हिन्दू पंचांग : ‘रक्षा-सूत्र’ का त्यौहार

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आख़िर  ‘रक्षा-सूत्र’  प्रेम, शक्ति और सौहार्द्र का प्रतीक है। दुर्लभ समय में आपके प्रियजन की रक्षा और सुरक्षा के लिए यह सूत्र बांधा जाता है तो फिर ये केवल भाईयों की कलाई पर ही क्यों सजे! हर उस कलाई पर होना चाहिए जिसके सुख, समृद्धि, लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना की जाती है।

स्वर्ण सदी के ‘ट्रैजेडी-किंग’ दिलीप कुमार

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दिलीप कुमार केवल अपने दौर के ही नहीं बल्कि फ़िल्म जगत के सम्पूर्ण इतिहास में श्रेष्ठ अभिनेता माने जाते हैं। कई सुप्रसिद्ध अभिनेताओं के आदर्श रहे 'ट्रैजेडी-किंग' दिलीप कुमार का चले जाना भारतीय सिनेमा के  लिए एक स्वर्ण सदी का अंत है। लेकिन, ये भी निश्चित है कि उनकी फ़िल्में सदियों तक आने वाले हर अभिनयकर्ता के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगी।

तांबे की गागर

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तांबे के उस गागर सी थी सिया, जिसमें पानी केवल रखा भी रहे तो शुद्ध ही होता है। उसकी आंखों की चमक किसी पहाड़ी झील सी लगती थी और होंठों पर जब मुस्कुराहट आती तो लगता था कि मानो कई दिनों बाद बर्फ की ठंडक को तोड़ती पहाड़ की धूप खिली हो। उसके आने से ही तो इतनी रौशनी आई थी जीवन में कि हर एक क्षण किसी पूजा की थाली के दिये सा रौशन था।

 युवा गीतकारों का एक सुन्दर आदर्श – ‘अभिलाष’

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            अभिलाष जी के निधन के साथ युवा गीतकारों का एक सुन्दर आदर्श भले ही अपना शरीर छोड़ गया हो लेकिन, उनकी जगाई एक सुंदर सोच की अलख किसी भी संघर्षशील व्यक्ति के 'मन का विश्वास' कमज़ोर नहीं होने देगी।

अब और नहीं!

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हम सभी के लिए शर्मसार होने वाली बात है कि ’घरेलू हिंसा’ को आज भी हर परिवार का आंतरिक मामला ही समझा जाता है। इन घटनाओं को रोकने के बजाय लोग इनसे दूरी बना लेना बेहतर समझते हैं। आखिर कब जागेगी दुर्गा?

उमंग भरा त्यौहार मकर संक्रांति

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मकर संक्रांति पर्व को भारत के ही समान नेपाल में भी सुख, शान्ति और उन्नति का प्रतीक और शुभ कार्यों का वाहक माना जाता है। अच्छी फसल देने के लिए किसान इस दिन ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। यही कारण है कि इस त्यौहार को किसानों का त्यौहार भी कहा जाता है।

बॉलीवुड हॉरर फिल्में भी हैं दर्शकों की ख़ास पसन्द

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बॉलीवुड में फिल्में तो हर शुक्रवार रिलीज़ होती हैं लेकिन वो फिल्में जो जनता को सिनेमा घर से लेकर अपने घर तक एक डर के साये से घेर लें, हर हफ्ते देखने को नहीं मिलतीं - जी हाँ "हॉरर फिल्में" अपनी विशिष्टता के कारण लोगों में एक क्रेज़ पैदा करतीं हैं।

“सफ़ल एवं सुखी जीवन के अस्त्र”

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   सफलता प्राप्त करना सभी का सपना होता है लेकिन इस सपने को साकार कैसे करना है, ये ज़्यादातर लोग नहीं जानते। लेकिन फिर भी, होश संभालते ही, इस राह पर चलना हमारा धर्म बन जाता है। समाज में अपनी पहचान बनाना, स्वयं को सिद्ध करना हर मनुष्य का सपना ही नहीं रहता बल्कि ज़रूरत बन जाता है।

 क़लम के बादशाह – कैफ़ी

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 1951 में फ़िल्म 'बुज़दिल' से फ़िल्म इंडस्ट्री में बतौर गीतकार प्रवेश करने वाले और फिर वर्षों तक गीतों की दुनिया पे राज करने वाले कैफ़ी आज़मी ने अपने जीवन में पहली बार शायरी तब की थी जब वे मात्र ग्यारह वर्ष के थे।

गीतों की रिमझिम

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कहते हैं कि शब्दों में बहुत ताकत होती है इतनी की अगर प्रेम के हों तो ज़िन्दगी खुशियों से रौशन हो जाती है और अगर नफ़रत की हों तो वही ज़िन्दगी अंधेरे में डूब जाती है। शब्द ही हैं जो अपने पराये का भेद समझा जाते हैं।

तनाव में तारे

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बच्चे को यह बतलाएं कि जीवन के विशाल कैनवस पर, स्कूली परीक्षाएं केवल एक रंग है जो तस्वीर को अकेले पूरा नहीं कर सकता। तस्वीर को सुन्दर बनाने के लिए उसमें विभिन्न रंगों का होना ज़रूरी है और उससे भी ज़रूरी है उन रंगों का तालमेल। इस तरह चमकते तारे को तनाव से बचाए।

नायक को नायक ही रहने दो – कोई नाम न दो

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क्या ये कह देना भर काफी है कि कमर्शियल सिनेमा का काम सिर्फ मनोरंजन है, स्कूली शिक्षा बाँटना नहीं! और यदि येे काफी है तो फिर क्या ऐसा मनोरंजन देकर, विद्यालयों में दी जा रही  शिक्षा को भी अनावश्यक सिद्ध नहीं किया जा रहा ?

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