तमसो मा ज्योतिर्गमय…

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आइये, हम सब छोटे-बड़े, धनिक और गरीब सब इस दीपोत्सव में सम्मिलित हों। फिर किसी भी प्रकार के अंधकार को स्थान ही कहां रहेगा? हे भारत मां, हम सब को यही आशीष दो, कि ऐसे सात्त्विक सर्वकल्याणाकारी प्रकाश के पुंज हम बनें और दीपोत्सव सार्थ करें। हमें असत् से सत् की ओर, अंधकार से तेज-प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर, अशाश्वत से शाश्वत की ओर ले जाइये। हमारी भारतीय संस्कृति सकारात्मक है इसलिए शाश्वत, तेजयुक्त सत्य की ओर जाने की आकांक्षा, प्रार्थना, प्रेरणा हमारे जीवन की विशेषता है। प्रकाश अर्थात् खुलापन और तमस

विश्वगुरु हो भारतअपना

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भारत ईश्वर की प्रिय भारतभूमि है । इसलिए भारत का जीवितकार्य संभ्रमित विश्व का मार्गदर्शक अर्थात् गुरुहै। जहां स्वार्थ, स्पर्धा एवं लोभ का निर्माण होता है, अति भौतिकता प्रभावी होती है तो वहां ईश्वर प्रकट नहीं होता है। वर्तमान विश्व का परिदृश्य ऐसा है कि

आदिशक्ति मैं इस जगत की

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*****प्रमिला मेढे**** विश्व में भारत ही ऐसा देश है जहां स्त्री को ‘मंगलानारायणी मां सप्तशक्तिधारिणी या जगत की आदिशक्ति’ के रूप में देखा गया है। विश्वमान्य ग्रंथ श्री भगवद्गीता के विभूतियोग नामक दसवें अध्याय के चौतीसवें श्लोक की व्दितीय पंक

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