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वह दुनिया का सब से खूबसूरत पनाहगार था। हरीभरी वादियां, मन को तरोताजा करने वाला मस्तमौला मौसम, हिमधवल पर्वतों से आकाश को छूने वाला वह धरती का स्वर्ग था…
भारत माता का वह उन्नत मस्तक था…!
वह अखंड कश्मीर था…!
पर १९४७ के विभाजन ने सब कुछ बदल दिया। सबकुछ। वह मस्तिक ही खंडित हो गया। और उन खंडित अवशेषों को पाकिस्तान और चीन ने आपस में बांट लिया।
जहां वेदों की ऋचाएं गाई गईं, जहां पवित्र मंत्रों का, पुराणों का, उपनिषदों का उद्घोष हुआ था, जहां साक्षात आदि शंकराचार्य ने आदिशक्ति का पीठ स्थापित किया था, वह सारा भूभाग पकिस्तान नाम के नवसृजित ‘राष्ट्र’ ने हथिया लिया था..!
पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाला कश्मीर अत्यंत संपन्न है। विविधताओं से आलोकित है। खनिज संपदाओं से भरपूर है। लेकिन आज यह सारा प्रदेश दुर्दशा का शिकार हो रहा है। किसी जमाने का जागृत शक्तिपीठ ‘शारदापीठ’ आज खंडहर हो रहा है। इस मंदिर में आदि शंकराचार्य ने निवास किया था। संत रामानुजाचार्य का सानिध्य भी इस मंदिर को मिला था। आदिशक्ति देवी के १८ शक्तिपीठों में से यह एक है। इस पीठ से जो ‘शारदा लिपि’ तैयार हुई, उसी से सिख पंथ की गुरुमुखी लिपि निकली। नियंत्रण रेखा के मात्र १७ किलोमीटर दूर, यह जागृत देवस्थान, आज निद्रितावस्था में है।
यह धरती का स्वर्ग उजड़ रहा हैं..!
पाकिस्तान ने कश्मीर के बाल्टिस्तान का ‘शक्सगाम’ यह हिस्सा चीन को दे दिया है। बचे हुए कश्मीरी प्रदेश में, पाकिस्तान ने चीन को राजमार्ग बनाने का पूरा अधिकार दिया है। इस राजमार्ग से चीन, अपने ‘काशगर प्रदेश’ को पाकिस्तान के ‘ग्वादर’ बंदरगाह को जोड़ेगा। इसलिए चीन इस क्षेत्र में अनेक परियोजनाएं शुरू कर रहा है। चीन ने अपने हजारों मजदूर इस क्षेत्र में लगाए हैं। उन मजदूरों की सुरक्षा के लिए चीनी सैनिकों की कुछ बटालियने वहां तैनात हैं, और इसीलिए स्थानीय कश्मीरी लोगों में भारी असंतोष है।
पिछले वर्ष १२ अगस्त को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वक्तव्य दिया और उसके कारण सारे संदर्भ ही बदल गए। उन्होंने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि, ‘पाक अधिकृत कश्मीर भारत ही हिस्सा है। वहां के निर्वासित हुए लोगों की जिम्मेदारी हमारी है।’
इसके बाद बहुत कुछ बदला है। जो चीन हमेशा ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ को ‘पाक एडमिनिस्टर्ड कश्मीर’ (पी ए के) लिखता था / कहता था, उसने अपने अधिकृत शासकीय समाचार पत्र, ‘ग्लोबल टाइम्स’ के १६ अगस्त, २०१६ के अंक में ‘पाक ऑक्युपाईड कश्मीर’ (पी ओ के) लिखा।
यह सारा क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। कश्मीर के चार / पांच अलग-अलग हिस्सों पर तीन देशों का आधिपत्य है। गिलगिट-बाल्टिस्तान और मुझफ्फ़राबाद, मीरपुर के सारे भूभाग पर पाकिस्तान का कब्जा है। अक्साई चीन और शक्सगम घाटी का हिस्सा चीन ने अपने पास रख लिया है। बचा हुआ हिस्सा उसके मूल मालिक, अर्थात भारत के पास है।
१५ अगस्त, १९४७ के पहले अखंड कश्मीर की सीमाएं तिब्बत, अफगानिस्तान और रूस से जुड़ी हुई थी। लेकिन पिछले सत्तर वर्षों में बहुत कुछ बदला है। तिब्बत का ‘बफर जोन’ चीन ने दबा लिया है। सोवियत संघ का विघटन हुआ है। आज पाक अधिकृत कश्मीर की सीमाएं पांच देशों से मिलती हैं। विशेषतः गिलगिट-बाल्टिस्तान यह क्षेत्र सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए चीन (और अमेरिका भी) इस क्षेत्र पर अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं। अफगानिस्तान, चीन, कजाकिस्तान आदि देशों की सीमाएं यहां मिलती हैं। यह क्षेत्र खनिज संपदाओं से भरपूर है। इसलिए सैनिक दृष्टि से इसका अपना महत्व है। इस क्षेत्र की जनसंख्या १८ लाख से ऊपर है। इसमें अधिकतर शिया मुसलमान हैं। इसलिए सुन्नी बहुमत वाला पाकिस्तान, इस क्षेत्र की उपेक्षा करता है। पाक अधिकृत कश्मीर की कुल जनसंख्या लगभग चालीस लाख है। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है। पाकिस्तान सरकार इस क्षेत्र को ‘आजाद जम्मू एंड कश्मीर’ कहती है।
कभी शांत रहने वाला धरती का यह स्वर्ग आज चीनी ट्रकों से, ट्रालियों से, मजदूरों से, सैनिकों से अटा पड़ा है। इस सारे क्षेत्र में पर्यावरण की जबरदस्त हानि हुई है।
इस क्षेत्र में बारह महीने चलने वाला एकमात्र राजमार्ग है काराकोरम राजमार्ग। कभी ‘सिल्क रूट’ का हिस्सा रहे इस राजमार्ग की चौड़ाई अभी १० मीटर है। चीन उसे तीन गुना चौड़ा करना चाहता है अर्थात तीस मीटर का राजमार्ग!
