त्रीय नृत्य के कार्यक्रम होते हैं। देश के संगीत साधकों को ‘स्वर साधना रत्न ’ एवार्ड से नवाजा जाता है। स्वर साधना समिति के मासिक कार्यक्रम मुंबई के मराठी साहित्य सदन में होते हैं।

राजस्थान की धरती पर राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर, जवाहर कला केंद्र, जयपुर, कत्थक केंद्र, जयपुर, पश् चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर, भारतीय लोक कला मंडल, उदयपुर द्वारा राज्य के अनेक भागों में शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत नृत्य के समारोह, उत्सवों के आयोजन किए जाते हैं ? झीलों की नगरी उदयपुर में महाराणा कुंभा संगीत परिषद द्वारा प्रतिवर्ष ‘महाराणा कुंभा संगीत समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें भारत के विभिन्न भागों के शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य के कार्यक्रम होते हैं। १९६२ से चल रहे संगीत अनुष्ठान में संस्था द्वारा उदयपुर मासिक संगीत समारोह भी होते हैं।

राजस्थान के उत्तर पश् चिम मरू क्षेत्र बीकानेर में मांड कोकिला पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की स्मृति में अखिल भारतीय मांड समारोह का आयोजन किया जाता है। प्रतिवर्ष ३ नवंबर को होने वाले इस आयोजन में श्रेष्ठ कलाकारों को सम्मानित किया जाता है।

बीकानेर में प्रतिवर्ष जनवरी में प्रथम सप्ताह में संगीत मनीषी डॉ . जयचंद्र शर्मा स्मृति ‘संगीतोत्सव ’ का आयोजन किया जाता है जिसमें अखिल भारतीय संगीत -कला प्रतियोगिता के साथ पं . विष्णु नारायण भातखंडें संगीत समारोह का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम में कलाकारों को डॉ . जयचंद्र शर्मा एवार्ड से नवाजा जाता हैं।

इस प्रकार देश में खजुराहो महोत्सव, आगरा में कथकोत्सव, पटना में होली स्वर समारोह, पं . भीम सेन जोशी स्मृति समारोह, (सागर ) रचना दिवस महोत्सव अलमोड़ा भी यादगार रहे हैं। भारत में संगीतज्ञों को मान सम्मान प्रदान करने की परंपरा प्राचीन है। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा संगीत कलाकारों को भी पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा जाता है। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली द्वारा रत्न सहायता, अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जाते है जिनमें क्रमश : तीन लाख रु ., एक लाख रु . प्रदान किए जाते हैं। काका हाथरसी पुरस्कार ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष ‘काका हाथरसी संगीत सम्मान दिया जाता है जिसमें २५ हजार रु . की राशि प्रदान की जाती है। केरल राज्य की संगीत पत्रिका ‘समकालिक संगीतम ’ द्वारा भारतीय संगीत को ब़ढावा देने के लिए कालीकर (केरल ) में संगीत विकास पुरस्कार दिया जाता है जिसमें गौरव लिपि तथा १०००१ /- की राशि भेंट की जाती हैं। संगीत क्षेत्र मे मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण ’ प्रदान किया जाता है। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा संगीत, नृत्य, नाट्य, पारंपरिक लोकनृत्य एवं नाट्य के क्षेत्र में उस्ताद बिस्मिल्ला खां युवा पुरस्कार दिए जाते हैं जिसमें प्रत्येक को २५ हजार की राशि भी भेंट की जाती है।

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