चीन का पश्चिम राजमार्ग ‘ल्हासा काशगर / शिनजियांग राजमार्ग’ है। यही आगे जाकर काराकोरम राजमार्ग से मिलता है। यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसके २५० किलोमीटर के दायरे में चीन, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत ये पांच देश आते हैं।
सीमा क्षेत्रों में, दुर्गम स्थानों में रास्ता बनाने के लिए हमारे देश में ‘बॉर्डर रोड आर्गेनाईजेशन’ (इठज) है। उसी प्रकार चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ (झङअ) का निर्माण विभाग है। इस निर्माण विभाग के अंतर्गत हजारों की संख्या में चीनी सैनिक इस समय गिलगिट- बाल्टिस्तान में काराकोरम राजमार्ग को चौड़ा करने का काम कर रहे हैं।
इसकी योजना लगभग दस वर्ष पुरानी है। जून, २००६ में चीन के ‘एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (Aअडअउ) और पाकिस्तान की ‘नेशनल हाइवे अथॉरिटी’ के बीच एक एम् ओ यू हस्ताक्षरित हुआ, जिसके तहत चीन के शिनजियांग से पाकिस्तान के ग्वादर तक चौड़ा रास्ता बनाने की बात की गई थी। इसी के फॉलो-अप के रूप में तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के जुलाई, २०१० के चीन दौरे के समय एक और समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता हुआ चीन की ‘चाइना रोड एंड ब्रिज कारपोरेशन’ (उठइउ) के साथ. इसके तहत ‘काराकोरम हाईवे प्रोजेक्ट फेज २’ को क्लियर किया गयाअ
इन रास्तों के साथ ही अभी-अभी चीन की स्टेट काउंसिल ने गिलगिट- बाल्टिस्तान होते हुए लगभग छह सौ किलोमीटर के रेल लाइन की परियोजना घोषित की है। इस रेल लाइन के द्वारा पाकिस्तान के खैबर पख्तुनवाला क्षेत्र के आबोटाबाद जिले का हवेलियां शहर, ‘खुन्जेरर्ब पास’ से जुड़ जाएगा।
पिछले तीन महीनों से चीन ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां और तेज कर दी हैं। चीन की पी एल ए के सैनिक, गिलगिट- बाल्टिस्तान में डेरा डाल कर बैठे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी के गिलगिट क्षेत्र के मुख्यालय को अपने कब्जे में लेकर वहां से सारी सैन्य विषयक गतिविधियां प्रारंभ कर दी हैं।
वहां चीन के सैनिकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि भारतीय सीमा से भी वे सहज रूप से दिख जाते हैं। ठीक एक वर्ष पहले, १३ मार्च को सारे भारतीय समाचार जगत ने खबरें दी कि चीनी सैनिकों का बड़ा जमावड़ा ‘गुलाम कश्मीर’ में दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे गंभीरता से लिया था। इसके एक सप्ताह बाद, रविवार को (अर्थात २० मार्च को) लंदन से प्रकाशित ‘संडे गार्डियन’ ने ‘गुलाम कश्मीर’ में चीन की इस दमदार उपस्थिति पर एक बड़ी स्टोरी की थी। उसके एक हफ्ते पहले, ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने भी इस पर बहुत कुछ लिखा था।
भारत की दृष्टि से यह अत्यंत चिंताजनक है। पाकिस्तान ने पैसों के और सैन्य सहायता के बदले में, मानो पूरा गिलगिट- बाल्टिस्तान, चीन को सौंप दिया है। अत्यंत सामरिक महत्व के इस क्षेत्र में, धरती के असली स्वर्ग में, चीन के लाल सैनिकों की तोपें / बंदूकें भारत के लिए एक बड़ा सरदर्द हैं।
अर्थात पाक अधिकृत कश्मीर में बहुत कुछ बदला है। बहुत कुछ बदल रहा है। इस धरती का स्वर्ग अब उजाड़ होने जा रहा हैं..!

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